
राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित रेस्टोरेंट व कैफे कारोबारी शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में मुख्य आरोपी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और मॉडल श्रद्धा दुबे पर कानून का शिकंजा पूरी तरह कस चुका है। नागपुर से ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाए जाने के बाद पुलिस ने श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर को अदालत में पेश किया। मामले की गंभीरता, केस डायरी और जांच अधिकारियों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने श्रद्धा दुबे को 10 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody/Remand) में जेल भेजने का आदेश दे दिया है। रिमांड अर्जी के दौरान जांच टीम ने अदालत को अवगत कराया कि आरोपी पूछताछ के दौरान लगातार टालमटोल कर रही है, अपने बयानों को बार-बार बदल रही है और मामले से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्यों को सामने लाने में जांच एजेंसी के साथ बिल्कुल सहयोग नहीं कर रही है।
अदालत में पेशी के दौरान सरकारी वकील और जांच अधिकारी ने श्रद्धा दुबे के असहयोगात्मक रवैये को लेकर कई गंभीर बिंदु सामने रखे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ट्रांजिट रिमांड और प्रारंभिक पूछताछ के दौरान श्रद्धा से शिवा शर्मा की मौत से चंद मिनट पहले के घटनाक्रम, फ्लैट के भीतर हुई बहस, बरामद आपत्तिजनक सामान और फरारी के दौरान इस्तेमाल किए गए संपर्कों को लेकर दर्जनों सवाल पूछे गए। लेकिन अधिकांश सवालों पर वह या तो चुप्पी साधे रही या फिर रटा-रटाया जवाब देकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करती रही। पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी ने फरारी के दौरान कई मोबाइल फोन बदले, अजनबियों के हॉटस्पॉट से इंटरनेट चलाया और चैट हिस्ट्री को डिलीट किया, जिससे कई अहम इलेक्ट्रॉनिक सबूत नष्ट होने की आशंका है। ऐसे में केस के सभी कड़ियों को जोड़ने के लिए आरोपी की न्यायिक हिरासत और आगे पुलिस कस्टडी रिमांड में गहन पूछताछ बेहद जरूरी है।
शिवा शर्मा की मां रंजना शर्मा और परिजनों ने पहले दिन से ही इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है। परिवार का सीधा आरोप है कि श्रद्धा दुबे और उसके करीबियों ने शिवा को लंबे समय से ब्लैकमेल कर रखा था और उस पर करोड़ों रुपये व संपत्तियों को लेकर भारी मानसिक दबाव बनाया जा रहा था। घटना वाले दिन भी शिवा को फोन करके बुलाया गया था, जिसके बाद संदिग्ध हालात में चौथी मंजिल की बालकनी से गिरकर उसकी मौत हो गई। परिवार का दावा है कि गिरने से पहले उसके साथ फ्लैट के अंदर मारपीट और शारीरिक प्रताड़ना की गई थी। परिजनों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि श्रद्धा के पास मौजूद सभी गुप्त खातों, मोबाइल बैकअप और उसकी लाइफस्टाइल के पीछे छिपे फंडिंग नेटवर्क की गहन आर्थिक व फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
दूसरी ओर, गिरफ्तारी से पहले सोशल मीडिया पर जारी किए गए वीडियो संदेशों में श्रद्धा दुबे ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था। उसका दावा था कि शिवा शर्मा पर 15 से 20 लाख रुपये का भारी कर्ज था और वह लेनदारों के फोन आने से बेहद परेशान चल रहे थे। श्रद्धा ने कहा था कि घटना के समय शिवा बाथरूम की ओर गए थे और अचानक बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अगर श्रद्धा निर्दोष थी, तो वह शव को अस्पताल ले जाते समय मौके से फरार क्यों हुई, उसने अपना फोन बंद क्यों किया, और नेपाल सीमा से लेकर नागपुर तक करीब 2200 किलोमीटर की फरारी काटने की क्या मजबूरी थी? इन सवालों का कोई भी संतोषजनक जवाब श्रद्धा पुलिस के सामने नहीं रख सकी है।
पुलिस उपायुक्त (DCP) के नेतृत्व में चल रही विशेष जांच टीम ने श्रद्धा दुबे और उसके साथियों के पास से बरामद स्मार्टफोन, सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेज दिया है। साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अब इन डिवाइसेज से डिलीट किए गए व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग्स, क्लाउड बैकअप और लोकेशन हिस्ट्री को रिकवर करने में जुटे हैं। इसके अलावा घटनास्थल से मिले जैविक साक्ष्य और विसरा रिपोर्ट का वैज्ञानिक मिलान किया जा रहा है। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 10 दिन की ज्यूडिशियल रिमांड के दौरान पुलिस अदालत से कस्टडी रिमांड की अनुमति लेकर आरोपी को आमने-सामने बैठाकर क्रॉस-क्वेश्चनिंग करेगी, ताकि शिवा शर्मा की मौत के पीछे छिपे पूरे सच से पर्दा उठाया जा सके।
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