
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9वीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण (Advance Registration) तथा कक्षा 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण आधिकारिक निर्देश जारी किया है। यूपी बोर्ड ने प्रदेश के सभी राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया है कि वे बोर्ड रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर विवरण दर्ज करने से पहले प्रत्येक छात्र की ‘अपार आईडी’ (APAAR ID) तैयार कराने का काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत केंद्र सरकार के ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ (One Nation, One Student ID) विजन को धरातल पर उतारने के लिए यूपी बोर्ड ने सभी स्कूलों से 100 प्रतिशत विद्यार्थियों की डिजिटल आईडी एंट्री सुनिश्चित करने को कहा है।
अपार का पूरा नाम ‘ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री’ (Automated Permanent Academic Account Registry) है। यह देश भर के स्कूली छात्रों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए जारी की जाने वाली 12 अंकों की एक विशिष्ट और स्थायी डिजिटल पहचान संख्या है। जिस तरह प्रत्येक नागरिक की पहचान के लिए आधार कार्ड जरूरी है, उसी तरह विद्यार्थी जीवन के लिए अपार आईडी एक ‘डिजिटल एकेडमिक पासपोर्ट’ के रूप में काम करती है। यह 12 अंकों का यूनिक कोड छात्र के पूरे शैक्षणिक सफर—नर्सरी, प्राथमिक, माध्यमिक, 10वीं-12वीं बोर्ड रिजल्ट, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, स्किल सर्टिफिकेट, खेलकूद और अन्य पाठ्येतर उपलब्धियों को एक सिंगल क्लाउड नेटवर्क पर सुरक्षित रखता है। यदि कोई छात्र स्कूल, बोर्ड या राज्य बदलता है, तब भी यह आईडी नहीं बदलती और नया संस्थान पुराने रिकॉर्ड्स को तुरंत ऑनलाइन वेरीफाई कर लेता है।
यूपी बोर्ड के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, स्कूलों को बोर्ड परीक्षा और अग्रिम पंजीकरण से पहले दो सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कार्य पूरे करने होंगे:
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माता-पिता से सहमति पत्र (Parental Consent Form) का संग्रह: चूंकि कक्षा 9वीं से 12वीं तक के अधिकांश छात्र नाबालिग (18 वर्ष से कम) होते हैं, इसलिए डेटा प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा नियमों के तहत किसी भी छात्र का डेटा साझा करने से पहले माता-पिता या कानूनी अभिभावक की लिखित व डिजिटल सहमति अनिवार्य है। स्कूलों को ऑफलाइन प्रारूप में पैरेंट्स से हस्ताक्षरित कंसेंट फॉर्म भरकर अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखना होगा।
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UDISE+ पोर्टल पर शत-प्रतिशत डेटा मिलान: स्कूल प्रशासन और नोडल शिक्षकों को भारत सरकार के यूडाइज प्लस (UDISE+) पोर्टल पर लॉगिन करके छात्रों के आधार कार्ड में दर्ज नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और लिंग का स्कूल रजिस्टर से 100% अक्षरशः मिलान करना होगा। यदि आधार और स्कूल रिकॉर्ड में कोई विसंगति है, तो उसे पहले सुधारा जाएगा, जिसके बाद ही यूडाइज पोर्टल से छात्र का पेन (Permanent Education Number – PEN) और अपार आईडी जनरेट होगी।
अपार आईडी लागू होने से अभिभावकों और छात्रों के लिए प्रक्रिया में कुछ अहम बदलाव आए हैं:
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आधार से एक्टिव मोबाइल नंबर का लिंक होना: अपार आईडी जनरेशन के दौरान छात्र अथवा अभिभावक के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर वन टाइम पासवर्ड (OTP) भेजा जाता है। जिन छात्रों के आधार में पुराना या बंद मोबाइल नंबर दर्ज है, उनके अभिभावकों को तुरंत नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर जाकर चालू मोबाइल नंबर अपडेट कराना होगा।
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दस्तावेजों में स्पेलिंग की एकरूपता: कई बार छात्र के आधार कार्ड में नाम या जन्मतिथि स्कूल की टीसी (Transfer Certificate) और एडमिशन फॉर्म से अलग होती है। नए नियमों के बाद माता-पिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि दोनों दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग पूरी तरह समान हो, अन्यथा ओटीपी वेरिफिकेशन फेल हो जाएगा।
