
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने और दोनों महाशक्तियों के बीच ‘मध्यस्थ’ (Mediator) बनने का ख्वाब देख रहे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मंच पर हालत खस्ता हो चुकी है। इस्लामाबाद की बातों को न तो अमेरिका गंभीरता से सुन रहा है और न ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर मिलकर ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में कामयाब हो पाए हैं। दोनों तरफ से कूटनीतिक मोर्चे पर मुंह की खाने के बाद अब पाकिस्तान इस संकट से उबरने के लिए अपने सदाबहार दोस्त चीन की शरण में पहुंच गया है।
चीनी सरकारी टेलीविजन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ उनके सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी बीजिंग पहुंचे हैं। यहां शरीफ और मुनीर की जोड़ी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य शीर्ष कम्युनिस्ट अधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठकें कर रही है ताकि इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे का कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके। यह दौरा रणनीतिक रूप से इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि बीजिंग आने से ठीक पहले जनरल आसिम मुनीर ईरान के बेहद गोपनीय दौरे पर थे।
तेहरान में हुई पाकिस्तानी सेना प्रमुख की सीक्रेट मीटिंग
बीजिंग के लिए उड़ान भरने से ठीक पहले शुक्रवार और शनिवार को जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के साथ अचानक और बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे थे। यहां उन्होंने ईरान के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और शक्तिशाली सैन्य कमांडरों के साथ कई दौर की गुप्त बैठकें (Secret Meetings) कीं।
रक्षा सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, इस सीक्रेट दौरे का मुख्य मकसद कतर और पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए 30 दिनों के सीजफायर (युद्धविराम) के मसौदे पर तेहरान की रजामंदी हासिल करना था। हालांकि, ईरान की तरफ से इस प्रस्ताव को लेकर कोई बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके बाद पाकिस्तानी नेतृत्व को तुरंत चीन का रुख करना पड़ा।
पूरी दुनिया नाजुक मोड़ पर, चीजें सही दिशा में: शहबाज शरीफ
बीजिंग में चीनी अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मौजूदा वैश्विक हालातों पर चिंता व्यक्त की। बातचीत की जरूरत पर जोर देते हुए पीएम शरीफ ने कहा, “पूरी दुनिया इस समय एक बेहद नाजुक और ऐतिहासिक मोड़ से गुजर रही है। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने में हमेशा एक ईमानदार और तटस्थ भूमिका निभाई है। हमारे फील्ड मार्शल (आर्मी चीफ) खुद तेहरान में जमीनी हकीकत टटोल रहे थे और वे इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते थे।”
शहबाज शरीफ ने संकट के इस समय में सहयोग देने के लिए चीनी नेतृत्व का आभार भी जताया। उन्होंने आगे कहा, “अब चीजें धीरे-धीरे सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। मैं मध्य पूर्व में शांति को बढ़ावा देने में चीन के सक्रिय सहयोग के लिए उसका धन्यवाद करना चाहूंगा।” गौरतलब है कि बीजिंग ने भी संकेत दिए हैं कि वह इस युद्ध को रुकवाने और समझौता कराने के लिए किसी भी सकारात्मक योगदान के लिए पूरी तरह तैयार है।
केवल नाम बटोर रहा पाकिस्तान, असली जोर लगा रहा चीन
इस पूरे घटनाक्रम में एक कड़वी हकीकत यह भी है कि पाकिस्तान भले ही मध्यस्थता का सेहरा अपने सिर बांधने के लिए उछल-कूद कर रहा हो, लेकिन पर्दे के पीछे से असली कूटनीतिक जोर चीन ही लगा रहा है। युद्ध की शुरुआत से ही बीजिंग इस जंग को सुलझाने में साइलेंट मोड में काम कर रहा है। पिछले महीने पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच सुलह कराने के लिए इस्लामाबाद में एक बड़ी इंटरनेशनल बैठक भी बुलाई थी, जो पूरी तरह बेनतीजा रही थी।
इससे पहले दोनों देशों के बीच जो शुरुआती 10 दिनों का सीजफायर हुआ था, उसमें भी असली भूमिका चीन की ही थी। खुफिया रिपोर्ट्स की मानें तो चीन के शीर्ष राजनयिकों ने ईरानी अधिकारियों को 20 से ज्यादा फोन कॉल्स करके दबाव बनाया था, तब जाकर तेहरान अस्थाई युद्धविराम के लिए राचा हुआ था।
तेल आपूर्ति ठप होने से भारत की बढ़ी चिंता, कैसे बनेगी बात?
इधर, अमेरिका और ईरान के बीच कोई अंतिम डील न होने और बातचीत का सिलसिला बार-बार रुकने से वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) पर संकट के बादल गहरे हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। समुद्री व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) भी अब तक पूरी तरह से नहीं खुल पाया है, जिससे भारत समेत कई एशियाई देशों की आर्थिक चिंताएं बढ़ गई हैं।
इस गतिरोध की मुख्य वजह यह है कि ईरान जहां अमेरिका पर नाजायज और एकतरफा शर्तें थोपने का आरोप लगा रहा है, वहीं अमेरिका का साफ कहना है कि जब तक तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) पर पूरी तरह से ब्रेक नहीं लगाता, तब तक वाशिंगटन किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा। हालांकि, इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने उम्मीदें जगाई हैं, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि ईरान के साथ कुछ मुख्य मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और जल्द ही एक बड़ी ‘गुड न्यूज’ दुनिया के सामने होगी।
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