
Jeetendra Mishra Profile: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आखिरकार अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO मिल गया है। भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया है। सैन्य सेवा में करीब चार दशक का अनुभव रखने वाले जितेंद्र मिश्र ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाल चुके हैं। अब उनके सामने अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासन, वित्तीय व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और कई अहम व्यवस्थाओं को पेशेवर तरीके से संचालित करने की जिम्मेदारी होगी।
5500 से ज्यादा आवेदनों के बाद हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। रिपोर्टों के अनुसार चयन प्रक्रिया के दौरान 5500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने आवेदनों की छंटनी और उम्मीदवारों के अनुभव का आकलन करने के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया था। इसके बाद ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्र के नाम पर मुहर लगाई।
CEO की नियुक्ति को मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक दायरे के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राम मंदिर में लगातार बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में रोजाना के संचालन, व्यवस्थाओं के समन्वय, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं से जुड़े मामलों के लिए एक पूर्णकालिक पेशेवर अधिकारी की जरूरत महसूस की जा रही थी।
1986 में फाइटर पायलट के तौर पर शुरू किया था सफर
जितेंद्र मिश्र का भारतीय वायुसेना में लंबा और शानदार करियर रहा है। वह 6 दिसंबर 1986 को फाइटर पायलट के रूप में वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए थे। अपने करियर के दौरान उन्होंने 3000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव हासिल किया। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
उनकी पेशेवर विशेषज्ञता केवल ऑपरेशनल उड़ानों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, नेशनल डिफेंस अकादमी समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण और शिक्षा हासिल की। इसके अलावा वह अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से भी जुड़े रहे हैं।
कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्र का नाम भारतीय वायुसेना के कई महत्वपूर्ण अभियानों और जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। कारगिल युद्ध के दौरान वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने Mirage-2000 लड़ाकू विमानों में लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इसके बाद उनके करियर में कई अहम कमांड और स्टाफ जिम्मेदारियां आईं। वह फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, दो फ्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट यानी ASTE के कमांडेंट जैसे पदों पर रहे। उन्होंने डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशंस) की जिम्मेदारी भी संभाली।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न एयर कमांड की कमान
जितेंद्र मिश्र की हालिया सैन्य पहचान सबसे ज्यादा ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी है। उन्होंने जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 तक भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसी दौरान मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के समय पश्चिमी मोर्चे पर वायुसेना की महत्वपूर्ण कमान उनके पास थी।
ऑपरेशन के बाद उन्होंने मिशन से जुड़े कई पहलुओं पर बात भी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने S-400 सिस्टम के जरिए पाकिस्तानी AWACS को करीब 314 किलोमीटर की दूरी से निशाना बनाए जाने की मंजूरी से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया था। ऑपरेशन में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) भी मिल चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ भी दिखे थे जितेंद्र मिश्र
ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पंजाब के आदमपुर एयरबेस पहुंचे थे, तब एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र उनके साथ नजर आए थे। उस समय वह वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख की भूमिका में थे। उनके सैन्य अनुभव और ऑपरेशनल नेतृत्व की वजह से वह वायुसेना के महत्वपूर्ण अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं।
देवरिया से निकलकर वायुसेना के शीर्ष पद तक पहुंचे
जितेंद्र मिश्र उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उनका पैतृक संबंध जिले के भाटपार रानी क्षेत्र के भोपतपुरा गांव से बताया जाता है। सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने भारतीय वायुसेना में लंबा सफर तय किया और शीर्ष ऑपरेशनल कमांड तक पहुंचे।
वायुसेना में उनका अनुभव अब अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सैन्य सेवा के दौरान बड़े ऑपरेशनों की योजना, टीम मैनेजमेंट, सुरक्षा, संसाधनों के प्रबंधन और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय का जो अनुभव उन्होंने हासिल किया, उसका इस्तेमाल अब मंदिर प्रशासन को व्यवस्थित करने में किया जा सकता है।
अब राम मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था संभालेंगे
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के रूप में जितेंद्र मिश्र के सामने जिम्मेदारियों का दायरा काफी बड़ा होगा। उन्हें मंदिर के दैनिक प्रशासन के साथ वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के समन्वय, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और कानूनी मामलों से जुड़े कामों की निगरानी करनी होगी। ट्रस्ट के अधीन रहते हुए CEO मंदिर की प्रशासनिक मशीनरी के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तार हुआ है। ऐसे में ट्रस्ट को उम्मीद है कि सैन्य प्रशासन और ऑपरेशनल प्लानिंग का लंबा अनुभव मंदिर के रोजमर्रा के प्रबंधन में उपयोगी होगा। खासतौर पर श्रद्धालुओं की सुविधा, व्यवस्था में पारदर्शिता और बड़े आयोजनों के प्रबंधन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है।
सैन्य अनुशासन से राम मंदिर प्रशासन तक नया सफर
करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब जितेंद्र मिश्र का नया कार्यक्षेत्र पूरी तरह अलग है, लेकिन जिम्मेदारी उतनी ही बड़ी है। एक तरफ उन्होंने लड़ाकू विमानों से जुड़े बेहद संवेदनशील ऑपरेशनल मिशनों का नेतृत्व किया, तो दूसरी तरफ अब उन्हें करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े राम मंदिर के प्रशासन को संभालना होगा।
इस नियुक्ति के साथ राम मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार एक पूर्णकालिक CEO की व्यवस्था बनाई है। लिहाजा आने वाले समय में मंदिर प्रशासन, वित्तीय व्यवस्था, श्रद्धालु सुविधाओं और संचालन में जितेंद्र मिश्र की कार्यशैली पर सभी की नजर रहेगी।
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