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शारीरिक दस्तावेजों की झंझट से मुक्ति: अभिभावकों को अब अपने बच्चों की पुरानी मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट और कैरेक्टर सर्टिफिकेट की दर्जनों फोटोकॉपी कराने या उन्हें खोने के डर से छुटकारा मिलेगा, क्योंकि सभी प्रमाणित दस्तावेज डिजिलॉकर के माध्यम से अपार आईडी से स्वतः जुड़ जाएंगे।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। बोर्ड सचिव और शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यदि किसी तकनीकी कारण, आधार अपडेशन में देरी या नेटवर्क समस्या की वजह से किसी छात्र की अपार आईडी अभी तक नहीं बन पाई है, तो उसका 9वीं-11वीं का अग्रिम पंजीकरण या 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा का आवेदन फॉर्म किसी भी स्थिति में नहीं रोका जाएगा। अपार आईडी की एंट्री फिलहाल वैकल्पिक स्तर पर प्राथमिकता के साथ मांगी गई है। हालांकि, बोर्ड ने स्कूलों को सख्त हिदायत दी है कि वे अंतिम तिथि तक अधिकतम छात्रों की अपार आईडी बनवाकर बोर्ड डेटाबेस में फीड करने का प्रयास करें ताकि भविष्य में किसी छात्र को असुविधा न हो।
छात्र अपनी अपार आईडी दो माध्यमों से जनरेट कर सकते हैं: स्कूल के सहयोग से अथवा सीधे डिजिलॉकर पोर्टल के जरिए।
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स्कूल के माध्यम से: अभिभावक स्कूल से प्राप्त सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर अपने आधार की प्रति के साथ क्लास टीचर को जमा करेंगे। स्कूल के नोडल शिक्षक यूडाइज प्लस (UDISE+) पोर्टल के ‘स्टूडेंट मॉड्यूल’ में लॉगिन कर छात्र का विवरण सत्यापित करेंगे और आधार ऑथेंटिकेशन के बाद अपार आईडी तैयार कर छात्र को 12 अंकों का नंबर या प्रिंटेड कार्ड प्रदान करेंगे।
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DigiLocker / ABC पोर्टल के माध्यम से: छात्र या अभिभावक सीधे डिजिलॉकर (DigiLocker) ऐप या आधिकारिक वेबसाइट (digilocker.gov.in) पर जाएं। ‘सर्च डॉक्यूमेंट्स’ में जाकर ‘APAAR’ खोजें और छात्र का नाम, जन्मतिथि, स्कूल का यूडाइज कोड और आधार नंबर दर्ज करें। आधार से जुड़े मोबाइल पर आए ओटीपी को दर्ज करते ही 12 अंकों की अपार आईडी जनरेट होकर डिजिलॉकर के ‘इश्यूड डॉक्यूमेंट्स’ (Issued Documents) सेक्शन में सुरक्षित हो जाएगी। इसके बाद इस 12 अंकों के नंबर को अपने स्कूल में दर्ज कराएं।
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डिजिटल मार्कशीट और सर्टिफिकेट्स का सुरक्षित संग्रह: 10वीं और 12वीं के बोर्ड परिणाम, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे डिजिलॉकर में डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित फॉर्मेट में उपलब्ध होंगे।
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कॉलेज एडमिशन में पेपरलेस वेरिफिकेशन: 12वीं पास करने के बाद सीयूईटी (CUET), नीट (NEET), जेईई (JEE) अथवा विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रवेश के समय फिजिकल डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी।
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छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ: उत्तर प्रदेश सरकार की दशमोत्तर छात्रवृत्ति, प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप और मेधावी छात्र प्रोत्साहन योजनाओं में अपार आईडी लिंक होने से अपात्र या फर्जी आवेदनों पर रोक लगेगी और असली लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) से पैसा तेजी से ट्रांसफर होगा।
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क्रेडिट ट्रांसफर और नई शिक्षा नीति के लाभ: उच्च शिक्षा में लागू होने वाले एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) के साथ अपार आईडी का एकीकरण होने से छात्रों को एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर लेने पर अपने क्रेडिट्स ट्रांसफर करने में आसानी होगी।
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फर्जी डिग्री और जाली प्रमाण पत्रों पर स्थायी रोक: सभी शैक्षणिक दस्तावेज एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस पर ब्लॉकचेन व डिजिटल सुरक्षा के साथ सुरक्षित होने से देश भर में फर्जी मार्कशीट और शैक्षणिक जालसाजी पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
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