
यदि किसी कारणवश आप निर्धारित 31 जुलाई की समय सीमा तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं कर पाए हैं, तो आपको परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इनकम टैक्स नियमों के तहत यदि ओरिजिनल डेडलाइन छूट जाती है, तब भी टैक्सपेयर्स के पास बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) फाइल करने का कानूनी विकल्प मौजूद होता है। आइए जानते हैं कि आप कब तक बिलेटेड ITR दाखिल कर सकते हैं, इस पर कितनी पेनल्टी लगती है और इसके क्या अन्य जरूरी नियम हैं।
कब तक फाइल कर सकते हैं बिलेटेड ITR?
इन्कम टैक्स एक्ट की धारा 139(4) के तहत, जिन लोगों की ओरिजिनल डेडलाइन (जैसे 31 जुलाई) छूट जाती है, वे अपने उस वित्तीय वर्ष का बिलेटेड रिटर्न आगामी 31 दिसंबर तक या फिर एसेसमेंट पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो, फाइल कर सकते हैं। यानी यदि आप तय समय पर रिटर्न नहीं भर पाए, तो आपके पास साल के अंत तक इसे सुधारने का मौका रहता है।
लेट फीस और पेनल्टी के नियम
तय समय के बाद रिटर्न दाखिल करने पर सरकार द्वारा पेनल्टी यानी लेट फीस वसूली जाती है:
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5 लाख रुपये से अधिक की आय पर: यदि आपकी कुल आय 5 लाख रुपये सालाना से अधिक है, तो बिलेटेड ITR फाइल करने पर आपको 5,000 रुपये की लेट फीस (धारा 234F के तहत) चुकानी होगी।
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5 लाख रुपये तक की आय पर: यदि आपकी कुल आय 5 लाख रुपये या उससे कम है, तो अधिकतम लेट फीस 1,000 रुपये तय की गई है।
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ब्याज (Interest): लेट फीस के अलावा, यदि आपका कोई टैक्स बकाया है, तो ओरिजिनल ड्यू डेट से लेकर एक्चुअल फाइलिंग की तारीख तक उस बकाया टैक्स पर प्रति माह 1% की दर से अतिरिक्त ब्याज (धारा 234A के तहत) भी देना पड़ सकता है।
बिलेटेड ITR फाइल करने के नुकसान
समय पर रिटर्न न भरने के कारण कुछ वित्तीय हानियां भी उठानी पड़ सकती हैं:
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लॉस कैरी-फॉरवर्ड न होना: यदि आपको शेयर बाजार या बिजनेस में घाटा (Loss) हुआ है और आप उसे आगे के वर्षों के मुनाफे में एडजस्ट करने के लिए कैरी-फॉरवर्ड करना चाहते हैं, तो यह सुविधा बिलेटेड रिटर्न में नहीं मिलती है।
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रिमांड या रिफंड में देरी: लेट रिटर्न फाइल करने पर टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा रिफंड प्रोसेसिंग में अधिक समय लग सकता है।
क्या इसके बाद भी कोई विकल्प बचता है?
यदि आप 31 दिसंबर की डेडलाइन भी चूक जाते हैं, तब भी इनकम टैक्स एक्ट के तहत अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) फाइल करने का प्रावधान होता है, जिसे संबंधित एसेसमेंट ईयर के अंत से 48 महीनों के भीतर भारी अतिरिक्त टैक्स चुकाकर भरा जा सकता है। हालांकि, बेहतर यही रहता है कि आप अतिरिक्त पेनल्टी और कानूनी झंझटों से बचने के लिए समय रहते अपना बिलेटेड ITR पूरा कर लें।
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