
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर जब आमतौर पर आभूषणों के बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ के चलते सोने और चांदी की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, तब इस बार 2026 के त्योहारी सीजन में बिल्कुल विपरीत और हैरान कर देने वाला नजारा देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के छठे दिन, जब श्रद्धालु मां कात्यायनी की आराधना में लीन हैं, देश भर के प्रमुख सर्राफा बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला और गहरा गया है। पिछले कारोबारी सत्रों से शुरू हुई बिकवाली की लहर ने आज सुबह के कारोबार में पीली धातु और सफेद धातु दोनों को जबर्दस्त झटका दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर स्थानीय खुदरा बाजारों तक दोनों कीमती धातुओं के ग्राफ तेजी से लाल निशान में फिसलते नजर आ रहे हैं। इस दोहरी गिरावट ने जहां आभूषण कारोबारियों और बड़े बुलियन ट्रेडर्स की सांसें अटका दी हैं, वहीं दूसरी तरफ आम मध्यमवर्गीय परिवारों, शादी-ब्याह के लिए गहने बनवाने वाले खरीदारों और आगामी धनतेरस व दीपावली पर शुभ निवेश की योजना बना रहे लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। बाजारों में त्योहारी उत्साह के चरम पर होने के बावजूद कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने ग्राहकों को त्योहारी खरीदारी का सबसे सुनहरा और अप्रत्याशित अवसर थमा दिया है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तर भारत के सबसे बड़े बुलियन बाजारों में आज 22 कैरेट और 24 कैरेट दोनों श्रेणियों के सोने में तेज नरमी दर्ज की गई है। दिल्ली के प्रमुख खुदरा सर्राफा बाजार—चांदनी चौक, कूचा महाजनी, करोल बाग और दरीबा कलां में 22 कैरेट जेवराती सोने का भाव लगभग ₹1,35,490 प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया है, जो कल के मुकाबले ₹600 से ₹800 प्रति 10 ग्राम तक की सीधी गिरावट दर्शाता है। वहीं, शुद्धता के शिखर 24 कैरेट (99.9% शुद्ध) सोने की कीमत भी ₹1,48,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर ₹1,47,810 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रही है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक चौक, अमीनाबाद, हजरतगंज और आलमबाग के ज्वेलरी शोरूम्स में भी यही गिरावट का रुख देखा गया, जहां 22 कैरेट सोना ₹1,35,290 और 24 कैरेट सोना ₹1,47,580 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक शहर कानपुर में 22 कैरेट सोना ₹1,35,200 पर है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 22 कैरेट का भाव ₹1,35,150 और 24 कैरेट ₹1,47,440 प्रति 10 ग्राम चल रहा है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 22 कैरेट सोना ₹1,35,240, जबकि दक्षिण भारत के चेन्नई में स्थानीय टैक्स संरचना के चलते यह ₹1,35,600 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर स्थिर बना हुआ है। पिछले एक पखवाड़े के उच्चतम स्तर से तुलना करें तो प्रति 10 ग्राम पर ₹2,500 से ₹3,000 तक की सीधी राहत मिल चुकी है, जिससे हल्के गहनों की खरीदारी बजट के अनुकूल हो गई है।
सोने से भी ज्यादा बुरा और निराशाजनक हाल चांदी का देखने को मिल रहा है। औद्योगिक मांग में अचानक आई सुस्ती और सटोरियों द्वारा की गई भारी मुनाफावसूली के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी बुरी तरह टूटी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी के वायदा भाव में सुबह के सत्र में ₹2,000 से ₹2,500 प्रति किलोग्राम से अधिक की भीषण गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और लखनऊ के बाजारों में 999 शुद्धता वाली 1 किलोग्राम चांदी की कीमत ₹2,24,500 से लुढ़ककर ₹2,22,200 से ₹2,22,500 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। वहीं 925 स्टर्लिंग चांदी के दाम भी गिरकर ₹2,06,000 प्रति किलो के आसपास पहुंच गए हैं। बर्तन, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, चांदी के सिक्के और पायल-बिछिया बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि चांदी में आई यह गिरावट त्योहारी सीजन के लिहाज से बेहद अनुकूल है। धनतेरस और दीपावली पर पूजन के लिए चांदी के सिक्कों और बर्तनों की सबसे ज्यादा मांग रहती है, और इस गिरावट के कारण छोटे बजट वाले ग्राहक भी अब दिल खोलकर चांदी के उपहार और आभूषण खरीदने का मन बना रहे हैं।
