
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की सत्र 2026-27 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों छात्र-छात्राओं और स्कूलों के लिए एक अत्यंत जरूरी और समयबद्ध अलर्ट सामने आया है। बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे बोर्ड परीक्षा के लिए अनिवार्य ‘लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स’ (LOC) को निर्धारित समय सीमा के भीतर आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड कर दें। यदि स्कूल तय तारीख से चूकते हैं, तो उन्हें प्रति छात्र 2,000 रुपये की भारी-भरकम लेट फीस चुकानी पड़ेगी। इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ और अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए स्कूलों को तुरंत परीक्षा संगम पोर्टल के माध्यम से डेटा फाइनल करने की सलाह दी गई है।
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा की पूरी रूपरेखा और एडमिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया इसी एलओसी डेटा पर टिकी होती है। इसमें छात्रों के नाम की सही स्पेलिंग, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, चयनित विषय और विषयों के विशिष्ट कोड दर्ज किए जाते हैं। जरा सी भी लापरवाही या देरी न केवल स्कूलों के लिए आर्थिक दंड का कारण बन सकती है, बल्कि छात्रों के भविष्य और उनके परीक्षा फॉर्म की वैधता पर भी संकट खड़ा कर सकती है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी तरह के विशेष अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा, इसलिए प्रक्रिया को समय रहते पूरा करना ही एकमात्र विकल्प है।
अक्सर छात्रों और अभिभावकों के मन में सवाल उठता है कि आखिर एलओसी यानी लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स क्या है और इसका क्या महत्व है। दरअसल, 10वीं और 12वीं के नियमित छात्र सीधे व्यक्तिगत तौर पर बोर्ड परीक्षा का फॉर्म नहीं भरते, बल्कि संबंधित स्कूल ही अपने अधिकृत पोर्टल से सभी पात्र छात्रों का एकीकृत ब्योरा तैयार कर बोर्ड को भेजते हैं। इसी आधिकारिक सूची को सीबीएसई की भाषा में ‘LOC’ कहा जाता है। बोर्ड इसी डेटा का उपयोग करके रोल नंबर आवंटित करता है, परीक्षा केंद्रों का निर्धारण करता है और अंत में एडमिट कार्ड तथा मूल अंकपत्र जारी करता है।
इस प्रक्रिया की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यदि किसी छात्र का नाम या विषय कोड एलओसी में गलत दर्ज हो गया, तो परीक्षा हॉल में उसे गलत प्रश्नपत्र मिलने या परिणाम में त्रुटि आने का भारी जोखिम रहता है। बोर्ड ने स्कूलों के साथ-साथ अभिभावकों से भी आग्रह किया है कि वे स्कूल द्वारा तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट डेटा शीट पर हस्ताक्षर करने से पहले अपने बच्चे के विवरण को बहुत बारीकी से जांच लें। एक बार डेटा सीबीएसई सर्वर पर फाइनल लॉक हो जाने के बाद उसमें संशोधन करना बेहद जटिल और कानूनी प्रक्रियाओं से भरा हो जाता है।
सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, सामान्य परीक्षा शुल्क के साथ एलओसी सबमिट करने की अंतिम तिथि 21 अक्टूबर तय की गई है। 21 अक्टूबर की मध्यरात्रि तक स्कूल बिना किसी अतिरिक्त दंड शुल्क के अपने सभी पात्र छात्रों का डेटा अपलोड और फीस का ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं। जो स्कूल इस प्राथमिक डेडलाइन तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाएंगे, उन्हें बोर्ड ने 22 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक का एक अतिरिक्त अवसर (लेट-फी विंडो) दिया है। हालांकि, इस विंडो के दौरान फॉर्म सबमिट करने पर सामान्य परीक्षा शुल्क के अलावा 2,000 रुपये प्रति छात्र की दर से लेट फीस देनी होगी।
