
देवों के देव महादेव की आराधना और उनकी विशेष कृपा पाने के लिए हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) के महीने को अत्यंत पवित्र और मंगलकारी माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना है। इस पूरे माह में श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ, जलाभिषेक और दान-पुण्य करने से शिव जी अपने भक्तों पर प्रसन्न होते हैं और उन्हें मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
सावन के दिनों में शिवलिंग पर बेलपत्र (बिल्वपत्र) अर्पित करने का एक खास और गहरा महत्व है। बेलपत्र के तीन पत्ते एक साथ जुड़े होते हैं, जिन्हें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का रूप माना जाता है। इसके साथ ही ये तीन पत्ते भगवान शिव के त्रिनेत्र और उनके अमोघ अस्त्र त्रिशूल का भी प्रतीक माने जाते हैं। यही वजह है कि सावन में शिव जी को खुश करने के लिए हर भक्त शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाता है। लेकिन, महादेव की पूर्ण कृपा तभी मिलती है जब बेलपत्र को सही नियमों के साथ अर्पित किया जाए। आइए जानते हैं शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि क्या है।
साल 2026 में कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना?
धार्मिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन के पवित्र महीने की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होने जा रही है, और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को होगा। इस साल सावन के महीने में बेहद शुभ चार सोमवार का अद्भुत संयोग बन रहा है। सावन सोमवार की महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:
-
पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
-
दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
-
तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
-
चौथा और अंतिम सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026
शिवलिंग पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र? सीधा या उल्टा, जानें सही नियम
शास्त्रों और शिवपुराण में शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने के बेहद स्पष्ट और कड़े नियम बताए गए हैं, जिनका पालन हर शिव भक्त को पूजा के समय करना चाहिए:
-
चिकना हिस्सा नीचे रखें: बेलपत्र चढ़ाते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि पत्ते का जो हिस्सा चिकना और चमकदार होता है, वह शिवलिंग को स्पर्श करना चाहिए यानी वह नीचे की तरफ होना चाहिए। बेलपत्र का खुरदरा हिस्सा हमेशा ऊपर की ओर रहना चाहिए।
-
मध्य भाग से पकड़ें: शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते समय उसे हमेशा तीन पत्तियों के मिलन बिंदु यानी उसके मध्य भाग (डंडी के पास) से पकड़कर ही भोलेनाथ को समर्पित करना चाहिए।
-
कटा-फटा न हो पत्र: शिव जी की पूजा में कभी भी खंडित सामग्री का उपयोग नहीं किया जाता। इसलिए ध्यान रखें कि बेलपत्र कहीं से भी कटा-फटा, छेद वाला या कीड़ों द्वारा खाया हुआ न हो।
-
चंदन से लिखें ‘ॐ’: शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से पहले अगर आप उसके चिकने हिस्से पर सफेद या पीले चंदन से ‘ॐ’ लिखते हैं या चंदन का तिलक लगाते हैं, तो यह पूजा अत्यंत फलदायी और उत्तम मानी जाती है। हमेशा स्वच्छ और साफ जल से धोकर ही बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाएं।
शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाना होता है शुभ?
शास्त्रों के अनुसार, भगवान आशुतोष बहुत भोले हैं, वे केवल सच्चे मन और अटूट श्रद्धा से चढ़ाए गए एक एकमात्र बेलपत्र से भी पूरी तरह संतुष्ट हो जाते हैं। हालांकि, अपनी मन्नत और संकल्प के अनुसार सामान्य तौर पर शिवलिंग पर 3, 5, 11, 21 या फिर 108 की संख्या में बेलपत्र चढ़ाना बेहद शुभ और मंगलकारी माना गया है।
शिवपुराण के अनुसार बेलपत्र अर्पित करने के दिव्य लाभ
शिवपुराण में विस्तार से वर्णन किया गया है कि जो भी भक्त सावन के महीने में या नियमित रूप से शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करता है, महादेव उसके जीवन के सभी संकटों, दुखों और पापों का नाश कर देते हैं। भोलेनाथ की कृपा से व्यक्ति की सभी अधूरी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही घर-परिवार में सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और शांति का वास होता है। जो लोग मानसिक तनाव या अशांति से गुजर रहे हैं, उन्हें शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से असीम मानसिक शांति और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है।
girls globe