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दिल्ली में 33 लाख वोटर्स को SIR नोटिस: क्या कटेगा आपका नाम? जानिए चुनाव आयोग का पूरा प्लान

राजधानी दिल्ली के चुनावी परिदृश्य में एक बहुत बड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू हो चुका है। भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी, सटीक और त्रुटिहीन बनाने के लिए एक व्यापक सफाई अभियान छेड़ा है। इस बड़े कदम के तहत दिल्ली भर में करीब 33 लाख मतदाताओं को SIR यानी सस्पेक्टेड/स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े नोटिस जारी किए गए हैं। राजधानी की आबादी, लगातार होने वाले प्रवास और डुप्लीकेट एंट्रीज को खत्म करने के लिए आयोग ने यह निर्णय लिया है। इतने बड़े पैमाने पर जारी नोटिसों को देखते हुए आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या उनका नाम वोटर लिस्ट से कट जाएगा या उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित होना पड़ेगा। आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए 15,200 फील्ड अधिकारियों की भारी-भरकम टीम को मैदान में उतार दिया है।

दिल्ली एक ऐसा महानगर है जहां हर साल लाखों लोग रोजगार, शिक्षा या बेहतर जीवन की तलाश में आते हैं और कई लोग शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से या फिर एनसीआर के शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में शिफ्ट हो जाते हैं। निर्वाचन आयोग की तकनीक-आधारित जांच में सामने आया कि मतदाता सूची में कई ऐसे नाम दर्ज हैं जो या तो एक से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में मौजूद हैं, जिनका पता बदल चुका है, या फिर संबंधित मतदाता की मृत्यु हो चुकी है। ऐसे नामों को चिह्नित करके आयोग ने ‘SIR’ श्रेणी में डाला है। आयोग का स्पष्ट संदेश है कि यह नोटिस किसी मतदाता का अधिकार छीनने के लिए नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को वास्तविक स्थिति के अनुरूप दुरुस्त करने के लिए भेजा गया है। जब तक घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक किसी भी वैध नागरिक का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।

इतने विशाल स्तर पर आंकड़ों की जांच करना कोई आसान काम नहीं है। इसीलिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और पर्यवेक्षकों सहित कुल 15,200 प्रशिक्षित अधिकारियों की एक विशेष फौज तैयार की है। प्रत्येक अधिकारी को उनके संबंधित क्षेत्र के अनुसार नोटिस की सूची सौंपी गई है। ये अधिकारी सीधे मतदाताओं के रजिस्टर्ड पते पर दस्तक देंगे। इनका मुख्य कार्य यह देखना होगा कि जिस व्यक्ति के नाम पर नोटिस आया है, क्या वह वास्तव में उसी पते पर रह रहा है। यदि व्यक्ति वहां मौजूद मिलता है, तो मौके पर ही उसके पहचान संबंधी विवरण की पुष्टि की जाएगी। अगर मकान बंद मिलता है या व्यक्ति दूसरी जगह शिफ्ट हो गया है, तो पड़ोसियों और स्थानीय प्रतिनिधियों से पूछताछ कर पंचनामा तैयार किया जाएगा। इस जमीनी कवायद का मकसद फर्जी और निष्क्रिय एंट्रीज को खत्म करना है ताकि आने वाले चुनावों में सटीक मतदान प्रतिशत दर्ज हो सके।

यदि आपके घर पर भी चुनाव आयोग की ओर से ऐसा कोई नोटिस पहुंचता है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह केवल एक सत्यापन प्रक्रिया है। जैसे ही संबंधित बीएलओ आपके घर आएं, आपको केवल अपनी वास्तविक पहचान और पते का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। इसके लिए आप आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक, बिजली या पानी का नया बिल, या राशन कार्ड दिखा सकते हैं। अधिकारी आपसे एक संक्षिप्त सत्यापन फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाएंगे और आपके विवरण को विभागीय ऐप के जरिए अपडेट कर देंगे। यदि किसी कारणवश आप अपने पते पर मौजूद नहीं मिलते हैं, तो आपको संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के कार्यालय में उपस्थित होकर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। बिना उचित जांच और प्राकृतिक न्याय के नियमों का पालन किए किसी का भी नाम काटा नहीं जाएगा।

इस पूरी कवायद में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक और जीपीएस-सक्षम टूल्स का सहारा लिया जा रहा है। 15,200 अधिकारियों की दैनिक प्रगति को जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के डैशबोर्ड पर रियल-टाइम ट्रैक किया जा रहा है। इसका लाभ यह है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात की गुंजाइश खत्म हो जाती है। इसके अलावा, जिन नागरिकों को नोटिस को लेकर कोई असमंजस है, उनके लिए निर्वाचन आयोग की हेल्पलाइन 1950 को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। वोटर सर्विस पोर्टल (Voter Services Portal) और वोटर हेल्पलाइन ऐप के माध्यम से भी नागरिक अपनी वर्तमान स्थिति की जांच कर सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने हाल ही में अपना निवास बदला है, वे फॉर्म 8 भरकर अपना नया पता तुरंत अपडेट करवा सकते हैं, जिससे उनका नाम नई जगह की सूची में जुड़ जाए और पुरानी जगह से व्यवस्थित रूप से हट सके।

इस व्यापक शुद्धिकरण अभियान से दिल्ली की मतदाता सूची देश के सबसे आधुनिक और सटीक डेटाबेस में बदल जाएगी। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि हर वोट वास्तविक हो और कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से न छूटे। अगर आपका नाम भी इस प्रक्रिया की जद में है, तो अपने बीएलओ के साथ सहयोग करें और अपने दस्तावेज़ दुरुस्त रखकर एक जागरूक नागरिक का दायित्व निभाएं।