लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। पावर कॉर्पोरेशन ने बिजली बिलों के बोझ तले दबे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए सिक्योरिटी मनी (Security Money) जमा करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब उपभोक्ताओं को भारी-भरकम सिक्योरिटी राशि एकमुश्त जमा करने की जरूरत नहीं होगी। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के निर्देश पर कॉर्पोरेशन ने इसे चार आसान किस्तों में जमा करने की सुविधा प्रदान कर दी है।
मध्यम वर्गीय परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ
बिजली विभाग के इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ उन उपभोक्ताओं को मिलेगा जिनका लोड हाल ही में बढ़ा है या जिनके यहाँ नए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। अक्सर लोड बढ़ने पर विभाग द्वारा अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी की डिमांड की जाती है, जो कई बार हजारों में होती है। एक साथ इतनी बड़ी रकम चुकाना आम आदमी के लिए मुश्किल होता था। अब विभाग इस राशि को उपभोक्ता के अगले चार महीनों के बिल में जोड़कर किस्तों में वसूलेगा।
स्मार्ट मीटर और पोस्टपेड उपभोक्ताओं के लिए विशेष प्रावधान
पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंधन निदेशक के अनुसार, यह सुविधा मुख्य रूप से उन पोस्टपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए है, जिनकी सिक्योरिटी राशि उनके वर्तमान लोड के मुकाबले कम है। नए नियमों के तहत, जैसे ही सिस्टम लोड और सिक्योरिटी का अंतर पकड़ेगा, वह खुद-ब-खुद उसे चार किस्तों में विभाजित कर देगा। इसके लिए उपभोक्ताओं को किसी दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बिलिंग सिस्टम में किया गया बड़ा बदलाव
इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए बिलिंग सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव कर दिए गए हैं। अब जब उपभोक्ता का मासिक बिल जेनरेट होगा, तो उसमें ‘किस्त’ (Installment) का एक अलग कॉलम दिखाई देगा। यदि कोई उपभोक्ता चाहता है कि वह एक बार में ही पूरी राशि जमा कर दे, तो उसके पास ऑनलाइन पोर्टल या काउंटर पर यह विकल्प भी मौजूद रहेगा। हालांकि, किस्तों की सुविधा से डिफॉल्टर होने की संभावना कम होगी और राजस्व वसूली में सुधार होगा।
देरी पर नहीं लगेगा कोई अतिरिक्त ब्याज
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उपभोक्ता इन चार किस्तों को समय पर चुकाता है, तो उस पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त ब्याज या पेनाल्टी नहीं लगाई जाएगी। लेकिन, यदि चार महीने बाद भी सिक्योरिटी राशि बकाया रहती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। पावर कॉर्पोरेशन का यह कदम बिजली चोरी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास माना जा रहा है।
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