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UP Rain Alert: मानसून का ‘आखिरी दांव’! यूपी के मेरठ, वाराणसी, लखनऊ समेत 35 से अधिक जिलों में झमाझम बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट; जानिए कब विदा होगा मानसून और कब से खिलेगी चटख धूप, IMD की पूरी रिपोर्ट

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक रवानगी का वक्त करीब आते ही मौसम ने अचानक करवट ले ली है। आमतौर पर सितंबर के दूसरे पखवाड़े में मानसूनी बादल उत्तर भारत से सिमटने लगते हैं, लेकिन इस बार बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) और मध्य भारत से गुजर रही मानसूनी ट्रफ रेखा ने लौटते हुए मानसून को दोबारा ऊर्जावान बना दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के अनुसार, उत्तर प्रदेश के वायुमंडल में पुरवैया और नम हवाओं की जबर्दस्त आमद दर्ज की जा रही है। इसके चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, बागपत, शामली और सहारनपुर से लेकर अवध और पूर्वांचल के वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और गाजीपुर तक 35 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का नया दौर शुरू हो गया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह बारिश का दौर इस मानसूनी सीजन का ‘आखिरी बड़ा स्पेल’ (Last Active Monsoon Spell) है। इस मौसमी बदलाव से जहां पिछले एक हफ्ते से 85 प्रतिशत से अधिक की चिपचिपी उमस से बेहाल लोगों को तेज गर्मी से राहत मिली है और दिन के पारे में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, वहीं कई तराई क्षेत्रों में जलभराव और आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम भी पैदा हो गया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में मानसूनी हवाओं का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और बुलंदशहर में आसमान में काले कपासी बादलों का पहरा है और रुक-रुक कर रिमझिम से मध्यम बारिश दर्ज की जा रही है। वहीं रुहेलखंड और ब्रज क्षेत्र के मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, संभल, अमरोहा, बरेली, बदायूं, अलीगढ़, मथुरा और आगरा में भी ठंडी हवाओं के साथ बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने पश्चिमी यूपी के तराई और दिल्ली-एनसीआर से सटे इलाकों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। यहां 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। इस बारिश ने पश्चिमी यूपी के शहरों की वायु गुणवत्ता (AQI) को ‘अच्छा’ (Good) श्रेणी में ला दिया है, जिससे प्रदूषण से जूझ रहे शहरी निवासियों को ताजी हवा में सांस लेने का मौका मिला है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) और अवध के जिलों में बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं का सीधा असर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी, संगम नगरी प्रयागराज, गोरक्षपीठ की भूमि गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, आजमगढ़, मऊ, बलिया, जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर और सोनभद्र में कई स्थानों पर मेघगर्जन के साथ मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राजधानी लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी और सुल्तानपुर में भी दोपहर और शाम के वक्त घने बादलों की आवाजाही के बीच तेज बौछारों के आसार हैं। मौसम केंद्र लखनऊ के वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में आकाशीय बिजली (Lightning Strike / वज्रपात) को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। वातावरण में अत्यधिक नमी और दोपहर की धूप के संयोजन से ‘कन्वेक्टिव क्लाउड्स’ (Convective Clouds) बहुत तेजी से बन रहे हैं, जो अचानक 15 से 20 मिनट के भीतर बिजली की भीषण गड़गड़ाहट और भारी बारिश पैदा करते हैं।

राज्य के विभिन्न भौगोलिक अंचलों में मानसूनी बादलों की सक्रियता और वर्षा की तीव्रता को इस तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

यूपी का संभाग / क्षेत्र प्रमुख प्रभावित जिले बारिश का पूर्वानुमान एवं तीव्रता मौसम विभाग की चेतावनी / अलर्ट
पश्चिमी उत्तर प्रदेश मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, मुरादाबाद मध्यम से तेज बौछारें, 18 सितंबर तक असर बादलों की गरज और 35 km/h की रफ्तार से तेज हवाएं
एनसीआर एवं ब्रज क्षेत्र नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, बुलंदशहर हल्की से मध्यम बारिश, आंशिक रूप से बादल उमस से राहत, कहीं-कहीं जलभराव की स्थिति
मध्य यूपी (अवध क्षेत्र) लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, अयोध्या, रायबरेली रुक-रुक कर बौछारें, शाम को बादलों का डेरा दिन के तापमान में 3 से 4°C की गिरावट
पूर्वांचल (वाराणसी व गोरखपुर) वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़ मध्यम से भारी बारिश, 20 सितंबर तक सक्रिय येलो अलर्ट, आकाशीय बिजली गिरने का गंभीर जोखिम
दक्षिणी यूपी व बुंदेलखंड प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र, झांसी, ललितपुर, बांदा गरज-चमक के साथ बौछारें, उमस भरा मौसम नदियों और जलस्रोतों के समीप सतर्क रहने की सलाह

