8th CPC: क्या सच में डबल हो जाएगी सैलरी? Level-1, 2 और 3 के केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन वृद्धि और प्रमोशन पर बड़ा अपडेट, जानिए नया फिटमेंट फैक्टर फॉर्मूला

केंद्र सरकार के 1 करोड़ से अधिक सेवारत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission – 8th CPC) को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं। कर्मचारी संगठनों और राष्ट्रीय संयुक्त सलाहकार तंत्र (NC-JCM) द्वारा सरकार के समक्ष रखी गई मांगों के बाद निचले वेतनमान यानी पे मैट्रिक्स के लेवल-1, लेवल-2 और लेवल-3 के कर्मचारियों के वेतन में सबसे बड़े उछाल की उम्मीद जताई जा रही है। यदि आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर को पूर्व अनुमानों के अनुरूप स्वीकृति मिलती है, तो ग्रुप-सी और शुरुआती स्तर के कर्मियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी दोगुनी तक पहुंच सकती है, जिससे उनके करियर और पदोन्नति (Career Progression) को बुलेट ट्रेन जैसी रफ्तार मिलने की संभावना है।

फिटमेंट फैक्टर का गणित: बेसिक सैलरी में कितना आएगा उछाल?

वेतन आयोग में कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी और मूल वेतन (Basic Pay) में होने वाली बढ़ोतरी का मुख्य आधार फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) होता है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 के कॉमन फिटमेंट फैक्टर के आधार पर न्यूनतम वेतन को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 किया गया था।

8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठनों द्वारा 1.92 से लेकर 2.86 तक के विभिन्न फिटमेंट फैक्टर मॉडल्स का प्रस्ताव रखा गया है:

वेतन स्तर (Pay Level) 7वें वेतन आयोग में न्यूनतम बेसिक 1.92 फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक 2.57 फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक
Level-1 (Grade Pay ₹1800) ₹18,000 ₹34,560 ₹46,260 ₹51,480
Level-2 (Grade Pay ₹1900) ₹19,900 ₹38,208 ₹51,143 ₹56,914
Level-3 (Grade Pay ₹2000) ₹21,700 ₹41,664 ₹55,769 ₹62,062

Level-1, Level-2 और Level-3 के कर्मचारियों को क्यों मिलेगा सबसे बड़ा फायदा?

केंद्रीय सेवाओं में रेलवे ट्रैकमैन, खलासी, मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS), लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC), अपर डिवीजन क्लर्क (UDC), पोस्टल असिस्टेंट और अर्धसैनिक बलों (CAPF) के जवान लेवल-1 से लेकर लेवल-3 के दायरे में आते हैं।

इन श्रेणियों के कर्मचारियों को मिलने वाले मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

  • न्यूनतम जीवन निर्वाह वेतन (Living Wage): महंगाई के मौजूदा सूचकांक (AICPI-IW) को ध्यान में रखते हुए आयोग का मुख्य फोकस निचले पायदान के कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को मजबूत करना है, जिससे इनके वेतन का प्रतिशत उछाल उच्च अधिकारियों की तुलना में अधिक रहने का अनुमान है।

  • महंगाई भत्ते (DA) का बेसिक में विलय: वेतन आयोग लागू होने के समय मौजूदा महंगाई भत्ते को शून्य कर दिया जाता है और उसे मूल वेतन में समाहित कर नया पे-मैट्रिक्स तैयार किया जाता है, जिससे भविष्य में मिलने वाले 3% या 4% डीए हाइक की मौद्रिक वैल्यू सीधे दोगुनी हो जाएगी।

  • एचआरए और भत्तों में भारी वृद्धि: बेसिक सैलरी बढ़ते ही मकान किराया भत्ता (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA), चिल्ड्रन्स एजुकेशन अलाउंस (CEA) और ओवरटाइम भत्ते भी स्वतः उसी अनुपात में बढ़ जाएंगे।

संशोधित MACP सिस्टम और प्रमोशन की रफ्तार

वेतन वृद्धि के अलावा लेवल-1, 2 और 3 के कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव उनके करियर ग्रोथ और पदोन्नति के नियमों में प्रस्तावित किया जा रहा है।

वर्तमान में लागू मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) योजना के तहत कर्मचारियों को 10, 20 और 30 साल की सेवा पर वित्तीय अपग्रेडेशन दिया जाता है। कर्मचारी यूनियनों ने मांग की है कि निचले स्तर पर काम करने वाले कर्मियों में लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने की समस्या (Stagnation) को खत्म करने के लिए एमएसीपी की समय-सीमा को घटाकर प्रत्येक 7 या 8 वर्ष किया जाए। इससे लेवल-1 का कर्मचारी अपने करियर के शुरुआती 15 वर्षों के भीतर ही लेवल-4 या लेवल-5 के पे-स्केल तक आसानी से पहुंच सकेगा।

पेंशन और ग्रेच्युटी फंड पर सीधा असर

बेसिक सैलरी में होने वाली इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी का सीधा सकारात्मक प्रभाव रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर भी पड़ेगा। कर्मचारियों की ग्रेच्युटी की गणना नए बेसिक पे के आधार पर होगी, वहीं लीव इनकैशमेंट और पेंशन फंड के मासिक संचय में भी भारी इजाफा होगा, जिससे कर्मचारियों को सेवाकाल और रिटायरमेंट दोनों स्तरों पर पूर्ण वित्तीय सुरक्षा प्राप्त होगी।