लालू यादव के अचूक ‘SLL’ फॉर्मूले को आखिर क्यों नहीं डिकोड कर पाए तेजस्वी यादव? सियासत में क्या नया दांव चलेगी आरजेडी

बिहार की राजनीति के चतुर और अनुभवी खिलाड़ी माने जाने वाले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक चालों को समझना हर किसी के बस की बात नहीं रही है। राजनीतिक गलियारों में हमेशा से लालू यादव के सोशल इंजीनियरिंग और चुनावी मैनेजमेंट के खास फॉर्मूलों की चर्चा होती रही है, जिसमें उनका ‘SLL’ (Social, Land and Local/Leadership) समीकरण बेहद अहम माना जाता रहा है। लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों के बाद यह सवाल सियासी गलियारों में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर लालू यादव के इस अचूक फॉर्मूले को उनके उत्तराधिकारी और युवा नेता तेजस्वी यादव पूरी तरह से क्यों नहीं समझ पाए? इस राजनीतिक पहेली के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आरजेडी अपनी रणनीति में क्या बड़ा बदलाव करने जा रही है।

क्या है लालू यादव का पुराना और अचूक ‘SLL’ राजनीतिक फॉर्मूला?

लालू प्रसाद यादव ने अपने दशकों लंबे राजनीतिक सफर के दौरान बिहार की जमीनी राजनीति को साधने के लिए एक ऐसा मजबूत ताना-बाना बुना था, जिसे ‘SLL’ या उनके विशिष्ट सामाजिक-राजनीतिक समीकरण के रूप में जाना जाता है। इसमें समाज के हर तबके को जोड़ना, स्थानीय समीकरणों को साधना और जमीन स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं को आगे बढ़ाना शामिल था। इस फॉर्मूले की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें हर जाति, वर्ग और क्षेत्र के नुमाइंदों को भरोसे में लेकर एक अजेय वोट बैंक तैयार किया जाता था। लालू यादव की इसी शैली के दम पर पार्टी सालों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में बनी रही और आज भी उनके इस करिश्माई राजनीतिक कौशल की मिसाल दी जाती है।

नई पीढ़ी की राजनीति और तेजस्वी यादव से कहां हुई चूक?

समय के साथ राजनीति का स्वरूप बदल चुका है और आज की युवा पीढ़ी या नए दौर के मतदाता केवल पुरानी जातीय लकीरों के सहारे वोट नहीं देते। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव ने पार्टी को ए टू जेड (A to Z) पार्टी बनाने की कोशिश तो की और युवाओं को रोजगार जैसे मुद्दों पर फोकस भी किया, लेकिन वे पिता लालू यादव के उस पारंपरिक ‘SLL’ संतुलन को पूरी तरह से जमीन पर उतारने में कहीं न कहीं असमूक साबित हुए। नए दौर की कॉर्पोरेट स्टाइल राजनीति और सोशल मीडिया के इस युग में जमीनी स्तर के पुराने कार्यकर्ताओं और पारंपरिक रणनीतिक तालमेल के बीच एक खालीपन देखने को मिला, जिसका खामियाजा पार्टी को कई मोर्चों पर भुगतना पड़ा है।

अब आगे क्या करेगी आरजेडी? क्या होगा तेजस्वी यादव का नया मास्टरस्ट्रोक?

अपनी रणनीतिक कमियों और पुरानी चूकों से सबक लेते हुए अब आरजेडी कैंप में एक बार फिर मंथन का दौर शुरू हो चुका है। पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि आगामी चुनावों और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए केवल आधुनिक नारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि लालू यादव के उस पारंपरिक और पुख्ता जमीनी फॉर्मूले को नए कलेवर में ढालना होगा। तेजस्वी यादव आने वाले दिनों में अपनी पार्टी की कार्यशैली में बड़ा बदलाव कर सकते हैं, जिसमें युवाओं के जोश के साथ-साथ पुराने और अनुभवी नेताओं के अनुभव का मिश्रण देखने को मिल सकता है। बिहार की राजनीति में आरजेडी का यह अगला कदम राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख सकता है।