
भारतीय रणनीतिक और सामरिक इतिहास में एक ऐसा मील का पत्थर गाड़ने की तैयारी चल रही है, जो आने वाले दशकों में भारत की उत्तरी सीमाओं की रक्षा और भू-राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर रख देगा। चीन की हरकतों और उसकी विस्तारवादी नीतियों को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में एक मेगा प्रोजेक्ट पर दिन-रात काम तेज कर दिया है। यह कोई आम सड़क निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि 1,824 किलोमीटर लंबा ‘फ्रंटियर हाईवे’ (Frontier Highway) है, जो सीधे तौर पर लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी (LAC) के बेहद करीब से गुजरेगा। इस महा-परियोजना के पूरा होने से न केवल भारतीय सेना और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही चीन सीमा तक बिजली की रफ्तार से हो सकेगी, बल्कि दशकों से उपेक्षित पड़े इस सीमावर्ती इलाके में विकास की एक ऐसी गंगा बहेगी जो भारत के दुश्मनों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। भारत ने साल 2029 तक इस पूरे नेटवर्क को सीधे लद्दाख तक जोड़ने का एक बहुत बड़ा और अचूक टारगेट सेट किया है, जिसके बाद चीन की हर चाल का मुकाबला करना भारत के लिए बाएं हाथ का खेल बन जाएगा।
अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ों, गहरी घाटियों, बर्फीली चोटियों और नदियों को चीरते हुए बनाए जा रहे इस 1,824 किलोमीटर लंबे फ्रंटियर हाईवे का आधिकारिक नाम ईस्ट-वेस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर या फ्रंटियर हाईवे है। यह हाईवे अरुणाचल प्रदेश के बिल्कुल उत्तरी छोर से यानी म्यांमार सीमा के पास से शुरू होकर चीन और भूटान की सीमाओं के समानांतर चलते हुए लद्दाख तक के रणनीतिक इलाकों को आपस में जोड़ेगा। इस परियोजना के तहत दर्जनों सामरिक सुरंगों (Tunnels), आधुनिक पुलों और पक्की सड़कों का एक ऐसा जाल बिछाया जा रहा है, जो किसी भी मौसम में भारतीय सेना के टैंकों, तोपखानों और सैनिकों को सीधे युद्ध के मोर्चे पर पहुंचाने में सक्षम होगा। पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र में सड़क मार्ग न होने के कारण सेना को सर्दियों के मौसम में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस मेगा हाईवे के बन जाने से सेना की ‘लॉजिस्टिक क्षमता’ कई गुना बढ़ जाएगी और दुश्मन देश को भारतीय सीमा में आंख उठाने से पहले सौ बार सोचना पड़ेगा।
चीनी मीडिया और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के पेट में इस हाईवे के नाम से ही दर्द होना लाजिमी है, क्योंकि भारत की यह परियोजना चीन के उस दुस्वप्न को सच कर रही है जिसमें वह तिब्बत क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत समझता था। पिछले कुछ सालों में चीन ने लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक अपनी तरफ सड़कों, रेल नेटवर्क और एयरबेस का भारी जाल बिछाया है, जिसके बल पर वह भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश करता रहता है। लेकिन भारत ने अब ‘रणनीतिक रक्षात्मक’ रवैये को पूरी तरह से छोड़कर ‘सक्रिय और आक्रामक बुनियादी ढांचे के विकास’ (Proactive Infrastructure Development) की नीति अपना ली है। अरुणाचल प्रदेश के इस फ्रंटियर हाईवे के जरिए भारत ने चीन को यह साफ संदेश दे दिया है कि भारतीय सीमा के अंदर विकास कार्य और सैन्य तैयारियों को रोकने का हक किसी दूसरे देश को नहीं है। जब सीमा पर सैनिक और रसद चुटकियों में पहुंचेंगे, तो चीन की किसी भी प्रकार की दुस्साहसिक घुसपैठ की कोशिशों को मौके पर ही कुचल दिया जाएगा।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ-साथ सीमा सड़क संगठन (BRO) इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर जुटा हुआ है। सरकार ने साल 2029 तक इस पूरे फ्रंटियर हाईवे को लद्दाख क्षेत्र के साथ निर्बाध रूप से जोड़ने का एक कड़ा टारगेट रखा है। इस पूरे प्रोजेक्ट में इंजीनियरिंग के तमाम आधुनिक चमत्कारों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि भारी भूस्खलन (Landslides) और बारिश के मौसम में भी रास्ते बंद न हों। इस हाईवे के बन जाने के बाद पूर्वोत्तर भारत से लेकर सीधे उत्तर भारत के लद्दाख तक की यात्रा और सामरिक आवाजाही का समय आधा रह जाएगा। सीमावर्ती गांवों से होने वाले पलायन को रोकने में भी यह हाईवे एक बड़ा वरदान साबित होगा, क्योंकि सड़कों के बनने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय आबादी देश की सुरक्षा की दूसरी सबसे बड़ी ढाल बनकर सीमाओं पर डटी रहेगी।
यह महापरियोजना केवल युद्ध की तैयारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अरुणाचल प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक कायाकल्प का एक ऐसा दस्तावेज है जो वहां की तकदीर बदल देगा। जिन इलाकों में कभी महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से संपर्क कट जाता था, वहां अब पक्की सड़कों के जरिए विकास की रोशनी पहुंच रही है। स्थानीय किसान अपने सेब और अन्य कृषि उत्पादों को आसानी से देश की बड़ी मंडियों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उनकी आय में जबरदस्त इजाफा होगा। भारत की इस रणनीतिक छलांग ने यह साबित कर दिया है कि राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता से समझौता किए बिना देश अपने बुनियादी ढांचे को कितना मजबूत कर सकता है। अरुणाचल प्रदेश का यह फ्रंटियर हाईवे आने वाले समय में भारत की सैन्य अजेयता और आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरेगा, जिसे देखकर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति की दाद दे रहे हैं।
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