
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल के बीच एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में कमर दर्द के मरीजों की संख्या बिजली की रफ्तार से बढ़ रही है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2050 तक दुनिया भर के लगभग 843 मिलियन (यानी 84 करोड़ से ज्यादा) लोग लोअर बैक पेन (कमर के निचले हिस्से में दर्द) की गंभीर समस्या से जूझ रहे होंगे। एक रिपोर्टर के तौर पर अगर इस डेटा का विश्लेषण करें तो यह स्थिति आने वाले समय में एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बनने वाली है, जो लोगों को शारीरिक रूप से लाचार बना सकती है।
महिलाओं और 50 पार के लोगों को सबसे ज्यादा खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 तक दुनिया भर में लगभग 61 करोड़ लोग इस समस्या से परेशान थे, लेकिन अब यह आंकड़ा तेजी से ग्राफ ऊपर ले जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ कमर दर्द का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है। आमतौर पर 50 से 55 साल की उम्र के लोगों में यह समस्या सबसे अधिक देखी जा रही है। इस रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में लोअर बैक पेन की समस्या कहीं ज्यादा देखने को मिल रही है।
क्या है लोअर बैक पेन और क्यों मानसिक सेहत पर पड़ रहा असर?
लोअर बैक पेन दरअसल पसलियों के निचले हिस्से (Ribcage) और हिप्स के बीच होने वाले तेज या धीमे दर्द को कहते हैं। यह दर्द कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक लगातार परेशान कर सकता है। इसकी वजह से न सिर्फ उठने-बैठने और चलने-फिरने में भारी दिक्कत आती है, बल्कि रात की नींद भी पूरी तरह हराम हो जाती है। लंबे समय तक इस दर्द को झेलने के कारण मरीजों की मानसिक सेहत और कार्यक्षमता पर भी बेहद बुरा असर पड़ रहा है।
दो श्रेणियों में बांटा गया है यह दर्द
चिकित्सकों और डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कमर दर्द को मुख्य रूप से दो भागों में समझा जा सकता है:
-
विशिष्ट कमर दर्द (Specific Back Pain): यह दर्द किसी खास मेडिकल वजह से होता है, जैसे रीढ़ की हड्डी में कोई गंभीर बीमारी होना, रीढ़ की हड्डी का टूटना (फ्रैक्चर) या शरीर के किसी दूसरे अंदरूनी अंग की बीमारी का दर्द फैलकर पीठ तक आ जाना।
-
गैर-विशिष्ट कमर दर्द (Non-Specific Back Pain): इस दर्द के पीछे कोई एक विशेष बीमारी नहीं होती, बल्कि यह मुख्य रूप से गलत तरीके से बैठने, घंटों एक ही जगह कंप्यूटर के सामने काम करने और शारीरिक निष्क्रियता के कारण होता है। आज के समय में अधिकांश लोग इसी दूसरे प्रकार के दर्द से सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।
समय रहते अगर लाइफस्टाइल में सुधार न किया गया, तो आने वाले सालों में यह समस्या हर घर में अपनी जगह बना लेगी।
girls globe