
भारतीय सशस्त्र बलों यानी थल सेना, नौसेना और वायुसेना में अफसर बनने का सपना देखने वाले देश के लाखों युवाओं के मन में हमेशा एक बड़ा डर रहता है कि कहीं वे मेडिकल परीक्षा में फेल न हो जाएं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित की जाने वाली नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की परीक्षा लिखित रूप से पास करना जितना कठिन है, उससे कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण इसके मेडिकल टेस्ट (NDA Medical Examination) को पास करना माना जाता है। बहुत से ऐसे युवा होते हैं जो लिखित परीक्षा और एसएसबी इंटरव्यू (SSB Interview) जैसी कठिन बाधाओं को पार कर लेते हैं, लेकिन अंत में छोटी-छोटी शारीरिक कमियों या मेडिकल अनफिटनेस के कारण बाहर हो जाते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर एनडीए मेडिकल बोर्ड द्वारा किन कारणों से उम्मीदवारों को रिजेक्ट किया जाता है और क्या चश्मा पहनने वाले या टैटू बनवाने वाले छात्र इस परीक्षा में चुन जा सकते हैं।
एनडीए मेडिकल परीक्षा का महत्व और प्रक्रिया
एनडीए की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में सफल होने वाले उम्मीदवारों को देश के चुनिंदा मिलिट्री हॉस्पिटल्स में विस्तृत मेडिकल जांच के लिए भेजा जाता है। इस जांच में उम्मीदवार के शरीर के हर एक अंग की बहुत ही बारीकी से जांच की जाती है। एयरफोर्स और नेवी के लिए मेडिकल स्टैंडर्ड्स थल सेना की तुलना में काफी ज्यादा कड़े होते हैं। आंखों की नजर से लेकर हड्डियों के ढांचे, वजन, छाती के विस्तार, बहरेपन, दांतों की स्थिति और ब्लड टेस्ट तक की कई तरह की जांचें होती हैं। अगर किसी भी उम्मीदवार के शरीर में कोई ऐसी समस्या पाई जाती है जो भविष्य में उसके सैनिक करियर या ऑपरेशनल ड्यूटी में बाधा बन सकती है, तो मिलिट्री डॉक्टर्स उसे मेडिकल रूप से अनफिट घोषित कर देते हैं।
क्या चश्मा पहनने वाले छात्र एनडीए में सेलेक्ट हो सकते हैं?
छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि कमजोर नजर वाले या चश्मा लगाने वाले युवा एनडीए में जा सकते हैं या नहीं। इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप सेना के किस विंग (आर्मी, नेवी या एयरफोर्स) के लिए आवेदन कर रहे हैं और आपकी दृष्टि का दोष यानी मायोपिया या हाइपरमेट्रोपिया कितना है। भारतीय थल सेना (Indian Army) के लिए चश्मे का एक निश्चित सीमा तक का नंबर स्वीकार्य होता है, बशर्ते वह तय मानकों के भीतर हो। वहीं दूसरी ओर, भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के मामले में नियम बेहद सख्त हैं। वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद के लिए किसी भी प्रकार का चश्मा या लेंस स्वीकार नहीं किया जाता है और आंखों की दृष्टि एकदम सही (6/6 बिना चश्मे के) होनी चाहिए। हालांकि, ग्राउंड ड्यूटी और नेवी के कुछ विभागों में चश्मे की एक सीमित पावर के साथ छूट मिल सकती है, लेकिन इसके भी बहुत कड़े पैमाने हैं। जिन उम्मीदवारों ने लेसिक सर्जरी (LASIK Surgery) कराई होती है, उनके लिए भी वायुसेना और नौसेना में विशेष दिशा-निर्देश होते हैं और एक निश्चित उम्र के बाद ही इसे स्वीकार किया जाता है।
शरीर पर टैटू होने से जुड़े कड़े नियम
आजकल युवाओं में शरीर के विभिन्न हिस्सों पर टैटू बनवाने का काफी क्रेज देखने को मिलता है, लेकिन डिफेंस फोर्सेज में इसे लेकर बहुत ही सख्त अनुशासन है। सेना के नियमों के मुताबिक, किसी भी उम्मीदवार के शरीर पर ऐसे बड़े टैटू नहीं होने चाहिए जो आसानी से दिखाई दें। यदि किसी उम्मीदवार के हाथ की कलाई, कोहनी, गर्दन या चेहरे पर टैटू बना हुआ है, तो उसे सीधे तौर पर मेडिकल अनफिट या रिजेक्ट कर दिया जाता है। हां, धार्मिक आस्था से जुड़े छोटे टैटू या शरीर के ऐसे गुप्त हिस्से पर बने टैटू जो वर्दी पहनने के बाद बिल्कुल दिखाई न दें, उन्हें कुछ शर्तों के साथ स्वीकार किया जा सकता है। इसके बावजूद, सेना यही सलाह देती है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने तक युवा शरीर पर किसी भी तरह का टैटू गुदवाने से बचें।
अन्य प्रमुख मेडिकल कारण जिनके चलते होता है रिजेक्ट
चश्मे और टैटू के अलावा ऐसे कई अन्य शारीरिक कारण भी हैं जिनकी वजह से एनडीए मेडिकल टेस्ट में उम्मीदवार बाहर हो जाते हैं। इनमें सबसे आम समस्याएं नॉकिंग नीज (Knock Knees यानी घुटनों का आपस में टकराना), फ्लैट फुट (Flat Foot यानी पैरों के तलवे का सपाट होना), अत्यधिक पसीना आना (Hyperhidrosis), कलर ब्लाइंडनेस (Color Blindness यानी रंगों में भेद न कर पाना), कान के पर्दे में छेद या सुनने में कमजोरी, रीढ़ की हड्डी में टेढ़ापन (Spine Deformity), और अधिक वजन या कम वजन होना शामिल हैं। इनमें से कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिनमें मेडिकल बोर्ड उम्मीदवार को अपील करने के लिए कुछ हफ्तों का समय देता है, जिसे अपील मेडिकल बोर्ड (Appeal Medical Board) कहा जाता है, जहां डॉक्टर दोबारा जांच करते हैं।
मेडिकल अनफिटनेस से बचने और तैयारी करने के उपाय
चूंकि एनडीए की मेडिकल परीक्षा बहुत ही वैज्ञानिक और अनुशासित तरीके से होती है, इसलिए उम्मीदवारों को पहले से ही अपनी शारीरिक फिटनेस का ध्यान रखना चाहिए। नियमित रूप से योग, व्यायाम और संतुलित आहार लेने से कई छोटी-मोटी समस्याओं से बचा जा सकता है। आंखों की नियमित जांच कराना और किसी भी तरह की छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या के लिए पहले से डॉक्टर से सलाह लेना समझदारी भरा कदम साबित होता है। यदि आप भी देश की रक्षा सेवा में अधिकारी बनने का सपना देख रहे हैं, तो अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी पूरा ध्यान दें ताकि परीक्षा के अंतिम चरण में किसी निराशा का सामना न करना पड़े।
सरहद पर देश की रक्षा करने का जज्बा रखने वाले युवाओं के लिए एनडीए सिर्फ एक परीक्षा नहीं बल्कि एक गौरवशाली जीवन की शुरुआत है, इसलिए मेडिकल स्टैंडर्ड्स को समझना और उनके अनुसार खुद को तैयार रखना हर आवेदक के लिए बेहद जरूरी है।
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