
वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती आर्थिक और तकनीकी ताकत का लोहा अब पड़ोसी देश भी मान रहे हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रमुख देश इंडोनेशिया, भारत की हालिया विकास गाथा और विशेषकर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) से गहराई से प्रेरित है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का आगामी इंडोनेशिया दौरा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है, जिससे न सिर्फ व्यापार बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी नई गति मिलेगी।
डिजिटल क्रांति और यूपीआई मॉडल पर नजर
इंडोनेशिया विशेष रूप से भारत के वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान प्रणाली (UPI) का मुरीद हो चुका है। वह अपने देश में भी इसी तरह के डिजिटल बदलावों को लागू करने की योजना बना रहा है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच डिजिटल इकोनॉमी, फिनटेक और साइबर सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के और करीब लाएंगे।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी
आर्थिक सहयोग के अलावा, यह दौरा रणनीतिक और भौगोलिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत और इंडोनेशिया का एक साथ आना वक्त की मांग है। दोनों देश मिलकर रक्षा सहयोग और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा बढ़ाने पर ठोस रणनीति तैयार कर रहे हैं, जो चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में मददगार होगी।
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