Wednesday , September 23 2026

जमुई कांड पर प्रशांत किशोर का बिहार सरकार पर तीखा हमला

बिहार की सियासत में इन दिनों बयानों के तीर और तीखे हमलों का दौर इस कदर परवान चढ़ चुका है कि हर एक सनसनीखेज घटना राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सूबे के जमुई जिले में घटी हालिया घटना को लेकर अब राजनीतिक गलियारों से एक बहुत ही बड़ा और कड़ा बयान सामने आया है। जन सुराज के सूत्रधार और रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने जमुई कांड (Jamui Incident) को लेकर बिहार सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर बेहद तीखा हमला बोला है। प्रशांत किशोर ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए एक बहुत ही चुभने वाला सवाल पूछा है कि “अगर आज के दौर में सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल नहीं होता, तो आखिर इस जुल्म और सच्चाई के बारे में किसे पता चलता?” उनके इस बयान के सामने आने के बाद से बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है और विपक्षी खेमे के साथ-साथ आम जनता के बीच भी सुशासन के दावों की पोल खुलने पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस लेख के माध्यम से हम विस्तार से जानेंगे कि प्रशांत किशोर ने इस जमुई प्रकरण पर सरकार को किस प्रकार घेरा है और इसके राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं।

जमुई की वह सनसनीखेज घटना और सोशल मीडिया की ताकत का सच

बिहार के जमुई जिले से हाल ही में एक ऐसी दर्दनाक घटना प्रकाश में आई थी, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया था। आमतौर पर कई बार स्थानीय स्तर पर होने वाले अपराध और दबंगों द्वारा किए जाने वाले अत्याचार पुलिस के फाइलों या थानों की चारदीवारी के भीतर ही दबकर रह जाते हैं, क्योंकि पीड़ितों की आवाज को दबाने का पूरा प्रयास किया जाता है। लेकिन आधुनिक डिजिटल युग और स्मार्टफोन के इस दौर में जब वैसी किसी वीभत्स घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है, तो प्रशासन और सरकार पर कार्रवाई करने का भारी दबाव बन जाता है। जमुई के इस मामले में भी जब वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैलने लगा, तब जाकर जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों की नींद खुली और उन्होंने हरकत में आते हुए आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू किया। इसी पहलू पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने राज्य की कानून-व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

प्रशांत किशोर का सरकार से सीधा सवाल: “क्या पुलिस व्यवस्था सिर्फ वीडियो वायरल होने पर जागेगी?”

अपनी जन सुराज पदयात्रा और नुक्कड़ सभाओं के दौरान बिहार के कोने-कोने की यात्रा कर रहे प्रशांत किशोर ने सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि आज बिहार में हालात ऐसे हो चुके हैं कि आम आदमी की फरियाद थाने में तब तक नहीं सुनी जाती, जब तक कि मामला सोशल मीडिया पर ट्रेंड न कर जाए या कोई वीडियो वायरल न हो जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि जमुई की इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं हुआ होता, तो शायद यह मामला भी फाइलों के नीचे दफन हो जाता और पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकता रहता। प्रशांत किशोर ने इस बात पर जोर दिया कि यह स्थिति किसी भी सभ्य और लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद शर्मनाक है, जहां पुलिस और प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए भी वायरल वीडियो का इंतजार करना पड़ता है। सरकार के सुशासन के दावों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि कागजों और विज्ञापनों में चल रही कानून-व्यवस्था और जमीन पर दिख रही हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है।

सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया और विपक्ष द्वारा भुनाए जा रहे राजनीतिक मुद्दे

प्रशांत किशोर के इस आक्रामक और करारे हमले के बाद सत्ताधारी दलों और प्रशासन की तरफ से भी अपनी सफाई पेश की जानी शुरू हो गई है। सरकार के प्रवक्ताओं का यह तर्क है कि जैसे ही पुलिस के संज्ञान में यह मामला आया, त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों को दबोच लिया गया और कानून अपना काम पूरी सख्ती से कर रहा है। हालांकि, विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का एक और बड़ा हथियार मिल गया है। जमुई कांड और उसके बाद सामने आए वीडियो ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों में आम नागरिकों की सुरक्षा और त्वरित न्याय को लेकर अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मुद्दे आगामी चुनावों में एक बड़ा नैरेटिव सेट करने का काम करेंगे, जहां शासन की विफलता और कानून-व्यवस्था की स्थिति सबसे अहम बहस का केंद्र बनेगी।

जनता की बढ़ती जागरूकता और बदलाव की बयार

बिहार की जागरूक हो रही जनता अब सब कुछ बहुत बारीकी से देख और समझ रही है। चाहे वह रोजगार का मुद्दा हो, पलायन का संकट हो या फिर महिलाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा का सवाल हो, जनता अब सिर्फ पारंपरिक वादों पर भरोसा करने को तैयार नहीं है। प्रशांत किशोर लगातार अपनी सभाओं में यह कह रहे हैं कि जब तक बिहार के लोग अपनी जाति और धर्म से ऊपर उठकर अपने बच्चों के भविष्य, अच्छी शिक्षा और बेहतर कानून-व्यवस्था के नाम पर वोट नहीं करेंगे, तब तक व्यवस्था में कोई बुनियादी सुधार नहीं आ सकता। जमुई कांड के बहाने उठाया गया यह मुद्दा इस बात का प्रतीक है कि राज्य की राजनीति में अब हर छोटी-बड़ी घटना पर पैनी नजर रखी जा रही है, और आने वाले समय में जनता इन तमाम मामलों का हिसाब चुनाव के मैदान में जरूर लेगी।