
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार (29 मई 2026) की सुबह आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (LCTSL) के संविदा कर्मचारियों ने निजी आउटसोर्सिंग के विरोध में अचानक कार्य बहिष्कार (Strike) कर दिया, जिससे शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली सिटी बसों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है।
दुबग्गा सिटी बस डिपो में तैनात 400 से अधिक चालकों (Drivers) और परिचालकों (Conductors) का गुस्सा प्रबंधन के खिलाफ फूट पड़ा। कर्मचारियों ने डिपो के मुख्य द्वार पर बसों को खड़ा कर दिया और वहीं धरने पर बैठ गए हैं। इस औचक हड़ताल से परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है।
कर्मचारियों के प्रदर्शन की मुख्य वजहें
प्रदर्शनकारी संविदा कर्मचारियों ने सिटी बस प्रबंधन और प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:
-
3 महीने से बकाया वेतन: कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें मार्च 2026 से लेकर अब तक (मई 2026) का वेतन नहीं दिया गया है। पिछले तीन महीनों से सैलरी न मिलने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
-
निजी फर्म में समायोजन का विरोध: कर्मचारी प्रबंधन द्वारा किए जा रहे निजी आउटसोर्सिंग और निजी फर्म में जबरन समायोजन (Adjustment) की प्रक्रिया का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। वे इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।
-
मानसिक प्रताड़ना और उत्पीड़न: धरने पर बैठे ड्राइवरों और कंडक्टरों ने डिपो अधिकारियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और नौकरी से निकालने की धमकी देने के भी आरोप लगाए हैं।
संविदा कर्मियों की प्रमुख मांगें
मौके पर पहुंचे अधिकारी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
हड़ताल की सूचना मिलते ही सिटी बस सेवा के उच्च अधिकारी और स्थानीय पुलिस बल दुबग्गा डिपो पहुंच गए हैं। अधिकारी लगातार कर्मचारियों को समझाने और बसों का संचालन दोबारा शुरू कराने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि, कर्मचारियों का रुख बेहद सख्त है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे केवल खोखले आश्वासनों पर काम पर नहीं लौटेंगे। कर्मचारियों ने परिवहन विभाग और जिला प्रशासन को अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तुरंत लिखित और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस आंदोलन को पूरे लखनऊ शहर में और तेज करेंगे।
girls globe