नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार में एक और बड़ा भूचाल आया है। OPEC के तीसरे सबसे बड़े उत्पादक देश संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने 1 मई 2026 से OPEC और OPEC+ दोनों से बाहर होने का ऐलान कर दिया है। इस खबर से तेल उत्पादक देशों के गठबंधन को जोरदार झटका लगा है। उधर अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड $111 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है जो युद्ध से पहले की कीमत से 50 प्रतिशत से भी अधिक है।
लगातार सातवें दिन बढ़े कच्चे तेल के दाम
मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतें करीब 3 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुईं। जून के लिए ब्रेंट फ्यूचर्स 2.8 प्रतिशत बढ़कर 111.26 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ जो लगातार सातवें दिन बढ़त का संकेत है। अमेरिकी WTI क्रूड 3.7 प्रतिशत उछलकर 99.93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया और सत्र के दौरान 13 अप्रैल के बाद पहली बार 100 डॉलर से ऊपर भी गया।
UAE के बाहर होने से सऊदी अरब को बड़ा झटका
OPEC+ में UAE चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है और कुल सप्लाई में इसकी 12 प्रतिशत हिस्सेदारी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि UAE जल्द ही हर दिन 10 से 15 लाख बैरल उत्पादन बढ़ा सकता है। लेकिन अगेन कैपिटल के जॉन किल्डफ का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद होने की वजह से UAE की इस अतिरिक्त सप्लाई के निकलने का कोई रास्ता नहीं है, इसलिए तेल की कीमतें ऊपर जाती रहेंगी।
होर्मुज बंद— दुनिया के 20% तेल का रास्ता रुका
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग फ्लो बंद कर दिया है जिससे दुनियाभर की तेल और LNG सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो रहा है। युद्ध से पहले रोजाना 125 से 140 जहाज इस जलमार्ग से गुजरते थे। वोर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में कम से कम सात दिनों से रुके टैंकरों पर रखे कच्चे तेल की मात्रा 24 अप्रैल तक बढ़कर 153.11 मिलियन बैरल हो गई जो 17 अप्रैल से 25 प्रतिशत अधिक है।
विश्व बैंक की चेतावनी— 2026 में ऊर्जा कीमतें 24% बढ़ सकती हैं
विश्व बैंक ने मंगलवार को चेतावनी दी कि अगर मई तक पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधाएं कम नहीं हुईं तो 2026 में वैश्विक ऊर्जा कीमतें 24 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं जो रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद का सर्वोच्च स्तर होगा। इस बीच यूक्रेन के ड्रोन हमले से रूस की तुआप्से रिफाइनरी में भी बड़ी आग लग गई है जिससे वैश्विक आपूर्ति पर और दबाव बढ़ा है।
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