
बिहार में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम कसने और हरित परिवहन (Green Mobility) को आम जनता तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल क्रांति की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में पेट्रोल-डीजल की निर्भरता को खत्म कर ई-बसों, कमर्शियल टैक्सियों और निजी इलेक्ट्रिक कारों को सड़कों पर सरपट दौड़ाने के लिए व्यापक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। अक्सर इलेक्ट्रिक कार या बाइक खरीदने से पहले लोगों के मन में ‘रेंज एंग्जायटी’ यानी रास्ते में बैटरी खत्म होने का डर बना रहता था, लेकिन परिवहन विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में फास्ट डीसी (DC) चार्जिंग स्टेशंस का जाल बिछाए जाने के बाद यह समस्या हमेशा के लिए खत्म होने जा रही है।
बिहार परिवहन विभाग ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के साथ मिलकर आधुनिक फास्ट चार्जिंग नेटवर्क स्थापित करने का रोडमैप तैयार किया है। इन स्टेशनों पर अत्याधुनिक डीसी फास्ट चार्जर लगाए जा रहे हैं, जो सामान्य इलेक्ट्रिक कारों को मात्र 45 से 60 मिनट में 80 से 100 प्रतिशत तक चार्ज करने में सक्षम होंगे। इसके साथ ही, दोपहिया (Electric Scooters) और तिपहिया (E-Rickshaw/Auto) वाहनों के लिए अलग चार्जिंग गन की व्यवस्था भी की जा रही है। सबसे अहम बात यह है कि सरकारी संस्थानों या कार्यालयों में लगने वाले इन चार्जिंग प्वाइंट्स का उपयोग केवल सरकारी गाड़ियों के लिए आरक्षित नहीं रहेगा, बल्कि आम नागरिक भी अपनी निजी ईवी कार या बाइक ले जाकर आसानी से चार्ज कर सकेंगे।
राजधानी पटना में इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग प्वाइंट्स को बेहद रणनीतिक और प्रमुख स्थानों पर स्थापित किया जा रहा है ताकि शहर के किसी भी कोने से कनेक्टिविटी आसान रहे।
पटना में जिन प्रमुख 10 स्थानों पर यह काम तेजी से चल रहा है, उनमें शामिल हैं:
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कंकड़बाग स्थित आधुनिक मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब।
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बेउर मोड़ और आसपास का प्रमुख जंक्शन।
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सिंचाई भवन और विकास भवन परिसर।
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हार्डिंग रोड और नए प्रशासनिक क्लस्टर।
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परिवहन परिसर, फुलवारीशरीफ और बस टर्मिनल क्षेत्र।
इन परिसरों में वाहन पार्क करके सरकारी काम निपटाने या पास के बाजार जाने वाले लोग महज एक घंटे के भीतर अपनी गाड़ी को पूरी तरह चार्ज पा सकेंगे।
केवल राजधानी ही नहीं, बल्कि उत्तर से दक्षिण बिहार के सभी प्रमुख जिलों को इस नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। परिवहन विभाग के अनुसार, पूर्णिया जिले में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है, जबकि पटना, मुजफ्फरपुर, गया जी और दरभंगा में बुनियादी ढांचे का काम अंतिम चरण में है। राजगीर, फुलवारीशरीफ और मुजफ्फरपुर के बस डिपो में पहले से ही चार्जिंग सुविधाएं सुचारू रूप से काम कर रही हैं। सार्वजनिक परिवहन के लिए चलाई जा रही इलेक्ट्रिक बसों के लिए प्रत्येक डिपो में 50 बसों की एक साथ पार्किंग और 8-8 फास्ट चार्जिंग प्वाइंट्स लगाए जा रहे हैं, जिससे भारी-भरकम ई-बसें भी महज 1 से 1.5 घंटे में पूरी तरह चार्ज होकर हाईवे पर रवाना हो सकेंगी।
बिहार इलेक्ट्रिक व्हीकल (संशोधन) नीति के तहत राज्य सरकार ने निजी क्षेत्र के कारोबारियों, होटल संचालकों और हाउसिंग सोसाइटियों को भी चार्जिंग नेटवर्क से जोड़ने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन दिया है। यदि कोई व्यक्ति या कमर्शियल कॉम्प्लेक्स पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करता है, तो उसे मशीनरी और उपकरणों की खरीद पर 25% तक का पूंजीगत अनुदान (Capital Subsidy – अधिकतम ₹10 लाख तक) दिया जा रहा है।
यह सब्सिडी निम्नलिखित स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए मान्य है:
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नेशनल और स्टेट हाईवे पर स्थित ढाबे, मोटल और पेट्रोल पंप।
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शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, मल्टी-लेवल पार्किंग और बड़े अस्पताल परिसर।
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आवासीय अपार्टमेंट और हाउसिंग सोसाइटियां, जहां 5 से अधिक परिवार निवास करते हैं।
चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ बिहार सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने वालों को भारी वित्तीय छूट भी दे रही है। नीति के तहत राज्य में खरीदी और रजिस्टर्ड कराई जाने वाली इलेक्ट्रिक दोपहिया, चार पहिया और हल्के मालवाहक वाहनों पर मोटर व्हीकल टैक्स (Road Tax) में 50 से 75 प्रतिशत तक की भारी छूट दी जा रही है। इसके अलावा कमर्शियल ई-वाहनों को परमिट शुल्क से पूरी तरह राहत दी गई है। पूरे राज्य में चार्जिंग स्टेशनों का यह नया नेटवर्क न केवल पर्यावरण को स्वच्छ बनाएगा, बल्कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते खर्च से जूझ रहे आम नागरिकों को एक सस्ता, सुगम और भविष्योन्मुखी परिवहन विकल्प भी मुहैया कराएगा।
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