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जमुई छात्रा छेड़खानी मामला: सत्ताधारी दल की छात्र विंग ABVP का फूटा भयंकर गुस्सा

भारतीय लोकतंत्र और छात्र राजनीति के इतिहास में जब भी महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों पर आंच आती है, तो युवा और छात्र संगठन सबसे पहले सड़कों पर उतरकर न्याय की हुंकार भरते हैं। बिहार के जमुई (Jamui) जिले से हाल ही में सामने आए एक अत्यंत संवेदनशील और शर्मनाक छात्रा छेड़खानी प्रकरण ने पूरे राज्य का सियासी और सामाजिक पारा चढ़ा दिया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद से ही आम नागरिकों और युवाओं के भीतर भारी आक्रोश व्याप्त था, लेकिन इस बार मामला तब और अधिक दिलचस्प और गंभीर हो गया जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ही छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP – Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का गुस्सा खुलकर फूट पड़ा। प्रशासन और आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करते हुए एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जमुई की सड़कों पर एक विशाल और उग्र विरोध मार्च निकाला, जिसमें दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देने की पुरजोर मांग की गई। आइए इस हाई-प्रोफाइल आंदोलन और जमुई छेड़खानी कांड के हर पहलू की गहराई से पड़ताल करते हैं और जानते हैं कि सत्ता के खेमे से उठे इस विरोध के क्या बड़े राजनीतिक मायने हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जमुई जिले में कुछ दिनों पहले एक कॉलेज जाने वाली छात्रा के साथ मनचलों और दबंगों द्वारा सरेआम छेड़खानी और अभद्रता की एक अत्यंत घिनौनी घटना को अंजाम दिया गया था। जब पीड़ित छात्रा और उसके परिजनों ने इस कृत्य का विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दीं। इस घटना के तूल पकड़ते ही स्थानीय स्तर पर लोगों का गुस्सा भड़क उठा क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा के दावों के बीच इस तरह की वारदातें कानून-व्यवस्था की पोल खोल देती हैं। शुरुआती दौर में जब पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित और कड़े कदम उठाने में कुछ ढिलाई बरती गई, तो मामला और अधिक गंभीर हो गया। विपक्ष के साथ-साथ अब आम जनता भी यह सवाल पूछने लगी थी कि आखिर जब राज्य में कानून का राज है, तो अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो रहे हैं कि वे बेटियों को निशाना बनाने से भी नहीं डर रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला और राजनीतिक रूप से बड़ा मोड़ तब आया जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ सड़क पर उतर आए। आमतौर पर यह माना जाता है कि सत्ताधारी दल से जुड़ी संस्थाएं अपनी ही सरकार के कार्यकाल में प्रशासन के खिलाफ खुलकर प्रदर्शन करने से बचती हैं, लेकिन जमुई के मामले में छात्रों का आक्रोश सभी सीमाओं को पार कर गया। हाथों में तख्तियां लिए और न्याय के नारे लगाते हुए सैकड़ों की संख्या میں एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जमुई शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए एक विशाल विरोध मार्च निकाला। उन्होंने पुलिस प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द सभी मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो छात्र संगठन पूरे राज्य में उग्र आंदोलन छेड़ने के लिए मजबूर हो जाएगा।

एबीवीपी के इस उग्र प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव के बाद जमुई जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में उच्चाधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और पुलिस टीमों को निर्देश दिए कि वे फरार चल रहे आरोपियों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी करें। छात्र संगठनों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस को इस मामले में पहले ही दिन से संवेदनशीलता दिखाते हुए सख्त एक्शन लेना चाहिए था, लेकिन ढुलमुल रवैये के कारण अपराधियों के हौसले और अधिक बुलंद हो गए। बेटियों की सुरक्षा जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल (Fast Track Court Trial) चलाया जाना चाहिए ताकि समाज में एक ऐसा कड़ा संदेश जाए कि भविष्य में कोई भी सिरफिरा इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।

जमुई की इस घटना और सत्ताधारी दल के अपने ही छात्र संगठन द्वारा निकाले गए विरोध मार्च के बाद बिहार की सियासत में भूचाल आ गया है। विपक्षी दल इस बात को लेकर सरकार को घेर रहे हैं कि जब सत्ताधारी पार्टी के अपने कार्यकर्ता ही न्याय के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, तो समझा जा सकता है कि राज्य की आम जनता और बेटियां कितनी असुरक्षित महसूस कर रही होंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन सरकार और संगठन दोनों के लिए एक चेतावनी होते हैं कि जनता की बुनियादी सुरक्षा और सम्मान के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है। आने वाले समय में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से चार्जशीट दाखिल करती है और अदालत से आरोपियों को क्या सजा मिलती है, लेकिन जमुई की इस बेटी के लिए न्याय की यह लड़ाई पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा की बहस को एक नया मोड़ दे चुकी है।