उत्तर प्रदेश के लाखों नागरिक, विशेष रूप से नवरात्र और त्योहारी खरीदारी की तैयारी कर रहे व्यापारी और आम जनता यह जानने को उत्सुक हैं कि यह बदरा कब थमेंगे और आसमान कब साफ होगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी (Monsoon Withdrawal) की शुरुआत पश्चिमी राजस्थान के हिस्सों से 19 सितंबर 2026 से होने जा रही है। राजस्थान के बाद मानसूनी हवाएं पूर्व की ओर खिसकते हुए दिल्ली और उत्तर प्रदेश से विदा होना शुरू होंगी।

आईएमडी के चरणबद्ध विदाई कार्यक्रम के अनुसार:

  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राहत: मेरठ, सहारनपुर, नोएडा, गाजियाबाद और मुरादाबाद में बारिश की गतिविधियां 18 सितंबर की शाम से काफी कमजोर पड़ जाएंगी। 19 सितंबर से पश्चिमी जिलों में आसमान साफ होने लगेगा और चटख धूप खिलने लगेगी।

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश में राहत: लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में 20 सितंबर तक छिटपुट बौछारें और बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। 21 सितंबर 2026 से समूचे उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क (Dry Weather) हो जाएगा।

  • तापमान और गुलाबी ठंड: 21 सितंबर के बाद जैसे ही उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएं चलना शुरू होंगी, हवा में नमी (Humidity) का स्तर तेजी से घटेगा। इससे दिन के समय तेज धूप के कारण हल्की गर्मी महसूस होगी, लेकिन रात और तड़के के न्यूनतम तापमान में गिरावट आने लगेगी, जो अक्टूबर के पहले पखवाड़े में उत्तर प्रदेश में हल्की ‘गुलाबी ठंड’ की आहट लेकर आएगी।

मानसून के इस अंतिम चरण की बारिश को लेकर उत्तर प्रदेश के किसान दोहरे असमंजस में हैं। कृषि वैज्ञानिकों और राज्य कृषि विभाग ने किसानों की फसलों की स्थिति के आधार पर विस्तृत परामर्श जारी किया है:

  • धान की पिछेती फसलों के लिए अमृत: जिन किसानों ने बासमती या सामान्य धान की देर से रोपाई की थी और फसल अभी गभोट या दूध भरने की अवस्था में है, उनके लिए यह बारिश मिट्टी में जरूरी नमी बनाए रखने और बालियों के दाने पुष्ट करने के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे किसानों के डीजल और ट्यूबवेल के सिंचाई खर्च की बड़ी बचत होगी।

  • पक चुकी अगैती फसलों के लिए चेतावनी: जिन क्षेत्रों में मक्का, बाजरा, उड़द, मूंग और तिल की फसलें पककर कटने के लिए तैयार हैं, वहां किसान तुरंत कटाई रोक दें। यदि फसल खलिहान या खेत में कटी पड़ी है, तो उसे तिरपाल या प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढककर ऊंचे स्थानों पर पहुंचाएं, अन्यथा पानी लगने से दानों में चमक कम होने और अंकुरण (Sprouting) का खतरा हो सकता है।

  • सब्जी उत्पादकों के लिए जल-निकासी: गोभी, मिर्च, टमाटर और अगेती तोरिया/सरसों की बुवाई कर रहे किसान खेतों में पानी ठहरने न दें। खेतों की मेड़ काटकर जल-निकासी के तुरंत प्रबंध करें, क्योंकि अत्यधिक नमी से नर्सरी में गलन (Damping off) रोग लग सकता है।

  • आकाशीय बिजली से सुरक्षा: आपदा प्रबंधन विभाग ने किसानों से अपील की है कि बारिश या बादलों की गड़गड़ाहट के समय खेतों में लोहे के खुरपे, हंसिया या ट्रैक्टर लेकर खुले में न घूमें। किसी भी सूरत में अकेले ऊंचे शीशम, बरगद या नीम के पेड़ के नीचे खड़े न हों। अपने मोबाइल में भारत सरकार का ‘दामिनी’ (Damini) ऐप रखें और मौसम बिगड़ने पर तुरंत पक्के मकान में शरण लें।

उत्तर प्रदेश में मानसून का यह आखिरी दांव जाते-जाते प्रकृति को हरा-भरा करने और भूजल स्तर को रिचार्ज करने का काम कर रहा है। अगले 48 से 72 घंटों की इस मानसूनी बारिश के बाद प्रदेश वासियों को न केवल जलभराव और उमस से निजात मिलेगी, बल्कि 21 सितंबर से प्रदेश भर में खिली हुई धूप और साफ नीले आसमान का स्वागत करने का मौका मिलेगा।