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Twisha Sharma Death Case: कोर्ट ने खारिज की दोबारा पोस्टमार्टम की मांग, पर शव को लेकर रखी यह बेहद सख्त शर्त

Twisha Sharma Death Case: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। भोपाल जिला कोर्ट ने मृतका के पीड़ित परिवार द्वारा दायर की गई दोबारा पोस्टमार्टम कराने की याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यानी अब कानूनी तौर पर ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम नहीं किया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने परिवार को राहत देते हुए उनकी बॉडी को मध्य प्रदेश में ही किसी सुरक्षित स्थान पर रखने की इजाजत दे दी है।

अदालत ने इसके लिए एक बेहद कठिन और विशिष्ट शर्त रखी है कि ट्विशा के शव को जहां भी स्टोर किया जाएगा, वहां का तापमान अनिवार्य रूप से -80 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि मृतका के शव को किसी भी स्थिति में मध्य प्रदेश की भौगोलिक सीमा से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

कटारा हिल्स की घटना: हत्या और आत्महत्या के दावों में उलझी गुत्थी

यह पूरा मामला भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स क्षेत्र का है, जहां बीती 12 मई की रात को ट्विशा शर्मा का शव उनके ही घर के भीतर संदिग्ध हालत में मिला था। इस घटना के बाद से ही मृतका के मायके वाले लगातार इसे सोची-समझी हत्या करार दे रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ ससुराल पक्ष का शुरुआत से ही दावा है कि यह पूरी तरह आत्महत्या का मामला है। पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की कड़ाई से जांच कर रही है और सभी संभावित कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

जांच के दौरान पुलिस के हाथ कुछ बेहद संवेदनशील व्हाट्सऐप चैट्स (WhatsApp Chats) लगे हैं, जिनमें ट्विशा शर्मा ने मौत से पहले अपने परिवार को कई बार यह बयां किया था कि ससुराल वाले उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से बुरी तरह प्रताड़ित कर रहे हैं। इसी चैट को मुख्य आधार बनाते हुए परिवार ने निष्पक्षता के लिए दोबारा पोस्टमार्टम की गुहार कोर्ट से लगाई थी।

राष्ट्रीय महिला आयोग सख्त, मुख्य सचिव और डीजीपी से मांगी रिपोर्ट

इस बीच मामले की गंभीरता और सोशल मीडिया पर उठ रही निष्पक्ष न्याय की मांग को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। महिला आयोग ने इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन और डीजीपी कैलाश मकवाना को एक बेहद सख्त पत्र भेजा है। आयोग ने साफ तौर पर निर्देश दिए हैं कि इस मामले की जांच पूरी तरह से निष्पक्ष, त्वरित और समयबद्ध तरीके से की जाए।

आयोग ने पुलिस और प्रशासन को केवल 7 दिनों का समय देते हुए विस्तृत ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) सौंपने को कहा है। इस रिपोर्ट में आयोग ने अब तक एफआईआर (FIR) में जोड़ी गई धाराओं, आरोपी पति समर्थ की गिरफ्तारी के प्रयासों, उसका पासपोर्ट इंपाउंड (जब्त) करने की स्थिति, घटना स्थल के आस-पास के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स और फॉरेंसिक लैब से मिले साक्ष्यों की पूरी प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही, आयोग ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित परिवार को किसी भी प्रकार की बाहरी धमकी या प्रशासनिक दबाव से पूरी सुरक्षा दी जाए।

ससुर-सास की मुश्किलें बढ़ीं, संवैधानिक पद से हटाने की मांग

ट्विशा के इंसाफ की इस लड़ाई में उनके परिवार ने एक और बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। परिजनों ने मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल को एक आधिकारिक पत्र लिखकर ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को उनके वर्तमान संवैधानिक पद से तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है। परिजनों का तर्क है कि चूंकि गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु (Dowry Death) जैसी अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज हो चुका है, ऐसे में उनका किसी भी गरिमापूर्ण संवैधानिक पद पर बने रहना न्याय प्रणाली और सुचिता के सिद्धांतों के बिल्कुल खिलाफ है।

आपको बता दें कि वर्तमान में गिरिबाला सिंह भोपाल डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम (जिला उपभोक्ता आयोग) की बेंच-2 की अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।

जज रह चुकी हैं सास, पति समर्थ सिंह अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर

राज्यपाल को भेजे गए पत्र में परिवार ने स्पष्ट रूप से नियमों का हवाला देते हुए उल्लेख किया है कि यदि किसी प्रशासनिक या न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ गंभीर कदाचार या संगीन आपराधिक आरोप लगते हैं, तो उन्हें पद से हटाने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद है। गौरतलब है कि आरोपी सास गिरिबाला सिंह कानूनी मामलों की बड़ी जानकार हैं और वे भोपाल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Principal District and Sessions Judge) के बड़े पद पर भी सेवाएं दे चुकी हैं। इसी पद से रिटायर होने के बाद उन्हें उपभोक्ता आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इस पूरे मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया है, लेकिन घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह लगातार फरार चल रहा है। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में दबिश दे रही हैं, वहीं पीड़ित परिवार लगातार मामले की निष्पक्ष और बिना किसी वीआईपी दबाव के जांच की मांग पर अड़ा हुआ है।