Vivah Muhurat 2026: गुरु अस्त और चातुर्मास के कारण शादियों पर लगी रोक; जानें नवंबर-दिसंबर में कब गूंजेगी शहनाई, देखें शुभ मुहूर्त की पूरी लिस्ट

सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में कोई भी मांगलिक कार्य, विशेषकर विवाह संस्कार करने से पहले ग्रहों की स्थिति और शुभ समय (मुहूर्त) का आकलन करना अनिवार्य माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्तमान में शादियों और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से ब्रेक लग चुका है।

देवताओं के गुरु बृहस्पति (Jupiter) का उदित रहना किसी भी मांगलिक कार्य की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जब गुरु ग्रह अस्त होते हैं, तो विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत और नामकरण जैसे संस्कारों के शुभ फल प्राप्त नहीं होते हैं। द्रिक पंचांग (Drik Panchang) के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को शाम 07 बजकर 59 मिनट पर गुरु ग्रह अस्त हो चुके हैं, जो अब 12 अगस्त 2026 को सुबह 05 बजकर 03 मिनट पर दोबारा उदय होंगे।

हालांकि, अगस्त में गुरु के उदय होने के बाद भी शादियों का सीजन तुरंत शुरू नहीं हो पाएगा, क्योंकि इसी दौरान चातुर्मास (Chaturmas) का प्रारंभ होने जा रहा है। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का पौराणिक गणित और साल 2026 के आखिरी महीनों में विवाह के कौन-कौन से शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं:

चातुर्मास में क्यों नहीं होंगी शादियां? (Devshayani Ekadashi Rule)

हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है, जिसका समापन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन होता है।

  • भगवान विष्णु की योगनिद्रा: इस साल 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास प्रारंभ हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसे देवताओं का शयनकाल कहा जाता है।

  • शुभ कार्यों पर रोक क्यों?: देवताओं के शयनकाल में होने के कारण इस अवधि में किए गए किसी भी मांगलिक कार्य को दैवीय आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता, जिससे उनके फल निष्फल हो जाते हैं।

  • साधना का समय: चातुर्मास के इस समय को भौतिक सुखों या उत्सवों के बजाय आध्यात्मिक उन्नति, स्नान-दान, कथा-श्रवण, व्रत, जप और तप साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

20 नवंबर से फिर शुरू होगा शादियों का सीजन (Devutthana Ekadashi)

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।

  • देवताओं का जागरण: इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु चार महीने की लंबी योगनिद्रा से जागृत होंगे और पुनः संसार का कार्यभार संभालेंगे।

  • शहनाइयों की गूंज: चूंकि देवउठनी एकादशी को ‘अबूझ मुहूर्त’ भी माना जाता है, इसलिए 20 नवंबर 2026 से ही देश भर में विवाह और अन्य सभी रुके हुए मांगलिक कार्य पूरी भव्यता के साथ फिर से शुरू हो जाएंगे। यानी शहनाइयों की गूंज सुनने के लिए अब सीधे नवंबर महीने का इंतजार करना होगा।

नवंबर और दिसंबर 2026 के विवाह मुहूर्त की पूरी लिस्ट (Shubh Muhurat Dates)

यदि आप या आपके परिवार में कोई इस साल के अंत में विवाह के बंधन में बंधने की योजना बना रहा है, तो पंचांग के अनुसार नवंबर और दिसंबर 2026 में केवल यही तिथियां विवाह के लिए शुद्ध और शुभ मानी गई हैं:

नवंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त:

नवंबर के महीने में देवउठनी एकादशी के बाद शादियों के लिए केवल 4 शुभ दिन मिल रहे हैं:

  • 21 नवंबर (शनिवार)

  • 24 नवंबर (मंगलवार)

  • 25 नवंबर (बुधवार)

  • 26 नवंबर (गुरुवार)

दिसंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त:

साल के आखिरी महीने दिसंबर में कड़ाके की ठंड के बीच शादियों के लिए कुल 7 शुभ दिन उपलब्ध हैं:

  • 2 दिसंबर (बुधवार)

  • 3 दिसंबर (गुरुवार)

  • 4 दिसंबर (शुक्रवार)

  • 5 दिसंबर (शनिवार)

  • 6 दिसंबर (रविवार)

  • 11 दिसंबर (शुक्रवार)

  • 12 दिसंबर (शनिवार)

ज्योतिषीय सलाह: हालांकि ये तिथियां पंचांग के अनुसार सामान्य रूप से शुद्ध हैं, लेकिन विवाह तय करने से पहले वर और वधू की जन्म कुंडली के आधार पर उनके व्यक्तिगत नक्षत्रों और चंद्रमा की स्थिति का मिलान किसी योग्य ज्योतिषी से अवश्य करवा लेना चाहिए।