‘तुमसे नहीं हो रहा, लाइसेंस दो हम खुद बनाएंगे मिसाइलें!’ जेलेंस्की ने अमेरिका को सरेआम हड़काया

रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का एक ऐसा सनसनखेज और बेहद आक्रामक बयान सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया के राजनयिक गलियारों में खलबली मचा दी है। हमेशा पश्चिमी देशों और अमेरिका के आगे हथियारों के लिए गुहार लगाने वाले जेलेंस्की के तेवर इस बार पूरी तरह बदले हुए नजर आ रहे हैं। इस बार जेलेंस्की ने किसी और को नहीं, बल्कि अपने सबसे बड़े मददगार और महाशक्ति अमेरिका को सरेआम सीधी चुनौती दे डाली है। जेलेंस्की ने बेहद तीखे लहजे में अमेरिका से कहा है कि अगर उनसे यूक्रेन की मदद के लिए मिसाइलें और आधुनिक हथियार समय पर तैयार नहीं हो पा रहे हैं, तो वे इसके निर्माण का लाइसेंस यूक्रेन को सौंप दें, ताकि यूक्रेन इन मिसाइलों को खुद अपने देश में बना सके।

हथियारों की सप्लाई में हो रही देरी पर फूटा जेलेंस्की का गुस्सा

यूक्रेन के राष्ट्रपति का यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से हथियारों की डिलीवरी में हो रही देरी और वाशिंगटन की ढुलमुल नीतियां हैं। जेलेंस्की का मानना है कि रूस लगातार यूक्रेन के शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, जबकि अमेरिका और नाटो (NATO) देशों से मिलने वाली सैन्य मदद कागजी कार्यवाहियों और राजनीतिक बयानों में अटकी हुई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे हथियारों की कमी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सीधे अमेरिकी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि फ्रंटलाइन पर लड़ रहे यूक्रेनी सैनिकों के पास वक्त नहीं है। अगर अमेरिकी डिफेंस कंपनियां प्रोडक्शन तेज नहीं कर पा रही हैं, तो उन्हें तकनीकी ब्लूप्रिंट और लाइसेंस यूक्रेन को ट्रांसफर कर देने चाहिए।

‘लाइसेंस दो, हम बनाएंगे मिसाइलें’ के पीछे जेलेंस्की की बड़ी रणनीति

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जेलेंस्की के इस बयान के गहरे राजनीतिक और सैन्य मायने हैं। जेलेंस्की दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि यूक्रेन केवल विदेशी इमदाद पर निर्भर रहने वाला लाचार देश नहीं है, बल्कि उसके पास खुद का एक मजबूत और पुराना सोवियत काल का डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस (रक्षा औद्योगिक ढांचा) मौजूद है। अगर अमेरिका यूक्रेन को अपनी पैट्रियट (Patriot) या अन्य लॉन्ग रेंज मिसाइलों के निर्माण का कानूनी अधिकार और तकनीकी सहयोग दे देता है, तो यूक्रेन अपने भूमिगत कारखानों में तेजी से हथियारों का प्रोडक्शन शुरू कर सकता है। इससे न सिर्फ हथियारों की लागत कम होगी, बल्कि सप्लाई चेन में होने वाली देरी से भी छुटकारा मिल जाएगा।

जेलेंस्की के इस अल्टीमेटम से जो बाइडन प्रशासन और नाटो में खलबली

जेलेंस्की के इस बेहद कड़े और दोटूक बयान के बाद वाशिंगटन से लेकर ब्रसेल्स (नाटो मुख्यालय) तक हड़कंप मच गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के अधिकारी इस बयान पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं, क्योंकि संवेदनशील मिसाइल तकनीक का लाइसेंस किसी दूसरे देश को ट्रांसफर करना अमेरिकी कानूनों और वैश्विक सुरक्षा संधियों के लिहाज से बेहद जटिल प्रक्रिया है। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी संसद (Congress) में भी इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या जेलेंस्की का यह रवैया एक सहयोगी देश के रूप में सही है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के बाद आने वाले दिनों में अमेरिका और यूक्रेन के रिश्तों में एक नया तनाव देखने को मिल सकता है।