
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां पार्टी के भीतर विधायकों और सांसदों की बगावत की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मुश्किल घड़ी में ममता बनर्जी के लिए राहत की एक बड़ी खबर भी सामने आई है। पार्टी के कई कद्दावर और सीनियर नेताओं ने इस संकट के समय में ममता बनर्जी का हाथ छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है।
टीएमसी के स्टार सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद खुलकर ममता बनर्जी के समर्थन में खड़े हो गए हैं। इसके साथ ही बाबुल सुप्रियो ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे इस कठिन परिस्थिति में अपनी नेता और पार्टी के साथ पूरी मजबूती से बने रहेंगे। इस पूरे सियासी घटनाक्रम और पार्टी के भीतर मचे भूचाल पर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने बेहद बेबाकी से अपनी राय रखी है।
पार्टी में कोई बिखराव नहीं, ‘जोंक’ की तरह पलने वाले भाग रहे हैं
जब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखरने वाली है, तब कीर्ति आजाद ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका कहना है कि पार्टी में कोई बड़ी टूट नहीं हुई है और वर्तमान में भी टीएमसी के 28 सांसद पूरी तरह से एकजुट और बरकरार हैं।
बागी नेताओं पर कड़ा प्रहार करते हुए कीर्ति आजाद ने कहा कि जो लोग इतने सालों तक पार्टी के भीतर एक ‘जोंक’ की तरह पलते रहे और मलाई खाते रहे, आज खराब वक्त देखकर वही भगोड़े मैदान छोड़कर भाग रहे हैं। बीजेपी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जो पार्टी कभी अपने अलग वर्क कल्चर और सिद्धांतों की बात करती थी, उसने आज दूसरी पार्टियों के नेताओं को शामिल कर ‘उधार का सिंदूर’ अपनी मांग में डाल लिया है। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी का उदाहरण देते हुए विपक्ष के भ्रष्टाचार विरोधी दावों पर भी गंभीर सवाल उठाए।
‘ममता बनर्जी का मतलब ही टीएमसी है’
कीर्ति आजाद ने ममता बनर्जी के संघर्षों को याद करते हुए भावुक अंदाज में कहा कि इस पार्टी को दीदी ने किसी शॉर्टकट से नहीं, बल्कि अपने खून-पसीने से सींचकर बनाया है। उन्होंने कहा:
“ममता बनर्जी ने इस पार्टी को खड़ा करने के लिए लाठियां खाई हैं, उनका माथा फटा, पसलियां और हाथ टूटे। उन्हें बालों से खींचकर फेंका गया और यहां तक कि सीवर में इस हालत में फेंक दिया गया था कि लोग उन्हें मरा हुआ समझ रहे थे। इन सबके बावजूद वह दोबारा खड़ी हुईं। इसलिए अगर सच में टीएमसी का कोई अस्तित्व है, तो वह सिर्फ और सिर्फ ममता बनर्जी हैं। जीत के साथी तो बहुत मिल जाते हैं, लेकिन इंसान के असली चरित्र की परीक्षा उसके खराब वक्त में ही होती है।”
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ साजिश और काकोली दस्तीदार पर पलटवार
पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के भविष्य और उनके स्टेटस को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी कीर्ति आजाद ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि विरोधियों ने जब देखा कि ममता बनर्जी की लोकप्रियता को सीधे कम नहीं किया जा सकता, तो उन्होंने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक सोची-समझी मुहिम छेड़ दी।
अभिषेक बनर्जी का बचाव करते हुए आजाद ने कहा कि वह अभी जूनियर हैं, नए हैं और धीरे-धीरे नेतृत्व संभाल रहे हैं। अगर उनके काम में कोई कमी या गलती होगी तो सीनियर नेता उन्हें सिखाएंगे, लेकिन इस बहाने पार्टी छोड़कर भागने का कोई औचित्य नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार के दावों और उनके पुराने विवादों को हवा देते हुए उनके भ्रष्टाचार विरोधी बयानों पर तीखा पलटवार किया।
टीएमसी के भीतर वर्तमान स्थिति का पूरा लेखा-जोखा
तृणमूल कांग्रेस के भीतर इस समय अलग-अलग धड़ों की क्या स्थिति है, इसे आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
आगे की राह:
कीर्ति आजाद के इस इंटरव्यू से साफ है कि टीएमसी के भीतर की लड़ाई अब आर-पार के मोड़ पर आ चुकी है। जहां एक तरफ बागियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी के वफादार सिपाही इस राजनीतिक चक्रव्यूह को भेदने के लिए पूरी ताकत से डटे हुए हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि बंगाल की राजनीति की ‘दीदी’ इस सबसे बड़े संकट से उबरकर कैसे वापसी करती हैं।
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