चालान या ऑफलाइन बैंकिंग माध्यमों से भुगतान करने वाले संस्थानों के लिए यह विंडो और भी पहले बंद हो जाती है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि 30 अक्टूबर के बाद किसी भी परिस्थिति में पोर्टल दोबारा नहीं खोला जाएगा। यदि किसी स्कूल में सैकड़ों छात्र पंजीकृत हैं और समय पर फॉर्म नहीं भरा गया, तो लेट फीस का आंकड़ा लाखों रुपये में पहुंच सकता है, जिसका सीधा असर स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की जेब पर पड़ेगा। इसलिए अंतिम घंटों के सर्वर क्रैश और नेटवर्क ट्रैफिक से बचने के लिए समय पूर्व सबमिशन सबसे सुरक्षित रणनीति है।
स्कूल प्रबंधन और परीक्षा प्रभारियों के लिए एलओसी सबमिशन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। सबसे पहले स्कूल के अधिकृत प्रतिनिधि को सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाना होगा। होमपेज पर दिए गए ‘Pariksha Sangam’ (परीक्षा संगम) पोर्टल लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद ‘Schools’ सेक्शन में जाकर ‘Pre-Exam Activities’ का चयन करें, जहां ‘List of Candidates (LOC)’ का विकल्प दिखाई देगा। स्कूल को अपने दिए गए यूजर आईडी (एफिलिएशन नंबर), पासवर्ड और सुरक्षा पिन के जरिए पोर्टल में सुरक्षित लॉगिन करना होगा।
लॉगिन करने के बाद पोर्टल पर 10वीं और 12वीं के छात्रों की पूर्व-पंजीकृत सूची खुलती है। स्कूल को प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत जानकारी, जन्मतिथि, विषय संयोजन (Subject Combination) और अनिवार्य भाषा विषयों की पुष्टि करनी होती है। इसके साथ ही छात्रों की निर्धारित साइज और रेजोल्यूशन वाली नवीनतम रंगीन डिजिटल तस्वीर और हस्ताक्षर अपलोड करने होते हैं। सारा डेटा भरने के बाद एक रफ ड्राफ्ट प्रिंटआउट निकाला जाता है, जिसे विषय शिक्षकों और अभिभावकों से क्रास-वेरिफाई कराया जाता है। संपूर्ण सत्यापन के उपरांत ही ‘Final Submit’ बटन दबाएं और ऑनलाइन पेमेंट गेटवे (डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई) के माध्यम से परीक्षा शुल्क का भुगतान कर अंतिम पुष्टिकरण रसीद (Confirmation Page) डाउनलोड कर लें।
सीबीएसई परीक्षा नियंत्रक ने स्कूलों को निर्देशित किया है कि एलओसी भरते समय किसी भी प्रकार की मानवीय भूल से बचने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाए। सबसे पहले छात्र का नाम, पिता का नाम और माता का नाम आधार कार्ड और स्कूल के मूल एडमिशन रजिस्टर से अक्षर-दर-अक्षर मेल खाना चाहिए। किसी भी स्पेलिंग मिस्टेक से भविष्य में पासपोर्ट, उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों के सत्यापन में भारी बाधा आती है। दूसरा सबसे महत्वपूर्ण बिंदु विषय कोड का चयन है; उदाहरण के लिए, गणित मानक (Standard Mathematics) और गणित बेसिक (Basic Mathematics) के कोड में अंतर को बहुत सावधानी से जांचना चाहिए।
तीसरा, 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए प्रैक्टिकल विषयों का चयन सही होना चाहिए क्योंकि प्रत्येक प्रैक्टिकल विषय के लिए अलग से शुल्क निर्धारित होता है। चौथा, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए बोर्ड द्वारा दी जाने वाली छूट और सुविधाओं का चयन एलओसी भरते समय ही पोर्टल पर दर्ज किया जाना अनिवार्य है। पांचवां और अंतिम बिंदु यह है कि स्कूल यह सुनिश्चित करें कि किसी भी पात्र छात्र का नाम छूट न जाए, क्योंकि एक बार डेटा फाइनल लॉक हो जाने के बाद नया नाम जोड़ना नामुमकिन हो जाता है। समय रहते सभी औपचारिकताएं पूरी करके छात्र और स्कूल दोनों ही तनावमुक्त होकर आगामी बोर्ड परीक्षा की तैयारियों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
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