घरेलू सर्राफा बाजार में नवरात्रि के दौरान सोने-चांदी के भाव में आ रही इस लगातार गिरावट के पीछे कोई स्थानीय कारण नहीं, बल्कि गहरे अंतरराष्ट्रीय और व्यापक आर्थिक कारक काम कर रहे हैं। वैश्विक कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स (COMEX) पर स्पॉट गोल्ड की कीमतें 4,200 डॉलर प्रति औंस के पार टिकने में पूरी तरह नाकाम रहीं और मुनाफावसूली के चलते फिसलकर नीचे आ गईं। इसकी सबसे मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) का लगातार 103 के स्तर के पार मजबूत बना रहना है। अंतरराष्ट्रीय वित्त व्यवस्था का यह स्थापित नियम है कि जब भी डॉलर में मजबूती आती है, तो गैर-अमेरिकी मुद्राओं में सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बनता है। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद ब्याज दरों में कटौती की गति को धीमा रखने के संकेतों ने भी कमोडिटी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनावों का जो प्रीमियम अब तक सोने को ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) मानकर मिल रहा था, उसमें बड़े हेज फंड्स ने अपना मुनाफा काट लिया है और नकदी को इक्विटी तथा बॉन्ड यील्ड की तरफ मोड़ दिया है। इस चौतरफा वैश्विक बिकवाली का सीधा झटका भारत के घरेलू वायदा और हाजिर बाजार को झेलना पड़ रहा है।
सर्राफा बाजार की इस नरमी ने खरीदारों के सामने एक बड़ा रणनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उन्हें अभी खरीदारी कर लेनी चाहिए या धनतेरस और दिवाली तक भाव और गिरने का इंतजार करना चाहिए। वित्तीय विश्लेषकों और अनुभवी ज्वेलर्स का स्पष्ट मानना है कि मौजूदा स्तर आभूषणों की खरीदारी और एडवांस बुकिंग के लिए एक बेहतरीन ‘स्वीट स्पॉट’ है। आमतौर पर देखा गया है कि धनतेरस से ठीक दो या तीन दिन पहले खुदरा मांग में अप्रत्याशित उछाल आता है, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर प्रीमियम बढ़ जाता है और ज्वैलर्स मेकिंग चार्ज में बढ़ोतरी कर देते हैं। ऐसे में जो परिवार आगामी नवंबर और दिसंबर में होने वाले विवाह समारोहों के लिए भारी सेट, कंगन या चेन खरीदना चाहते हैं, उनके लिए नवरात्रि का छठा दिन एक सुनहरा मौका बनकर आया है। कई बड़े ब्रांडेड शोरूम्स और स्थानीय एसोसिएशन इस समय ‘रेट-प्रोटेक्शन स्कीम’ भी दे रहे हैं, जिसमें ग्राहक आज के घटे हुए भाव पर आभूषण बुक कर सकते हैं; यदि डिलीवरी के दिन दाम और गिरे तो कम भाव का लाभ मिलेगा और यदि दाम बढ़े तो आज का सस्ता भाव ही लागू रहेगा। यह समझदारी भरी रणनीति उपभोक्ताओं को भविष्य के किसी भी अप्रत्याशित उछाल से पूरी तरह सुरक्षित रखती है।
जब भी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आती है, तो स्थानीय स्तर पर कुछ असामाजिक तत्व और असंगठित विक्रेता कम कीमत का लालच देकर मिलावटी या कम कैरेट का सोना खपाने की कोशिश करते हैं। इसलिए ग्राहकों को इस समय विशेष रूप से सतर्क रहने की सख्त जरूरत है। केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के कड़े नियमों के अनुसार, भारत में अब बिना 6 अंकों वाले अल्फान्यूमेरिक HUID (हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन) कोड के किसी भी सोने के आभूषण की बिक्री पूरी तरह गैर-कानूनी है। गहने खरीदते समय यह सुनिश्चित करें कि उस पर तीन स्पष्ट निशान मौजूद हों: पहला बीआईएस का मानक तिकोना लोगो, दूसरा शुद्धता का पैमाना (जैसे 22 कैरेट के लिए 22K916 और 18 कैरेट के लिए 18K750), और तीसरा छह अंकों व अक्षरों का अनूठा HUID कोड। ग्राहक अपने मोबाइल में सरकारी ‘BIS Care App’ डाउनलोड करके इस कोड को स्कैन कर सकते हैं, जिससे स्क्रीन पर आभूषण की शुद्धता, उसकी वजन श्रेणी और हॉलमार्किंग केंद्र का नाम खुलकर आ जाता है। इसके अतिरिक्त, हमेशा पक्का जीएसटी बिल ही प्राप्त करें, जिसमें धातु का वजन, उस दिन का सटीक रेट और मेकिंग चार्ज अलग-अलग दर्ज हो, ताकि आपकी गाढ़ी कमाई से खरीदे गए आभूषणों पर शुद्धता और गारंटी का कानूनन सुरक्षा कवच हमेशा बरकरार रहे।
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