ट्रंप के दावों के बीच होते-होते रह गया ईरान से महा-समझौता, जानें कहां फंसा पेच

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले काफी समय से चली आ रही तनातनी को खत्म करने के लिए शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एक बेहद हाई-प्रोफाइल और गुप्त बैठक (सीक्रेट रूम मीटिंग) बुलाई गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे थे कि दोनों देश एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं और ईरान उनकी सभी कड़े शर्तों को मानने के लिए राजी हो गया है। ट्रंप ने यहां तक संकेत दे दिए थे कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) को फिर से खोला जा रहा है और ईरान अपने परमाणु हथियारों की जिद छोड़ने को तैयार है। लेकिन दो घंटे तक चली इस सीक्रेट रूम मीटिंग के बाद अचानक पूरी बाजी पलट गई और यह महा-समझौता होते-होते रह गया।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और कोर टीम के साथ बेहद संवेदनशील बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान के साथ मौजूदा नाजुक युद्धविराम की अवधि को आगे बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए होर्मुज को फिर से खोलने के प्रस्तावित समझौते पर अंतिम मुहर लगाना था। लेकिन इस मैराथन बैठक के बाद भी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका। इस बीच, ईरान की तरफ से भी आधिकारिक बयान आया है कि यह समझौता अभी अंतिम रूप नहीं ले पाया है और शर्तें तय होना अभी बाकी है।

दो घंटे तक चली मैराथन बैठक का नतीजा रहा सिफर, ट्रंप अपनी शर्तों पर अड़े

इस हाई-लेवल मीटिंग के शुरू होने से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी आश्वस्त नजर आ रहे थे और उन्होंने मीडिया से कहा था कि वह इस वैश्विक मुद्दे पर बहुत जल्द अपना ‘अंतिम निर्णय’ सुनाने वाले हैं। हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब दो घंटे तक चली यह गंभीर चर्चा बिना किसी ठोस नतीजे के ही समाप्त हो गई।

वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल और केवल उसी समझौते को अपनी मंजूरी देंगे जो अमेरिका द्वारा तय की गई सभी सख्त शर्तों को शत-प्रतिशत पूरा करता हो और जिससे ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर हमेशा के लिए पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सके। अमेरिका किसी भी तरह के ढीले समझौते के पक्ष में नहीं है।

60 दिनों के युद्धविराम की थी तैयारी, सोशल मीडिया पर ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी

ट्रंप ने यह आपातकालीन बैठक ऐसे समय में की जब एक दिन पहले ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह खबरें तेजी से तैर रही थीं कि अमेरिकी और ईरानी वार्ताकार एक शुरुआती ड्राफ्ट (प्रारंभिक समझौते) पर सहमत हो चुके हैं। इस ड्राफ्ट के तहत दोनों देशों के बीच बने बेहद नाजुक युद्धविराम को 60 दिनों के लिए और आगे बढ़ाया जाना था और ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर नए सिरे से बातचीत शुरू होनी थी।

इस बीच, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक बेहद सख्त पोस्ट साझा करते हुए लिखा, ‘ईरान को हर हाल में यह लिखित तौर पर मानना होगा कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार या परमाणु बम नहीं बनाएगा।’ इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए तुरंत पूरी तरह खोला जाना चाहिए और ईरान ने वहां जो खतरनाक समुद्री बारूदी सुरंगें (Marine Mines) बिछा रखी हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।

‘हवा-हवाई बातों पर भरोसा नहीं, मिसाइलों से लेते हैं रियायतें’ — ईरान का सख्त रुख

दूसरी तरफ, ईरान ने भी अमेरिका की इन शर्तों पर बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने शुक्रवार को साफ शब्दों में कहा कि उनका देश अमेरिका के कोरे वादों या कागजी गारंटियों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करता है, उन्हें सिर्फ जमीन पर होने वाली ठोस कार्रवाई पर यकीन है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले एक साल के भीतर अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर दो बार बड़े हमले किए हैं, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई बहुत गहरी हो चुकी है।

कालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर बेहद तल्ख लहजे में लिखा, ‘अगर दूसरा पक्ष (अमेरिका) जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करेगा, तो ईरान भी अपनी तरफ से एक कदम पीछे नहीं हटाएगा। हम मेज पर बैठकर बातचीत से नहीं, बल्कि अपनी मिसाइलों की ताकत से दुनिया से रियायतें हासिल करना जानते हैं।’

नकद के बदले नकद, लाभ के बदले लाभ: ईरान ने रखीं अपनी नई शर्तें

व्हाइट हाउस की यह सीक्रेट मीटिंग खत्म होने से पहले ही ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने वहां के सरकारी टेलीविजन पर आकर साफ कर दिया कि यह समझौता फिलहाल पूरी तरह से अधूरा है। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को यह संकेत दिए थे कि दोनों देशों के वार्ताकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक व्यापक और व्यावहारिक सहमति बनाने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि बाकी की बारीक शर्तों पर आने वाले समय में चर्चा की जाएगी।

इसके उलट, ईरानी प्रवक्ता बघाई ने स्पष्ट किया कि उनके देश के अधिकारी इस समय केवल और केवल ‘युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने’ पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, न कि परमाणु योजना के तकनीकी विवरणों पर। ईरान की मांग है कि इस समझौते में इजराइल और लेबनान में सक्रिय ईरान समर्थित हिजबुल्ला के बीच जारी जंग को रुकवाना भी शामिल होना चाहिए। इसके साथ ही ईरान दुनिया भर के विदेशी बैंकों में फ्रीज (जब्त) पड़े अपने अरबों डॉलर के फंड्स को तुरंत जारी करने की मांग पर अड़ा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने इसे और स्पष्ट करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘अब शर्तें ईरान तय करेगा — नकद के बदले नकद, लाभ के बदले लाभ, मुफ्त में अमेरिका को कुछ भी नहीं मिलने वाला।’