
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से हुए कथित भर्ती घोटाले को लेकर इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। जांच एजेंसियों ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए श्वेता गुप्ता और रामवीर सिंह समेत 5 मुख्य आरोपियों को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया है। राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस बड़े सिंडिकेट के खुलासे के बाद पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस ताबड़तोड़ पुलिसिया एक्शन के बाद सालों से इंसाफ की गुहार लगा रहे अभ्यर्थियों में एक नई उम्मीद जगी है।
क्या है जेपीएससी भर्ती घोटाला और कैसे खुली धांधली की पोल
यह पूरा मामला झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की गई सिविल सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं और पैसों के लेनदेन से जुड़ा है। आरोप है कि योग्य और मेरिट वाले छात्रों को दरकिनार करके बैकडोर एंट्री के जरिए मोटी रकम लेकर पसंदीदा उम्मीदवारों को प्रशासनिक पदों पर बिठाया गया। जांच में सामने आया कि परीक्षा के अंकों में हेरफेर करने के साथ-साथ ओएमआर (OMR) शीट को खाली छोड़ने वाले अभ्यर्थियों को भी पास कर दिया गया था। जब असफल छात्रों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और जांच एजेंसियों को पुख्ता डिजिटल सबूत सौंपे, तब जाकर इस सुनियोजित भ्रष्टाचार की परतें एक-एक कर खुलने लगीं।
श्वेता गुप्ता और रामवीर सिंह की गिरफ्तारी और जांच का दायरा
विशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने हालिया छापेमारी के दौरान श्वेता गुप्ता और रामवीर सिंह को उनके ठिकानों से दबोचा है। शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इन आरोपियों के पास से कई संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और बैंक खातों के विवरण मिले हैं जो सीधे तौर पर परीक्षा माफियाओं से जुड़े होने का संकेत देते हैं। पकड़े गए आरोपी आयोग के भीतर और बाहर बिचौलियों का नेटवर्क चला रहे थे, जो मोटी रकम के बदले परीक्षा के नतीजों को प्रभावित करते थे। अदालत ने इन सभी आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया है ताकि इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
अब तक की जांच में क्या-क्या हुआ और आगे की राह
इस घोटाले में अब तक कई कड़े प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जा चुके हैं। कई विवादित नियुक्तियों को पहले ही रद्द या सस्पेंड किया जा चुका है और पूर्व पदाधिकारियों से भी लंबी पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारियां सिर्फ शुरुआत हैं और आने वाले दिनों में कुछ बड़े अधिकारियों और सफेदपोशों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है। इधर, स्थानीय छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों का कहना है कि वे इस कार्रवाई का स्वागत करते हैं, लेकिन उनकी मांग है कि पूरी जांच को पारदर्शी बनाकर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में झारखंड की सबसे बड़ी प्रशासनिक परीक्षा की शुचिता बरकरार रह सके।
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