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स्कूल जाने वाली 5 में से 1 किशोरी के पीरियड्स नहीं हैं सामान्य, एम्स के सर्वे ने बढ़ाई चिंता

देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर चिंता पैदा करने वाला सर्वे रिपोर्ट सामने आया है। इस मेडिकल सर्वे के अनुसार, देश के स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाली हर 5 में से 1 यानी करीब 20 प्रतिशत किशोरियों (School-going Girls) के पीरियड्स यानी मासिक धर्म (Menstrual Cycle) सामान्य नहीं हैं। किशोरावस्था की दहलीज पर कदम रखने वाली बालिकाओं में हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं, जिसके दूरगामी परिणाम उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकते हैं। एम्स के इस व्यापक अध्ययन के बाद देश भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों, स्त्री रोग विशेषज्ञों और अभिभावकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है, क्योंकि कम उम्र में इस तरह की समस्याएं भविष्य में बांझपन (Infertility), मोटापा, मधुमेह और मानसिक तनाव जैसी कई अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

AIIMS के इस महत्वपूर्ण सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े और दायरे

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा स्कूली छात्राओं के स्वास्थ्य खान-पान और शारीरिक विकास को लेकर यह विस्तृत अध्ययन किया गया है। इस सर्वे में विभिन्न आयु वर्ग की किशोरियों को शामिल किया गया और उनके मासिक धर्म के चक्र, अनियमितताओं, दर्द, रक्तस्राव और जीवनशैली से जुड़े विभिन्न पहलुओं का बारीकी से विश्लेषण किया गया। सर्वे के जो परिणाम सामने आए, वे वास्तव में डराने वाले हैं। लगभग 20 प्रतिशत बालिकाओं ने अनियमित पीरियड्स (Irregular Periods), अत्यधिक दर्द (Dysmenorrhea), और हॉर्मोनल गड़बड़ियों की पुष्टि की। डॉक्टरों का कहना है कि पहले इस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं महिलाओं में अधिक उम्र में देखने को मिलती थीं, लेकिन अब यह बेहद कम उम्र की स्कूली लड़कियों में आम होती जा रही है, जो आधुनिक समाज और बदलती जीवनशैली के खतरे का स्पष्ट संकेत है।

PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) बन रहा है किशोरियों के लिए बड़ा खतरा

इस पूरे सर्वे में जिस मुख्य बीमारी या सिंड्रोम की ओर सबसे ज्यादा इशारा किया गया है, वह है पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस (PCOS) और पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज (PCOD)। यह एक ऐसा हार्मोनल विकार है जिसमें महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन (Androgens) का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण अंडाशय में सिस्ट बनने लगते हैं और पीरियड्स का चक्र पूरी तरह असंतुलित हो जाता है। इस सिंड्रोम के कारण लड़कियों के चेहरे पर अनचाहे बाल उगना, तेजी से वजन बढ़ना, चेहरे पर मुंहासे (Acne), और बाल झड़ने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। एम्स के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती दौर में ही इन लक्षणों की पहचान करके उनका इलाज या खान-पान में सुधार न किया जाए, तो आगे चलकर ये समस्याएं लाइलाज रूप ले सकती हैं।

बदलती जीवनशैली, जंक फूड और शारीरिक सक्रियता की कमी मुख्य वजह

कम उम्र की बच्चियों में हार्मोनल असंतुलन और पीरियड्स की इस अनियमितता के पीछे आधुनिक युग की बिगड़ती हुई जीवनशैली (Modern Lifestyle) को सबसे बड़ा जिम्मेदार माना जा रहा है। आज के समय में स्कूली बच्चे और किशोरियां आउटडोर गेम्स खेलने के बजाय अपना अधिकांश समय मोबाइल स्क्रीन, लैपटॉप और टीवी के सामने बिताते हैं, जिससे फिजिकल एक्टिविटी (Physical Activity) लगभग शून्य हो चुकी है। इसके अलावा, पैकेटबंद जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, मैदे से बनी चीजें, फास्ट फूड और अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का अंधाधुंध सेवन उनके शरीर के हॉर्मोनल सिस्टम को अंदर से खोखला कर रहा है। समय पर न सोना, रातभर जागना और परीक्षा या पढ़ाई का बढ़ता मानसिक तनाव भी इस बीमारी को ट्रिगर करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

अभिभावकों के लिए चेतावनी और समय रहते सुधार के जरूरी उपाय

एम्स के इस डराने वाले सर्वे के बाद डॉक्टरों और स्वास्थ्य सलाहकारों ने सभी माता-पिता को यह सख्त चेतावनी दी है कि वे अपनी बच्चियों के स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें। यदि किसी किशोरी के पीरियड्स लगातार अनियमित रहते हैं, बहुत ज्यादा दर्द होता है या अचानक वजन बढ़ने लगता है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत किसी अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से परामर्श लेना चाहिए। बच्चियों के दैनिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, ड्राई फ्रूट्स और संतुलित आहार को शामिल करें तथा उन्हें जंक फूड से दूर रखें। इसके अलावा, योग, प्राणायाम और नियमित व्यायाम को उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर इस गंभीर समस्या के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।