अचानक भागने लगा गोल्ड का भाव: दिसंबर 2026 तक 10 ग्राम सोना कितने का मिलेगा? जानिए ब्रोकरेज के टारगेट और एक्सपर्ट्स की ‘खरीदें या रुकें’ रणनीति

वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट और अमेरिकी डॉलर से जुड़े नए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माने जाने वाले सोने (Gold) की चमक एक बार फिर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचती नजर आ रही है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में आई तेजी का सीधा असर भारतीय घरेलू बाजार पर भी देखा जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और हाजिर (Spot) सर्राफा बाजार में कीमतों में आए नए उछाल के बाद आम खरीदारों और निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि साल 2026 के अंत यानी दिसंबर तक 10 ग्राम सोने का भाव किस स्तर पर पहुंचेगा और क्या मौजूदा उच्च स्तरों पर खरीदारी करना सही फैसला होगा।

सोने की कीमतों में अचानक तेजी के 4 सबसे बड़े कारण

कमोडिटी और वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, सोने के भाव में आ रही इस ताजा तेजी के पीछे कोई एक वजह नहीं बल्कि कई वैश्विक कारक एक साथ काम कर रहे हैं:

  • 1. भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंध (Geopolitical Risks): अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव, ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत सख्त वित्तीय प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक निवेशक इक्विटी जैसे जोखिम भरे एसेट्स से निकलकर सुरक्षित धातु सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं।

  • 2. केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी (Central Bank Demand): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) और वैश्विक केंद्रीय बैंक डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

  • 3. अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की संभावना: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी महीनों में मौद्रिक नीति को आसान बनाने और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से गैर-ब्याज देने वाले एसेट जैसे सोने की मांग बढ़ी है।

  • 4. रुपये की चाल और आयात शुल्क (Currency Dynamics): डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में रहने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव भारत में सोने की लैंडिंग कॉस्ट पर पड़ता है, जिससे वैश्विक तेजी के साथ-साथ घरेलू बाजार में कीमतें और अधिक बढ़ जाती हैं।

दिसंबर 2026 तक कितना महंगा हो सकता है 10 ग्राम सोना?

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म्स और भारतीय कमोडिटी एक्सपर्ट्स ने सोने के लिए साल 2026 के अंत तक के अलग-अलग परिदृश्य पेश किए हैं:

  • ग्लोबल टारगेट: गोल्डमैन सैक्स और जेपी मॉर्गन जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने सोने के लिए अपने वैश्विक लक्ष्य को मजबूत बनाए रखा है, जहां स्पॉट गोल्ड के $4,500 से $4,900 प्रति औंस के दायरे में बने रहने का अनुमान लगाया गया है।

  • घरेलू बाजार (MCX) अनुमान: भारतीय बाजार में 24-कैरेट (99.9% शुद्ध) 10 ग्राम सोने के लिए विश्लेषकों ने तीन प्रमुख स्तर तय किए हैं:

    • बेस केस (सामान्य स्थिति): यदि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सामान्य रहती है और ब्याज दरों में संतुलित कटौती होती है, तो दिसंबर 2026 तक कीमतें स्थिर से मध्यम तेजी के साथ बनी रहेंगी।

    • बुल केस (तनाव और महंगाई में वृद्धि): यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष और अधिक व्यापक होता है तथा कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं, तो सोना अपने उच्च स्तरों को तोड़कर नए रिकॉर्ड स्तरों को छू सकता है।

    • बेयर केस (तनाव में कमी): यदि वैश्विक शांति वार्ता सफल होती है और डॉलर मजबूत होता है, तो मौजूदा स्तरों से 5 से 8 प्रतिशत का तकनीकी करेक्शन (गिरावट) भी देखने को मिल सकता है।

खरीदें या रुकें? निवेशकों और ग्राहकों के लिए सटीक रणनीति

यदि आप गहनों (Jewellery) के लिए खरीदारी करना चाहते हैं या लंबी अवधि के लिए वेल्थ क्रिएशन का प्लान बना रहे हैं, तो बाजार विशेषज्ञों की सलाह इस प्रकार है:

  • एकमुश्त (Lump Sum) खरीदारी से बचें: मौजूदा उच्च स्तरों पर एक साथ बड़ी रकम का सोना खरीदने के बजाय ‘बाय ऑन डिप्स’ (Buy on Dips) की रणनीति अपनाएं। जब भी बाजार में 2-3% की गिरावट या मुनाफावसूली आए, तब किस्तों में खरीदारी करें।

  • एसआईपी (SIP) और गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs): खुदरा निवेशकों के लिए फिजिकल गोल्ड (जिसमें मेकिंग चार्ज और स्टोरेज की लागत होती है) के बजाय गोल्ड ईटीएफ या डिजिटल गोल्ड में मासिक सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।

  • पोर्टफोलियो का 10-15% आवंटन: वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, किसी भी निवेशक के कुल पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा 10 से 15 प्रतिशत के बीच होना चाहिए ताकि यह शेयर बाजार की गिरावट और मुद्रास्फीति के समय आपके पूरे निवेश को सुरक्षा प्रदान कर सके।

सोने का दीर्घकालिक रुझान अभी भी मजबूत बना हुआ है, लेकिन बहुत कम समय में भारी रिटर्न की उम्मीद के बजाय इसे अपने निवेश पोर्टफोलियो के बीमा (Hedge) के रूप में देखना सबसे समझदारी भरा कदम होगा।