बांकीपुर उपचुनाव में पलटी बाजी: जश्न के लिए तैयार थे 200 क्विंटल लड्डू, पर वोटों की गिनती ने बदला सियासी समीकरण

बिहार की हॉट सीट बन चुकी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे जैसे-जैसे सामने आ रहे हैं, सियासी गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। इस चुनाव ने साल 2015 के राजनीतिक समीकरणों और यादों को ताजा कर दिया है। मतगणनी शुरू होने से पहले भारतीय जनता पार्टी की जीत के दावे और जश्न की जो तैयारियां थीं, उन्हें शुरुआती रुझानों और वोटों के अंतर ने पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। बांकीपुर सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय नजर आ रहा है, जहां हर राउंड के साथ सियासी पारा चढ़ता जा रहा है।

जश्न की थी भारी तैयारी पर शुरुआती रुझानों ने चौंकाया

मतगणना के दिन सुबह से ही राजनीतिक दलों के कैंप में हलचल तेज थी। भाजपा खेमे में जीत का ऐसा जबरदस्त भरोसा था कि कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाने के लिए एडवांस में ही करीब 200 क्विंटल लड्डू तैयार करवा लिए थे। पार्टी कार्यकर्ताओं का दावा था कि बांकीपुर का यह गढ़ हमेशा की तरह उनके पाला में ही रहेगा। लेकिन जैसे ही एवं ईवीएम के मतपेटी खुले और पहले राउंड के नतीजे सामने आए, हवा का रुख बदल गया। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर और भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के बीच कड़े मुकाबले में शुरुआती दौर से ही जो बढ़त देखने को मिली, उसने लड्डू बांटने वालों की उम्मीदों पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए।

2015 की यादें ताजा और जनता का बदला मिजाज

बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से भाजपा का एक मजबूत और सुरक्षित किला माना जाता रहा है। यही वजह है कि यहां के चुनावी परिणाम पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। इस उपचुनाव में कम मतदान प्रतिशत और नए राजनीतिक विकल्पों की एंट्री ने परिणामों को अनिश्चित बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर के इन रुझानों ने साल 2015 के चुनावी माहौल की याद दिला दी है, जब जमीनी समीकरणों ने तमाम बड़े दावों और अनुमानों को गलत साबित कर दिया था। राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी भी इस त्रिकोणीय संघर्ष में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की जुगत में हैं, जिससे मुकाबला और भी ज्यादा रोमांचक हो गया है।