Rajya Sabha Numbers 2026: राज्यसभा में भाजपा का ऐतिहासिक गेमचेंजर दांव, बहुमत के बेहद करीब पहुंची एनडीए

संसद के 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे बेहद महत्वपूर्ण मॉनसून सत्र से ठीक पहले देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा का पूरा राजनीतिक समीकरण और अंकगणित पूरी तरह से बदल गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद से पार्टी के भीतर शुरू हुआ आंतरिक असंतोष अब एक बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक भूचाल में तब्दील हो चुका है। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है, जिसका सीधा और बड़ा फायदा केंद्र में सत्तारूढ़ नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) और विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिलता दिखाई दे रहा है।

कोयल मलिक का चौंकाने वाला इस्तीफा: महज 105 दिनों में छोड़ी राज्यसभा की सदस्यता

इस राजनीतिक ड्रामे में सबसे बड़ा और ताजा झटका टीएमसी को तब लगा जब पार्टी की राज्यसभा सांसद और मशहूर अभिनेत्री रुक्मिणी मलिक उर्फ कोयल मलिक ने गुरुवार को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। कोयल मलिक संभवतः देश के संसदीय इतिहास में सबसे कम समय (महज 105 दिन) तक राज्यसभा सदस्य रहने वाली नेता बन गई हैं। वह इसी साल 3 अप्रैल 2026 को उच्च सदन के लिए चुनी गई थीं, लेकिन इस छोटी सी अवधि में उन्होंने एक दिन भी सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। इस्तीफे के तुरंत बाद कोयल मलिक ने दिल्ली में कद्दावर भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से बंद कमरे में मुलाकात की, जिससे राजनीतिक गलियारों में उनके जल्द ही भाजपा का दामन थामने या बागी गुट में शामिल होने की अटकलें चरम पर पहुंच गई हैं।

तृणमूल कांग्रेस में मची बड़ी टूट: 4 सांसदों ने छोड़ी पार्टी, 3 उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार

कोयल मलिक से पहले टीएमसी के तीन और दिग्गज सांसद—सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक भी राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे चुके हैं। ये तीनों बागी नेता गत 9 जुलाई को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। भाजपा ने रणनीतिक रूप से इन तीनों को पश्चिम बंगाल से 24 जुलाई 2026 को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बंगाल विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के मजबूत संख्या बल को देखते हुए इन तीनों ही सीटों पर भाजपा की क्लीन स्वीप और जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है।

राज्यसभा में बीजेपी रचेगी इतिहास: संख्याबल पहुंचेगा 117 के रिकॉर्ड स्तर पर

24 जुलाई को होने वाले उपचुनावों के नतीजों के बाद राज्यसभा में अकेले भारतीय जनता पार्टी (BJP) का संख्याबल बढ़कर 117 होने की पूरी संभावना है, जो पार्टी के पूरे संसदीय इतिहास में अब तक का सबसे उच्चतम स्तर होगा। इस ऐतिहासिक बढ़त के बाद भाजपा उच्च सदन में साधारण बहुमत के जादुई आंकड़े (123) से महज 6 सीट दूर रह जाएगी। यदि सदन में 7 मनोनीत (Nominated) सदस्यों और परिमल नाथवानी, दिलीप रे व कार्तिकेय शर्मा जैसे 3 स्वतंत्र निर्दलीय सांसदों के समर्थन को जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा आसानी से 127 तक पहुंच जाता है, जो अकेले भाजपा गठबंधन को साधारण बहुमत दिला देगा।

दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा एनडीए: विपक्ष की हर चक्रव्यूह होगी नाकाम

सत्तारूढ़ एनडीए की नजरें अब राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को छूने पर हैं ताकि किसी भी महत्वपूर्ण विधायी और संवैधानिक संशोधन एजेंडे पर विपक्ष उन पर भारी न पड़ सके। एनडीए के सहयोगी दलों में टीडीपी, एआईएडीएमके, जदयू और एनसीपी के पास 4-4 सांसद हैं, जबकि शिवसेना और यूपीपीएल के पास 2-2 सदस्य हैं। इसके अलावा आरपीआई(ए), एजीपी, एमएनएफ, एनपीपी, आरएलएम और जनसेना पार्टी के 1-1 सांसदों को मिलाकर सहयोगी दलों का कुल आंकड़ा 26 पहुंच जाता है। इस तरह भाजपा के 127 (संभावित सहयोगियों सहित) और सहयोगियों के 26 सांसदों को मिलाकर एनडीए का कुल आंकड़ा 153 के पार जा रहा है, जो दो-तिहाई बहुमत (164) से सिर्फ 11 सीट दूर है।

लोकसभा में भी ममता बनर्जी अलग-थलग: 20 बागियों ने बनाई नई पार्टी

ममता बनर्जी के लिए संकट सिर्फ राज्यसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकसभा में भी उनकी ताकत आधी से कम रह गई है। सुदीप बंदोपाध्याय और काकली घोष दस्तीदार जैसे टीएमसी के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर ‘एनसीपीआई’ (NCPI) नाम से एक नए धड़े का गठन कर लिया है और केंद्र में एनडीए सरकार को अपना बाहर से बिना शर्त समर्थन सौंप दिया है। इसके चलते लोकसभा में ममता बनर्जी के वफादार सांसदों की संख्या घटकर केवल 8 रह गई है। इस बड़ी टूट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी आलाकमान ने कहा है कि जो लोग केंद्रीय जांच एजेंसियों या पुलिस के डर और दबाव में हैं, वे खुशी-खुशी पार्टी छोड़कर जा सकते हैं, इससे पार्टी कमजोर नहीं होगी।