बैठकर पेशाब करना बेहतर है या खड़े होकर? डॉक्टर ने किया हैरान करने वाला खुलासा

हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई ऐसी आदतें होती हैं, जिन्हें हम बिना सोचे-समझे सालों से अपनाते आ रहे हैं। इन्हीं में से एक बेहद सामान्य आदत पेशाब करने की मुद्रा यानी पोजीशन (Posture) से जुड़ी हुई है। अक्सर पुरुषों के बीच यह बहस का विषय रहता है कि उन्हें खड़े होकर पेशाब करना चाहिए या बैठकर। हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और यूरोलॉजिस्ट्स ने इस विषय पर एक चौकाने वाली मेडिकल रिसर्च सामने रखी है। डॉक्टरों का कहना है कि पेशाब करने का तरीका सिर्फ आपके ब्लैडर (मूत्राशय) की सेहत को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि इसका सीधा असर आपके जोड़ों, घुटनों और रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ सकता है।

खड़े होकर पेशाब करने के क्या हैं नुकसान और इसका जोड़ों पर असर

आधुनिक जीवनशैली में खड़े होकर पेशाब करना बहुत आम हो गया है, लेकिन मेडिकल साइंस के दृष्टिकोण से यह तरीका लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। जब कोई व्यक्ति खड़े होकर पेशाब करता है, तो उसके शरीर का निचला हिस्सा और पेल्विक फ्लोर (Pelvic Floor) की मांसपेशियां पूरी तरह से रिलैक्स नहीं हो पाती हैं। इसके अलावा, खड़े होने की स्थिति में शरीर का पूरा वजन रीढ़ की हड्डी और पैरों के जोड़ों पर पड़ता है। जो लोग पहले से ही अर्थराइटिस या घुटनों के दर्द (Joint Pain) से जूझ रहे हैं, यदि वे गलत पोश्चर में लंबे समय तक खड़े रहते हैं, तो उनकी यह आदत जोड़ों के दर्द को और अधिक गंभीर बना सकती है।

बैठकर पेशाब करना क्यों माना जाता है वैज्ञानिक और शारीरिक रूप से बेहतर

विशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक बनावट के लिहाज से बैठकर पेशाब करना सबसे प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक तरीका है। जब आप बैठकर पेशाब करते हैं, तो पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां पूरी तरह से तनावमुक्त हो जाती हैं, जिससे मूत्राशय (Bladder) पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। इससे ब्लैडर पूरी तरह खाली हो जाता है और भविष्य में यूटीआई (UTI), प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं और किडनी पर पड़ने वाला दबाव काफी हद तक कम हो जाता है। साथ ही, इस पोजीशन से रीढ़ की हड्डी और जोड़ों को भी आराम मिलता है, जिससे शरीर का संतुलन बेहतर बना रहता है।

जोड़ों को सुरक्षित रखने और बेहतर सेहत के लिए क्या अपनाएं आदतें

शरीर को स्वस्थ और बीमारियों से दूर रखने के लिए छोटी-छोटी शारीरिक आदतों में बदलाव करना बहुत जरूरी होता है। डॉक्टरों की सलाह है कि पुरुषों को भी खासकर उम्र बढ़ने के साथ या जोड़ों के दर्द की समस्या होने पर बैठकर पेशाब करने की आदत अपनानी चाहिए। यह न केवल आपके मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम (मांसपेशियों और हड्डियों के तंत्र) को सुरक्षित रखता है, बल्कि आंतरिक अंगों की कार्यप्रणाली को भी दुरुस्त रखता है। स्वास्थ्य से जुड़ी इन छोटी सावधानियों को अपनाकर आप अपने जोड़ों के दर्द को गंभीर होने से बचा सकते हैं और एक स्वस्थ जीवनशैली जी सकते हैं।