
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) की महिला जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल के साथ उनके ही घर में घुसकर हुई मारपीट के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री व सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने इस मुद्दे पर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को बुरी तरह घेरा है।
बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों ने सपा के मुख्य राजनीतिक नारे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को आड़े हाथों लेते हुए इसे महिलाओं के उत्पीड़न का मॉडल बताया है।
पंकज चौधरी का हमला: “सपा का PDA यानी पीड़ा, दमन और अपमान”
उत्तर प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने समाजवादी पार्टी के ‘चाल, चरित्र और चेहरे’ पर सवाल उठाते हुए तीखा तंज कसा है:
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खोखली बातें और हकीकत: पंकज चौधरी ने कहा, “जिस पार्टी के मंचों से महिला सम्मान, सामाजिक न्याय और अधिकारों की लंबी-लंबी बातें होती हैं, उसी पार्टी की एक महिला पदाधिकारी के साथ उनके ही घर में मारपीट की गई। यह दर्शाता है कि सपा में बातें महज खोखली हैं। मंच पर महिला सम्मान और हकीकत में यह व्यवहार… वाह री राजनीति!”
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पोस्टरों तक सीमित मॉडल: उन्होंने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि सपा में ‘बातों के बताशे’ कुछ ज्यादा ही फोड़े जाते हैं। अब इनके PDA का नया संस्करण सामने आया है, जिसका असली मतलब है— ‘पीड़ा, दमन और अपमान।’ सपाइयों के महिला सम्मान का मॉडल सिर्फ पोस्टरों तक सीमित है और प्रदेश की महिलाएं इनके इस रवैये से भली-भांति परिचित हैं।
ओम प्रकाश राजभर का तंज: सपा में गैर-यादव पिछड़ा और दलित सुरक्षित नहीं
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सीधे सपा प्रमुख अखिलेश यादव को टैग करते हुए बेहद आक्रामक पोस्ट लिखी।
ओम प्रकाश राजभर ने ‘X’ पर लिखा: “अरे भाई @yadavakhilesh जी, अभी पिछड़ा वर्ग की सपा महिला विधायक से मारपीट पर आपकी चुप्पी बरकरार ही थी कि अब चंदौली में आपकी पार्टी की महिला जिलाध्यक्ष गार्गी सिंह पटेल को घर में घुसकर बाल पकड़कर घसीटा गया…आप ही के स्वजातीय सपाई गुंडों द्वारा लात-घूसों से पीटा गया… टेबल उठाकर सिर पर…”
राजभर के आरोपों के मुख्य बिंदु:
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यादववादी राजनीति का आरोप: राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह से “यादववादी राजनीति” कर रही है। पार्टी के अंदर गैर-यादव पिछड़ों (जैसे कुर्मी और प्रजापति समाज) और दलितों की लगातार अनदेखी की जा रही है और वे इस पार्टी में सुरक्षित नहीं हैं।
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महाभारत के ‘द्रौपदी चीरहरण’ से तुलना: चंदौली की घटना और नेतृत्व की चुप्पी पर निशाना साधते हुए राजभर ने सपा शीर्ष नेतृत्व की तुलना महाभारत के उन “मौन दर्शकों” से की जो द्रौपदी चीरहरण के समय चुपचाप बैठे थे। उन्होंने साफ कहा कि जो पार्टी अपनी ही महिला पदाधिकारियों और महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर सकती, उसे सामाजिक न्याय की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
राजनीतिक घमासान (At a Glance)
सपा की प्रतिक्रिया: चंदौली में अपनी ही पार्टी के नेताओं द्वारा महिला जिलाध्यक्ष के साथ की गई इस कथित बदसलूकी और विपक्षी दलों के इन गंभीर आरोपों पर फिलहाल समाजवादी पार्टी (SP) की ओर से कोई आधिकारिक या औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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