मानसून में डेंगू ही नहीं, इन 7 खतरनाक बीमारियों का रहता है सावन में सबसे ज्यादा खतरा; ऐसे रखें अपना ख्याल

मानसून का सुहाना मौसम गर्मी से राहत तो जरूर दिलाता है, लेकिन अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है। इस मौसम में नमी और जगह-जगह जलभराव के कारण बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। लोग आमतौर पर बारिश के दिनों में केवल डेंगू और मलेरिया को ही मुख्य खतरा मानते हैं, लेकिन सच तो यह है कि सावन के महीने में ऐसी कई अन्य बीमारियां भी हैं जो चुपचाप हमारे स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो ये बीमारियां बड़ी परेशानी का सबब बन सकती हैं। आइए जानते हैं मानसून में फैलने वाली उन 7 प्रमुख बीमारियों के बारे में और इनसे बचने के आसान उपायों के बारे में।

1. डेंगू (Dengue)

मानसून के दौरान एडीज मच्छरों के काटने से फैलने वाला डेंगू सबसे आम और खतरनाक बीमारियों में से एक है। इसमें मरीज को तेज बुखार, जोड़ों और हड्डियों में भयंकर दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते और प्लेटलेट्स में भारी गिरावट की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे बचाव के लिए घर के आस-पास पानी जमा न होने दें और पूरी बाजू के कपड़े पहनें।

2. मलेरिया (Malaria)

रुका हुआ और गंदा पानी एनोफिलीज मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल जगह होता है। इन मच्छरों के काटने से मलेरिया फैलता है, जिसके मुख्य लक्षणों में तेज ठंड लगकर कपकपी के साथ बुखार आना, सिरदर्द, उल्टी और अत्यधिक कमजोरी महसूस होना शामिल है। सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें और खिड़कियों पर जाली लगवाएं।

3. टायफाइड (Typhoid)

बरसात के दिनों में दूषित पानी और बाहर का खुला हुआ या अनहायोजेनिक खाना खाने से टायफाइड का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। यह साल्मोनेला टायफी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जिससे लंबे समय तक रहने वाला बुखार, पेट में तेज दर्द, कमजोरी और भूख न लगने जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। इस मौसम में हमेशा उबला हुआ या अच्छी तरह से फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।

4. हैजा या कॉलरा (Cholera)

हैजा दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलने वाला एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है। इसके संक्रमण के कारण मरीज को अचानक से लगातार दस्त और उल्टी शुरू हो जाती है, जिससे शरीर में पानी की भारी कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और बाहर का स्ट्रीट फूड खाने से पूरी तरह बचें।

5. पेट का संक्रमण और फूड पॉइजनिंग (Gastroenteritis & Food Poisoning)

मानसून में हवा में नमी अधिक होने के कारण खाने-पीने की चीजें बहुत जल्दी खराब होने लगती हैं। बासी भोजन या दूषित पानी का सेवन करने से पेट में संक्रमण, दस्त, उल्टी और ऐंठन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। हमेशा ताजा बना हुआ गर्म भोजन ही खाएं और अपने हाथों को बार-बार साबुन से अच्छी तरह धोएं।

6. वायरल फ्लू और सर्दी-जुकाम (Viral Flu & Common Cold)

मौसम में अचानक होने वाले बदलाव और तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण वायरल संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है। सर्दी, जुकाम, गले में खराश, हल्की खांसी और बदन दर्द इसके सामान्य लक्षण हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को मजबूत रखने के लिए गिलोय का रस, हर्बल चाय और विटामिन सी से भरपूर फलों का सेवन करें।

7. त्वचा के फंगल इन्फेक्शन (Skin Fungal Infections)

बरसात के दिनों में लगातार भीगने या कपड़ों में नमी बने रहने के कारण त्वचा पर फंगस और बैक्टीरिया आसानी से पनपने लगते हैं। दाद, खाज, खुखुली और पैरों की उंगलियों के बीच इन्फेक्शन इस मौसम में आम समस्याएं हैं। अपनी त्वचा को हमेशा सूखा और साफ रखें, तथा गीले कपड़ों या जूतों को ज्यादा देर तक पहने रहने से बचें।

सावन के मौसम में स्वास्थ्य की देखभाल कैसे करें?

  • पीने के पानी का रखें ध्यान: हमेशा पानी उबालकर या अच्छी तरह से छानकर ही पिएं, ताकि पेट की गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।

  • मच्छरों से बचाव: घर के आसपास गमलों, कूलरों और टायरों में पानी जमा न होने दें। समय-समय पर एंटी-मॉस्किटो स्प्रे का इस्तेमाल करें।

  • खानपान में सुधार: बाहर की तली-भुनी और खुली चीजों के सेवन से पूरी तरह परहेज करें। आहार में ताजे फल और हरी सब्जियों को शामिल करें।

  • इम्यूनिटी मजबूत करें: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हल्दी वाला दूध, काढ़ा और गुनगुना पानी पीने की आदत डालें।