US Iran Nuclear Deal 2026: ‘परमाणु डील की कोई जल्दी नहीं…’ ईरान पर और सख्त हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, बोले- समय हमारे साथ है

मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी रणनीति और सख्त रुख को एक बार फिर दुनिया के सामने रख दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बयान में खुलासा किया कि उन्होंने ईरान के साथ पर्दे के पीछे बातचीत कर रहे अमेरिकी अधिकारियों और राजनयिकों को बहुत स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं। ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा है कि तेहरान के साथ किसी भी तरह के शांति समझौते या परमाणु डील को लेकर तनिक भी जल्दबाजी दिखाने की जरूरत नहीं है। अमेरिकी प्रशासन पूरी सावधानी के साथ और पर्याप्त समय लेकर ही इस दिशा में आगे बढ़ेगा, ताकि युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके और अमेरिका के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का धमाका, बराक ओबामा की पुरानी ईरान डील को बताया ‘सबसे घटिया’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक लंबा पोस्ट लिखकर ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत पर देश का स्टैंड पूरी तरह साफ किया। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में दोहराया कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति या दबाव में ईरान को परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) विकसित करने या उन्हें अपने पास रखने की अनुमति नहीं दे सकता। अपने पोस्ट में ट्रंप ने साल 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई ईरान न्यूक्लियर डील (JCPOA) की जमकर धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने ओबामा प्रशासन के उस फैसले को अमेरिकी इतिहास के सबसे खराब और आत्मघाती फैसलों में से एक बताते हुए कहा कि ओबामा ने अपनी ढीली नीतियों की वजह से ईरान को परमाणु बम बनाने की एक तरह से खुली छूट दे दी थी।

ओबामा की ढुलमुल नीति से बिल्कुल अलग है हमारा तरीका, बातचीत में समय हमारे पक्ष में

अपने मौजूदा प्रशासन की पीठ थपथपाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन वर्तमान में ईरान के साथ जिस आक्रामक और व्यवस्थित तरीके से बातचीत की मेज पर बैठा है, वह ओबामा प्रशासन के पुराने ढुलमुल रवैये से पूरी तरह से अलग है। हमारी रणनीति बहुत स्पष्ट है और हम बेहद व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने आत्मविश्वास से भरे लहजे में कहा, ‘मैंने अपने अधिकारियों से साफ कह दिया है कि हमें किसी भी तरह की हड़बड़ाहट दिखाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस पूरे भू-राजनीतिक संकट में समय पूरी तरह से हमारे ही पक्ष में काम कर रहा है।’

होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर अमेरिकी नाकेबंदी मजबूत, झुकने तक जारी रहेगा एक्शन

ईरान को आर्थिक और सैन्य रूप से घेरने की अपनी रणनीति का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाहर तैनात अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि होर्मुज के रणनीतिक समुद्री रास्ते के बाहर अमेरिका द्वारा की गई नाकेबंदी पूरी ताकत के साथ अपना प्रचंड प्रभाव बनाए हुए है। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यह सख्त सैन्य नाकेबंदी तब तक पूरी मजबूती से जारी रहेगी, जब तक कि ईरान पूरी तरह सहमत होकर एक नए और कड़े समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर देता। दोनों पक्षों को अपनी शर्तों को समझने के लिए पूरा समय लेना चाहिए और इस काम को सही तरीके से अंजाम देना चाहिए।

पहले के मुकाबले ईरान से सुधरे कूटनीतिक संबंध, पर परमाणु बम की सोच भी नहीं सकते

एक तरफ जहां ट्रंप ने ईरान की घेराबंदी मजबूत रखने की बात कही, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने एक दिलचस्प दावा भी किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि आज की तारीख में ईरान के साथ हमारे कूटनीतिक संबंध पहले से कहीं अधिक बेहतर और पूरी तरह पेशेवर हो गए हैं। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला को आगाह करते हुए कहा कि ईरानी नेतृत्व को यह बात अच्छी तरह और हमेशा के लिए अपने दिमाग में बिठा लेनी होगी कि वह किसी भी हाल में परमाणु हथियार या एटम बम नहीं बना सकते।

मिडिल ईस्ट के देशों को ट्रंप ने कहा शुक्रिया, अब्राहम अकॉर्ड में ईरान की एंट्री के दिए संकेत

ईरान के साथ चले लंबे संघर्ष के दौरान मध्य-पूर्व के तमाम देशों को हुए आर्थिक और रणनीतिक नुकसान का जिक्र करते हुए ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों का आभार जताया। उन्होंने लिखा, ‘मैं मिडिल ईस्ट के उन सभी प्रगतिशील देशों को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने संकट के इस दौर में हमारा पूरा साथ दिया। अमेरिका के साथ उन्होंने अपने कूटनीतिक सहयोग को इस हद तक बढ़ाया कि वे ऐतिहासिक अब्राहम अकॉर्ड्स (Abraham Accords) का हिस्सा बने।’ अपने पोस्ट के अंत में ट्रंप ने एक और बड़ा सस्पेंस छोड़ते हुए लिखा, ‘आने वाले समय में कौन जानता है, शायद कल के दिन खुद ईरान भी सब कुछ छोड़कर इस ऐतिहासिक शांति समझौते (Abraham Accords) में शामिल हो जाए!’