
सनातन धर्म में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को ‘पापांकुशा एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। आज का दिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पावन और फलदायी माना जा रहा है, क्योंकि एकादशी तिथि के साथ-साथ भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित गुरुवार का पावन दिन और ज्योतिषीय रूप से मंगलकारी ‘वृद्धि योग’ का दुर्लभ संयोग उपस्थित हुआ है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान नारायण के पद्मनाभ स्वरूप की आराधना करने से मनुष्य के जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वृद्धि योग में किए गए पुण्य कार्य, दान, जप और पूजा-अर्चना का फल कई गुना बढ़कर साधक को प्राप्त होता है। आइए जानते हैं आज का संपूर्ण दैनिक पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण समय सारिणी।
आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दिनभर प्रभावी रहेगी। आज के पंचांग की विस्तृत खगोलीय और पंचांगीय गणना इस प्रकार है:
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संवत: विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948
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माह व पक्ष: आश्विन मास, शुक्ल पक्ष
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तिथि: एकादशी तिथि (विष्णु आराधना के लिए सर्वोत्तम)
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दिन: गुरुवार (बृहस्पतिवार)
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नक्षत्र: शतभिषा नक्षत्र (उपरान्त पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र)
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योग: वृद्धि योग (कार्यों में वृद्धि और सफलता देने वाला शुभ योग)
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करण: वणिज करण (उपरान्त विष्टि / भद्रा)
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सूर्य राशि: तुला राशि
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चंद्र राशि: कुंभ राशि (दिन-रात कुंभ राशि में संचरण)
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सूर्योदय का समय: प्रातः 06:26 बजे
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सूर्यास्त का समय: सायं 05:44 बजे
एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शुभ चौघड़िया और श्रेष्ठ मुहूर्तों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है:
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:45 बजे से 05:35 बजे तक (साधना, ध्यान और ईष्ट स्मरण के लिए सर्वोत्तम)
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अमृत काल मुहूर्त: प्रातः 08:15 बजे से 09:48 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:43 बजे से 12:28 बजे तक (दिन का सबसे श्रेष्ठ और दोषमुक्त मुहूर्त, इसमें किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत की जा सकती है)
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विजय मुहूर्त: दोपहर 01:58 बजे से 02:44 बजे तक
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गोधूलि वेला: सायं 05:44 बजे से 06:10 बजे तक (सायंकालीन दीपदान और तुलसी पूजा का समय)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल और यमगंड के दौरान किए गए धार्मिक अनुष्ठान या नए संकल्पों में विघ्न आने की आशंका रहती है। इसलिए आज के अशुभ समय का विशेष ध्यान रखें:
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राहुकाल: दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक (इस अवधि में कोई भी नया कार्य, बड़ा लेन-देन या यात्रा आरंभ न करें)
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यमगंड काल: प्रातः 06:00 बजे से 07:30 बजे तक
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गुलिक काल: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक
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दुर्मुहूर्त: प्रातः 10:12 बजे से 10:58 बजे तक और अपराह्न 02:44 बजे से 03:30 बजे तक
आज गुरुवार और एकादशी का दोहरा महासंयोग होने के कारण पीले रंग का विशेष महत्व है। प्रातःकाल स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाकर एकादशी व्रत का संकल्प लें। भगवान को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराने के बाद पीले चंदन, पीले कनेर के फूल, पीले फल, अक्षत और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें, क्योंकि बिना तुलसी दल के श्रीहरि का भोग अधूरा माना जाता है। पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “विष्णु सहस्त्रनाम” का पाठ करें।
वृद्धि योग के इस शुभ दिन पर जरूरतमंदों को पीले अन्न, चने की दाल, पीले वस्त्र, केला या धार्मिक पुस्तकों का दान करने से कुंडली में स्थित गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और घर-परिवार में आ रही आर्थिक बाधाएं हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं। संध्याकाल में तुलसी के पौधे के पास गाय के शुद्ध घी का चौमुखी दीपक जलाकर 11 बार परिक्रमा अवश्य करें।
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