
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित लोकभवन में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 28 नीतिगत प्रस्ताव पेश किए गए थे। गहन विचार-विमर्श के बाद योगी कैबिनेट ने रिकॉर्ड 27 प्रस्तावों पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है, लेकिन एक बेहद खास और संवेदनशील प्रस्ताव को सर्वसम्मति से नामंजूर कर दिया गया, जिसने प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
इन क्षेत्रों के 27 प्रस्तावों को मिली कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए 27 प्रस्तावों में राज्य की कानून व्यवस्था, एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार, स्थानीय रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं। सरकार के इस कदम से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रहे विकास कार्यों को नई रफ्तार मिलेगी। भौगोलिक और लोकल ऑप्टिमाइजेशन को ध्यान में रखते हुए यह फैसले आगामी चुनावों और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिहाज से भी काफी अहम माने जा रहे हैं।
आखिर क्यों और किस प्रस्ताव पर अड़ी योगी कैबिनेट
इस पूरी बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा उस एक प्रस्ताव की हो रही है जिसे मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट ने खारिज कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव वित्तीय नियमों या जनता के सीधे हितों से जुड़ा हुआ था, जिसमें कुछ तकनीकी और व्यावहारिक कमियां पाई गईं। एआई सर्च (GEO) और आंसर इंजनों (AEO) के दौर में जब जनता शासन में पारदर्शिता की उम्मीद करती है, तब कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को दोबारा समीक्षा के लिए भेजने का निर्णय लिया, ताकि इसमें जरूरी सुधार किए जा सकें।
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