
बिहार के राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक तंत्र में इन दिनों एक ही नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, और वह है उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) के नेतृत्व और उनके फैसलों का अंदाज। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद से शुरुआती 100 दिन पूरे हो चुके हैं, और इन सौ दिनों के भीतर सम्राट चौधरी ने अपने सख्त तेवर और ताबड़तोड़ एक्शन से पूरे राज्य की राजनीति का नक्शा ही बदल कर रख दिया है। इन 100 दिनों के भीतर सरकार ने विधानसभा में रिकॉर्ड 13 महत्वपूर्ण विधेयक (Bills) पास कराए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करने के लिए अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 16 बड़े एनकाउंटर को अंजाम दिया गया है। अपराधियों में खौफ और जनता के बीच सुशासन की वापसी का यह दौर अब बिहार की सियासत का सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बन चुका है।
100 दिनों में 13 धमाकेदार विधेयक और विधानसभा में कड़े फैसलों की बाढ़
सम्राट चौधरी के इन शुरुआती 100 दिनों के कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता उनका विधायी (Legislative) और प्रशासनिक आक्रामक रुख रहा है। सरकार ने अपने विजन को साफ करते हुए महज तीन महीनों के भीतर सदन में कुल 13 नए और ऐतिहासिक विधेयक पेश किए और उन्हें सफलतापूर्वक पास भी कराया। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुधारना, भूमि विवादों का स्थाई समाधान निकालना, युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलना और सबसे बढ़कर अपराध पर लगाम कसने के लिए कड़े कानून बनाना रहा है। विपक्ष भले ही इन विधेयकों और फैसलों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी कम अवधि में इतने बड़े विधायी कदम उठाना किसी भी राजनीतिक इच्छाशक्ति का एक मजबूत उदाहरण है।
अपराध पर जीरो टॉलरेंस नीति: 16 एनकाउंटर से कांपे अपराधी, पुलिस को खुली छूट
बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर हमेशा से विपक्ष हमलावर रहा है, लेकिन सम्राट चौधरी ने गृह विभाग या अपने प्रभाव वाले महकमों के जरिए यह साबित कर दिया है कि राज्य में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। इन 100 दिनों के भीतर बिहार पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए राज्यभर में 16 बड़े एनकाउंटर किए हैं। कई कुख्यात अपराधी या तो पुलिस की गोली का शिकार बने हैं या फिर सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। पुलिस की इस बेखौफ कार्रवाई से राज्य के आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है, वहीं दूसरी तरफ अपराध जगत से जुड़े तत्वों के बीच भगदड़ और खौफ का माहौल साफ तौर पर देखा जा सकता है।
राजनीतिक नफा-नुकसान और जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता का ग्राफ
इन 100 दिनों के कामकाज ने सम्राट चौधरी को बिहार की राजनीति के सबसे कद्दावर और फायरब्रांड नेताओं की सूची में ला खड़ा किया है। एक तरफ जहाँ उनके समर्थकों का मानना है कि वे ‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर बिहार में कड़े और त्वरित फैसले ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विरोधी दल उनकी कार्यशैली को लेकर लगातार हमलावर हैं। बावजूद इसके, इन 100 दिनों के भीतर जिस गति से विकास कार्य, कड़े प्रशासनिक फेरबदल और अपराधियों पर नकेल कसी गई है, उसने यह तय कर दिया है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति इसी ट्रैक पर आगे बढ़ने वाली है और जनता की उम्मीदें इस नई सरकार से काफी ज्यादा बढ़ चुकी हैं।
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