
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने पावर कॉर्पोरेशन की मनमानी और लचर कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयोग अब उन उपभोक्ताओं को हर्जाना दिलाने की तैयारी में है, जिन्हें शिकायत के बावजूद समय पर बिजली संबंधी समस्याओं से निजात नहीं मिलती। तय समय सीमा में काम न होने पर अब पावर कॉर्पोरेशन की जेब ढीली होगी और इसका सीधा लाभ जनता को मिलेगा।
क्यों लगने जा रहा है करोड़ों का जुर्माना?
दरअसल, पावर कॉर्पोरेशन ने ‘स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस’ (SOP) के तहत उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सेवाओं की रिपोर्ट नियामक आयोग को सौंपने में बड़ी लापरवाही बरती है। नियमों के मुताबिक, बिजली कटौती, नया कनेक्शन, मीटर खराब होना या वोल्टेज जैसी शिकायतों का समाधान एक निश्चित समय सीमा में करना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं होता, तो विभाग को उपभोक्ता को मुआवजा देना पड़ता है। कॉर्पोरेशन ने पिछले लंबे समय से इसकी विस्तृत रिपोर्ट आयोग को नहीं दी है, जिसे आयोग ने ‘अवमानना’ के तौर पर लिया है।
उपभोक्ताओं को घर बैठे मिलेगा हर्जाना
नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने साफ कर दिया है कि अब ऑटोमैटिक कंपनसेशन (स्वचालित मुआवजा) प्रणाली पर जोर दिया जाएगा। यदि किसी उपभोक्ता की बिजली निर्धारित घंटों से ज्यादा कटी रहती है या ट्रांसफार्मर समय पर नहीं बदला जाता, तो उपभोक्ता के खाते में जुर्माने की राशि क्रेडिट की जाएगी। आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन को फटकार लगाते हुए पूछा है कि जब उपभोक्ताओं की शिकायतों का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध है, तो मुआवजे की रिपोर्ट देने में देरी क्यों की जा रही है?
पावर कॉर्पोरेशन की दलीलों से असंतुष्ट दिखा आयोग
सुनवाई के दौरान पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने तर्क दिया कि वे डेटा संकलित कर रहे हैं और जल्द ही इसे पेश करेंगे। हालांकि, नियामक आयोग ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने संकेत दिए हैं कि यदि अगली सुनवाई तक संतोषजनक रिपोर्ट और मुआवजे का ब्योरा नहीं दिया गया, तो विद्युत अधिनियम की धारा-142 के तहत कॉर्पोरेशन पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
इन सेवाओं में देरी पर मिलेगी राहत
आयोग की इस सख्ती के बाद अब नया बिजली कनेक्शन लेने, खराब मीटर बदलवाने, बिल की विसंगतियों को दूर करने और लोड बढ़ाने जैसे कामों में तेजी आने की उम्मीद है। अब तक बिजली विभाग के चक्कर लगाने वाले उपभोक्ताओं के पास अब मुआवजे का कानूनी अधिकार होगा। जानकारों का मानना है कि इस कदम से उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में जवाबदेही तय होगी और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।
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