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Aaj Ka Panchang: आज भूलकर भी राहुकाल में न करें शुभ काम, 21 मई को बन रहे हैं 3 सबसे दुर्लभ संयोग

Aaj Ka Panchang:  सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में पंचांग का बहुत बड़ा महत्व है। धार्मिक दृष्टिकोण से आज यानी गुरुवार, 21 मई 2026 का दिन बेहद खास, पवित्र और दुर्लभ योगों से भरा हुआ है। आज ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है, जिसे देश भर में भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) को समर्पित ‘स्कन्द षष्ठी’ के रूप में बेहद श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर आकाश मंडल में सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और ‘गुरु पुष्य योग’ का एक बेहद चमत्कारी और त्रिकोणीय महासंयोग बन रहा है, जो इस दिन की आध्यात्मिक शक्ति और महत्व को कई गुना बढ़ा देता है। पंचांग के अनुसार, आज सूर्योदय सुबह 5 बजकर 27 मिनट पर संपन्न हुआ है और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 8 मिनट पर होगा।

‘गुरु पुष्य योग’ का महामुहूर्त, खरीदारी के लिए सबसे उत्तम दिन

आज के पंचांग की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आज पूरे दिन पुष्य नक्षत्र का प्रभाव रहने वाला है। गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का होना ज्योतिष शास्त्र में ‘गुरु पुष्य योग’ का निर्माण करता है, जिसे सभी 27 नक्षत्रों के योगों में सबसे श्रेष्ठ और अक्षय फल देने वाला माना गया है। इस महामुहूर्त में सोना, चांदी, भूमि, वाहन या किसी भी नए व्यापार की शुरुआत करना अत्यंत भाग्यशाली और समृद्धि लाने वाला माना जाता है। यदि आप आज के दिन कोई विशेष पूजा, अनुष्ठान या अपने किसी बड़े काम की नींव रखना चाहते हैं, तो दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहने वाला ‘अभिजीत मुहूर्त’ आपके लिए सबसे सर्वोत्तम और अचूक रहेगा। इसके अतिरिक्त, रात्रि के समय 8 बजकर 47 मिनट से रात 10 बजकर 18 मिनट तक ‘अमृत काल’ का एक और श्रेष्ठ समय भक्तों को प्राप्त होगा।

दोपहर में रहेगा राहुकाल का साया, बरतें विशेष सावधानी

जहां एक तरफ आज का दिन कई शुभ और मंगलकारी योगों से युक्त है, वहीं दूसरी तरफ पंचांग में एक निश्चित समय ऐसा भी है जब किसी भी शुभ कार्य को करने की सख्त मनाही होती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज दोपहर 2 बजे से लेकर दोपहर 3 बजकर 43 मिनट तक ‘राहुकाल’ का साया रहने वाला है। सनातन परंपरा में राहुकाल के समय को सबसे ज्यादा अशुभ और बाधा उत्पन्न करने वाला माना जाता है। इसलिए, सभी श्रद्धालुओं और पाठकों को यह विशेष सलाह दी जाती है कि वे इस तय राहुकाल के दौरान किसी भी नए सौदे, बड़े निवेश, यात्रा या किसी भी विशेष मांगलिक अनुष्ठान को करने से पूरी तरह बचें। दोपहर के इस अशुभ समय को छोड़कर आप दिन के अन्य किसी भी श्रेष्ठ मुहूर्त में अपनी पूजा-अर्चना और मंगल कार्य निर्विघ्न संपन्न कर सकते हैं।