
बिहार की राजनीति में इन दिनों कानून-व्यवस्था और पुलिस हिरासत में मौतों के मामलों को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है। नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव पटना से मधुबनी के लिए रवाना होने से ठीक पहले एक बार फिर आक्रामक नजर आए। उन्होंने रोशन यादव की संदिग्ध मौत के मामले में सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि मृतक को थाने में अवैध रूप से बंद कर अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किया गया और उसे करंट तक लगाया गया। तेजस्वी के इस तीखे बयान के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भूचाल आ गया है, क्योंकि विपक्ष लगातार सरकार पर पुलिसिया राज कायम करने का गंभीर आरोप लगा रहा है।
रोशन यादव मौत मामले पर तेजस्वी का बड़ा हमला
मधुबनी रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और राज्य की वर्तमान सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिहार में जिस तरह से लगातार आपराधिक घटनाएं और पुलिस हिरासत में मौतें हो रही हैं, वह बेहद चिंताजनक है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी तानाशाही चलाई और युवक को इस हद तक प्रताड़ित किया कि उसकी जान चली गई। उन्होंने कहा कि वे खुद पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे हैं और हरसंभव न्याय की लड़ाई लड़ेंगे ताकि दोषियों को बख्शा न जा सके।
पीड़ित परिवार के आरोप और पुलिस प्रशासन की थ्योरी
इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन और पीड़ित परिवार के बयानों में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिल रहा है। परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस ने युवक को बिना किसी पुख्ता कारण के उठाया था और थाने के अंदर उसे बुरी तरह पीटा गया। परिवार के दावों के अनुसार, हिरासत के दौरान यातनाएं देने के कारण ही उसकी स्थिति बिगड़ी थी। वहीं दूसरी ओर, पुलिस और जेल प्रशासन का यह दावा है कि युवक की मौत आत्महत्या के कारण हुई है। इस विरोधाभास के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों का मधुबनी पहुंचकर परिजनों से मिलने का सिलसिला लगातार जारी है।
राजनीतिक दलों की सक्रियता और जनसुराज का रुख
रोशन यादव की मौत के मामले ने केवल राजद ही नहीं बल्कि अन्य राजनीतिक दलों और संगठनों को भी झकझोर कर रख दिया है। हाल ही में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी थी और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। विपक्षी दलों का साफ कहना है कि यदि इस मामले में पुलिस अधिकारियों और लिप्त कर्मियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच अब हर किसी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।
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