Uttarakhand Weather Cloudburst Alert: उत्तराखंड के 12 जिलों में आज कुदरत का डबल अटैक, मौसम विभाग का ‘रेड अलर्ट’; बाढ़ के खतरे के बीच स्कूल-आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह बंद

देवभूमि उत्तराखंड में मानसूनी बादलों ने एक बार फिर से रौद्र रूप धारण कर लिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज 20 जुलाई 2026 को राज्य के कई हिस्सों में ‘अत्यंत भारी बारिश’ (Extremely Heavy Rainfall) का हाई-इंटेनसिटी रेड अलर्ट जारी किया है। पहाड़ों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिससे मैदानी और तटीय इलाकों में अचानक बाढ़ (Flash Flood) और निचले इलाकों में गंभीर जलभराव का खतरा पैदा हो गया है। इस आपातकालीन स्थिति को देखते हुए और बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर, जिला प्रशासनों ने बागेश्वर को छोड़कर राज्य के सभी 12 जिलों में कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को आज पूरी तरह से बंद रखने का कड़ा आदेश जारी किया है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो अगले 24 से 48 घंटे उत्तराखंड के लिए बेहद नाजुक होने वाले हैं।

इन 3 बड़े जिलों में ‘रेड अलर्ट’, बाकी जगह भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के ताजा बुलेटिन के अनुसार, बादलों की आवाजाही और कम दबाव का क्षेत्र बनने से आज 20 जुलाई को मुख्य रूप से तीन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है:

  • रेड अलर्ट वाले मुख्य जिले: देहरादून, हरिद्वार और टिहरी गढ़वाल में कुछ स्थानों पर गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ अत्यधिक मूसलाधार बारिश की आशंका जताई गई है।

  • ऑरेंज अलर्ट के दायरे में: नैनीताल, चंपावत, उधम सिंह नगर, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल जैसे संवेदनशील जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी है।

  • येलो अलर्ट की चेतावनी: रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में भी आकाशीय बिजली चमकने और तीव्र बौछारें पड़ने का अनुमान लगाया गया है। 21 जुलाई को भी राज्य में ऑरेंज अलर्ट का प्रभाव बना रहेगा।

यमुनोत्री हाईवे सहित दर्जनों सड़कें मलबे से बंद, चारधाम यात्रा पर असर

लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन (Landslide) और चट्टानें खिसकने की घटनाओं में भारी इजाफा हुआ है। उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-134) ओजरी, स्यालचट्टी और पालीगाड के पास भारी मलबे और पत्थरों के आने के कारण बार-बार बाधित हो रहा है। इसके साथ ही देहरादून में लाखवार बांध झरने के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 507 (NH-507) पर भी मलबा आने से यातायात रुक गया है। राज्यभर में करीब 69 से ज्यादा ग्रामीण और लिंक सड़कें मलबे के कारण पूरी तरह ब्लॉक हैं, जिन्हें खोलने के लिए लोनिवि (PWD) और नेशनल हाईवे अथॉरिटी की पोकलेन व जेसीबी मशीनें 24 घंटे काम कर रही हैं। भूस्खलन के बढ़ते खतरों को देखते हुए चारधाम यात्रियों को बेहद सतर्क रहने को कहा गया है।

नदियों में बढ़ा सिल्ट और जलस्तर, फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी

मौसम विभाग की फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने चेतावनी दी है कि उत्तराखंड के जिन इलाकों में पिछले कुछ दिनों से लगातार पानी बरस रहा है, वहां की मिट्टी पूरी तरह से संतृप्त (गीली) हो चुकी है। ऐसे में अब होने वाली तेज बारिश से पानी जमीन में सोखने के बजाय सीधे नदियों में बहेगा, जिससे अचानक तबाही वाली बाढ़ (सर्फेस रनऑफ) आ सकती है। अलकनंदा, भागीरथी, तवी और चिनाब जैसी प्रमुख नदियों के साथ-साथ स्थानीय गदेरों (नदी-नालों) में पानी का बहाव बेहद तेज हो गया है। इसके अलावा, बांधों और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण मैदानी इलाकों में भी बाढ़ की निगरानी बढ़ा दी गई है। हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सोमवार को होने वाले साप्ताहिक ‘जनसुनवाई’ कार्यक्रम को भी स्थगित कर दिया है ताकि पूरा प्रशासनिक अमला फील्ड में मुस्तैद रह सके।

आपदा प्रबंधन विभाग की गाइडलाइंस: पर्यटक और स्थानीय लोग क्या करें?

राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने सभी जिलाधिकारियों और क्विक रिस्पांस टीमों (QRT) को 24 घंटे एक्टिव मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील और भूस्खलन संभावित रास्तों पर रेस्क्यू टीमों को तैनात कर दिया गया है। प्रशासन ने आम जनता, स्थानीय निवासियों और चारधाम यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों से विशेष अपील की है:

  • अनावश्यक यात्रा से बचें: मौसम और सड़कों की सही स्थिति का अपडेट लिए बिना पहाड़ों की तरफ सफर करने से पूरी तरह परहेज करें।

  • नदियों के किनारे न जाएं: नदियों, झरनों और बरसाती नालों के पास सेल्फी लेने या घूमने बिल्कुल न जाएं, क्योंकि पानी का स्तर अचानक कई फीट बढ़ सकता है।

  • सुरक्षित स्थानों पर लें शरण: भूस्खलन की दृष्टि से अति-संवेदनशील और कच्चे मकानों में रहने वाले लोग तुरंत प्रशासन द्वारा बनाए गए सुरक्षित आश्रय स्थलों में चले जाएं।