
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय गति से विकास किया है। राज्य की आर्थिक तस्वीर में आए बड़े बदलाव ने उसे देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
13.30 लाख करोड़ से बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंची GSDP
आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें तो योगी सरकार के कार्यकाल से पहले उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी लगभग 13.30 लाख करोड़ रुपये थी। वर्तमान में यह बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह वृद्धि राज्य में औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे के विस्तार और विभिन्न विकास परियोजनाओं के प्रभाव को दर्शाती है।
प्रति व्यक्ति आय में भी दर्ज हुई बड़ी छलांग
राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम नागरिकों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। पहले जहां प्रति व्यक्ति आय 54,564 रुपये के आसपास थी, वहीं अब यह बढ़कर 1,09,844 रुपये तक पहुंच गई है। यानी कुछ वर्षों में प्रति व्यक्ति आय लगभग दोगुनी हो गई है, जो प्रदेश की आर्थिक मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ी उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी
उत्तर प्रदेश का योगदान अब देश की कुल अर्थव्यवस्था में भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ है। पहले राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में राज्य की हिस्सेदारी 8.6 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश, रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।
ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी लक्ष्य की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश
राज्य सरकार उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। आर्थिक संकेतकों में लगातार हो रही बढ़ोतरी इस दिशा में सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। सरकार का दावा है कि निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के प्रयासों का असर अब आर्थिक आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है।
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी न केवल राज्य के विकास की कहानी बयां करती है, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में उसकी बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।
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