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UPI MDR पर सरकार का बड़ा रुख साफ: 15 अक्टूबर की डेडलाइन में नहीं होगा बदलाव, पेट्रोल पंपों पर ₹5 चार्ज और आगे के प्लान पर स्थिति की स्पष्ट

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर मचे घमासान और व्यापारियों के विरोध के बीच केंद्र सरकार के आधिकारिक सूत्रों ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नए एमडीआर फ्रेमवर्क को लागू करने की तय तारीख आगे नहीं बढ़ाई जाएगी और यह पहले से निर्धारित तिथि यानी 15 अक्टूबर 2026 से ही प्रभावी होगी। इसके साथ ही पेट्रोलियम पदार्थों (पेट्रोल-डीजल) की खरीद पर लगने वाले एमडीआर चार्ज, आम उपभोक्ताओं पर इसके असर और सरकार के भविष्य के प्लान को लेकर फैले सभी भ्रमों पर पूर्ण विराम लगा दिया गया है।

सरकारी सूत्रों ने उन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि व्यापारियों और पेट्रोल पंप एसोसिएशनों के विरोध के चलते सरकार इसकी मियाद आगे बढ़ा सकती है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से नए एमडीआर नियम अपने पूर्व निर्धारित समय पर ही लागू किए जाएंगे।

सरकार ने यह भी दोहराया है कि इस फैसले से आम जनता और छोटे कारोबारियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। देश में होने वाले लगभग 96 फीसदी यूपीआई मर्चेंट ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये से कम के होते हैं, जो पूरी तरह शून्य-एमडीआर (Zero MDR) के दायरे में रहेंगे। इसके अतिरिक्त, जिन छोटे व्यापारियों का मासिक यूपीआई क्यूआर टर्नओवर 1 लाख रुपये तक है, वे भी इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे।

पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन द्वारा 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर विरोध जताए जाने के बाद सरकार ने पेट्रोलियम सेक्टर के लिए स्थिति साफ की है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ईंधन (Fuel), रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और कृषि इनपुट जैसे अनिवार्य व पतले मार्जिन वाले सेक्टर्स के लिए 0.4% का स्टैंडर्ड चार्ज लागू नहीं होगा।

पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई पेमेंट पर केवल 5 रुपये का फ्लैट एमडीआर चार्ज तय किया गया है। हालांकि, पेट्रोलियम डीलरों (AIPDA) ने फिक्स्ड कमीशन का हवाला देते हुए इसे भी पूरी तरह माफ करने की मांग की है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि वित्तीय सेवा विभाग (DFS) डीलरों के इस प्रतिवेदन की तकनीकी समीक्षा कर रहा है, लेकिन अभी तक पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से 5 रुपये के इस फ्लैट चार्ज को वापस लेने या हटाने का कोई औपचारिक प्रस्ताव शीर्ष स्तर पर नहीं आया है।

सूत्रों ने इस भ्रांति को भी दूर किया कि एमडीआर सरकार द्वारा लगाया गया कोई नया सेस या टैक्स है। एमडीआर पूरी तरह से एक पेमेंट प्रोसेसिंग चार्ज है, जो डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्वर, साइबर सिक्योरिटी और फ्रॉड प्रिवेंशन को बनाए रखने के लिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों के बीच बांटा जाता है।

इस 0.4% शुल्क में से 40% हिस्सा कार्ड/खाता जारी करने वाले बैंक (Issuing Bank) को, 30% मर्चेंट एक्वायरर बैंक को, 20% यूपीआई ऐप/थर्ड पार्टी ऐप को और 10% पेयर पीएसपी बैंक को मिलता है। इस पूरे शुल्क में भारत सरकार की हिस्सेदारी शून्य (0%) है।

  • ग्राहकों से वसूली पर रोक: सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं कि बैंक और मर्चेंट किसी भी सूरत में एमडीआर का चार्ज ग्राहकों की जेब पर नहीं डाल सकते। भारतीय बैंक संघ (IBA) को एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र तैयार करने को कहा गया है ताकि अगर कोई दुकानदार ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क वसूले तो उस पर तुरंत कार्रवाई हो।

  • अफवाहों के खिलाफ अभियान: आईबीए जल्द ही देशव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करेगा ताकि आम जनता और खुदरा व्यापारियों को सही नियमों की जानकारी दी जा सके।

  • जीएसटी काउंसिल में चर्चा: एमडीआर पर लगने वाले 18% जीएसटी के पहलू पर आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक में समीक्षा की जा सकती है, ताकि इसे पूरी तरह से हटाया या तर्कसंगत बनाया जा सके।

  • व्यापारियों से सीधा संवाद: वित्त मंत्रालय जल्द ही प्रमुख ट्रेड और मर्चेंट एसोसिएशन्स के साथ बैठक करेगा ताकि जमीनी स्तर पर किसी भी भ्रम या हड़ताल जैसी स्थिति को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सके।