
उधम सिंह नगर जिले के पंतनगर में स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अब बकरी पालन को नई दिशा देने में जुटा है। विश्वविद्यालय न सिर्फ किसानों को इस ओर प्रेरित कर रहा है, बल्कि एक खास प्रजाति ‘पंतजा’ को विकसित कर उसे बढ़ावा भी दे रहा है, जिससे ग्रामीणों की आय बढ़ाने का रास्ता खुल सके।
बकरी पालन बना आय का मजबूत जरिया
ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन को पहले छोटे स्तर का काम माना जाता था, लेकिन अब इसे स्वरोजगार के बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का मानना है कि कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला यह व्यवसाय खासकर महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और छोटे किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
‘पंतजा’ प्रजाति बनी खास पहचान
विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘पंतजा’ प्रजाति को खास तौर पर मीट उत्पादन के लिए तैयार किया गया है। यह प्रजाति उत्तराखंड के मौसम के अनुकूल है और अन्य बकरियों की तुलना में कम बीमार पड़ती है। यही वजह है कि इसे तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
समय-समय पर पशुपालकों से मिलती है विश्वविद्यालय की टीम: वैज्ञानिक
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. आर.के. शर्मा ने बताया कि राज्य और केंद्र सरकार भी चाहती हैं कि ज्यादा से ज्यादा किसान बकरी पालन अपनाएं। इसके लिए विश्वविद्यालय की टीम समय-समय पर पशुपालकों से मिलती है, उन्हें जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराती है और बेहतर नस्ल के लिए ब्रीडर बकरा भी देती है।
ग्रामीणों के लिए नया अवसर
बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की कई योजनाएं भी चल रही हैं। इनके जरिए पशुपालकों को बकरियां उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही तरीके से बकरी पालन किया जाए, तो यह ग्रामीणों के लिए स्थायी आय का जरिया बन सकता है।
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