सावन का पहला सोमवार आज: दुर्लभ शुभ योग में शिवभक्तों की धूम, शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए जानें सबसे उत्तम मुहूर्त

सनातन संस्कृति में देवाधिदेव महादेव की आराधना के लिए समर्पित पवित्र सावन का महीना आरंभ हो चुका है और आज सावन का पहला सोमवार है। इस पावन दिन पर देश भर के तमाम शिवालयों में सुबह से ही ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ की गूंज सुनाई दे रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आज सावन के पहले सोमवार पर बेहद दुर्लभ और मंगलकारी शुभ योग का संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन की महत्ता कई गुना बढ़ गई है। यदि आप भी आज भोलेनाथ का जलाभिषेक करने की सोच रहे हैं, तो पूजा के सटीक और उत्तम मुहूर्त के बारे में जरूर जान लें ताकि आपकी आराधना पूर्ण फलदायी हो सके।

सावन के पहले सोमवार पर बन रहा है अद्भुत और पावन संयोग

इस वर्ष सावन के पहले सोमवार को कई खास खगोलीय और ज्योतिषीय योगों का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है। पंचांग के अनुसार, आज के दिन व्रतियों को व्रत और उपवास के साथ-साथ विशेष अनुष्ठान करने का अभूतपूर्व लाभ मिलने वाला है। सावन का महीना यूं ही प्रकृति और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है, और जब इसकी शुरुआत या पहला सोमवार किसी विशेष योग में हो, तो भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा अपने भक्तों पर बरसती है। इस दिन मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है और सुबह से ही भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए आज के सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त

भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए सही समय और मुहूर्त का होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, आज सावन के पहले सोमवार पर जलाभिषेक के लिए निम्नलिखित शुभ मुहूर्त सबसे उत्तम माने गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:15 बजे से 05:00 बजे तक (यह समय साधना और ध्यान के लिए सबसे श्रेष्ठ है)।

  • प्रातः काल का शुभ मुहूर्त: सुबह 05:30 बजे से लेकर सुबह 09:00 बजे तक (इस दौरान भक्त आसानी से कतार में लगकर जलाभिषेक कर सकते हैं)।

  • प्रदोष काल मुहूर्त: शाम को सूर्यास्त के समय यानी लगभग 06:45 बजे से रात 08:15 बजे तक (यह समय शिवजी की विशेष आरती और रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत फलदायी होता है)।

जलाभिषेक की सही विधि और किन चीजों से करें भोलेनाथ को प्रसन्न

सावन के पहले सोमवार के दिन विधि-विधान से पूजा करने से कुंडली के तमाम दोष दूर होते हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय तांबे या पीतल के लोटे का उपयोग करना चाहिए। जल में गंगाजल, कच्चा दूध, शहद, शक्कर और काले तिल मिलाकर अभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके पश्चात भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आ आक के फूल, चंदन, भांग और अक्षत (चावल) अर्पित करें। अंत में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए घी का दीपक जलाएं और अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।