
खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में बरसों से खून-पसीना बहाकर काम कर रहे पाकिस्तानी नागरिकों पर इस वक्त मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। यूएई से बहुत बड़ी संख्या में पाकिस्तानी शिया मुसलमानों को जबरन डिपोर्ट (निष्कासित) किया जा रहा है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि दशकों तक वहां नौकरियां और बिजनेस करने वाले लोग रातों-रात बिना अपना सामान लिए, बिना कंपनी का हिसाब किए और बैंक खातों में जमा अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई छोड़े खाली हाथ पाकिस्तान लौटने पर मजबूर हैं। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे ईरान युद्ध के बीच खाड़ी देशों से उठाए जा रहे इस कदम ने पाकिस्तान के शिया समुदाय के भीतर एक गहरा खौफ और खलबली पैदा कर दी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब वैश्विक मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (HRW) ने भी इस पूरे घटनाक्रम को बेहद ‘चिंताजनक’ बताते हुए इसकी जमीनी स्तर पर जांच शुरू कर दी है।
आखिर ईरान युद्ध के बाद अचानक क्यों शुरू हुआ पाकिस्तानी शियाओं के खिलाफ यह एक्शन?
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ इस धरपकड़ और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया मुख्य रूप से 28 फरवरी के बाद से बेहद तेज हुई है। दरअसल, यह वही समय है जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू किए थे। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में जब ईरान ने यूएई के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले दागे, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया। पाकिस्तान के शिया धार्मिक और राजनीतिक नेताओं का आरोप है कि इसी भू-राजनीतिक टकराव और आंतरिक सुरक्षा का हवाला देकर यूएई प्रशासन ने उनके समुदाय के लोगों को चुन-चुनकर देश से बाहर निकालना शुरू कर दिया है।
7,500 से अधिक लोगों का रातों-रात हुआ निष्कासन, केवल एक जिले के 1,500 लोग आए वापस
पाकिस्तान के शिया राजनीतिक संगठन ‘मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन’ द्वारा तैयार किए गए आंतरिक डेटाबेस के अनुसार, 28 फरवरी से लेकर अब तक लगभग 7,500 से अधिक पाकिस्तानी शियाओं को यूएई के अलग-अलग शहरों से डिपोर्ट किया जा चुका है। संगठन के मुख्य प्रवक्ता मोहसिन आबिदी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि ग्राउंड पर असल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है क्योंकि कई लोग डर के मारे अपनी जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान के शिया बहुल इलाके कुर्रम जिले के एक सामाजिक नेता के मुताबिक, खाड़ी में तनाव शुरू होने के बाद से केवल उनके अकेले क्षेत्र के 1,500 कामकाजी युवाओं को यूएई से वापस घर भेजा जा चुका है।
“क्या तुम ईरान को सीक्रेट फंड देते हो?” — पूछताछ के दौरान पूछे जा रहे हैं अजीबोगरीब सवाल
दुबई और अबू धाबी से डिपोर्ट होकर लौटे लोगों की आपबीती बेहद खौफनाक और हैरान करने वाली है। रॉयटर्स ने यूएई से निकाले गए 103 पाकिस्तानियों के इमिग्रेशन डॉक्युमेंट्स और फ्लाइट डिटेल्स की बारीकी से पड़ताल की है। इनमें से 24 पीड़ितों ने रोते हुए बताया कि उन्हें अपनी सालों की मेहनत की सेविंग्स निकालने या कमरे से अपना सामान तक पैक करने की मोहलत नहीं दी गई।
चकवाल के रहने वाले एक 41 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि यूएई सुरक्षा अधिकारियों ने पहले उनकी सैलरी और पाकिस्तान भेजे जाने वाले पैसों (Remittance) का ब्योरा खंगाला और फिर सीधा सवाल दागा- “क्या तुम ईरान को आर्थिक मदद या फंड देते हो?” वहीं, करीब 16 साल तक दुबई मेट्रो में सीनियर मैनेजर के पद पर तैनात रहे एक अन्य पाकिस्तानी ने बताया कि पुलिस ने अचानक उनका फोन छीन लिया, हाथों में हथकड़ी लगाई और 9 दिनों तक अज्ञात हिरासत में रखने के बाद एक खचाखच भरी अंधेरी बस में डालकर सीधे एयरपोर्ट पर डिपोर्ट करने के लिए छोड़ दिया।
पति-पत्नी दोनों को किया अलग: वीजा अपडेट कराने गई महिला को फ्लाइट में बैठाया
इस कार्रवाई का शिकार पढ़े-लिखे आईटी प्रोफेशनल्स भी हो रहे हैं। अली अहमद नकवी और उनकी पत्नी कुरतुल ऐन साल 2024 में एक अच्छी जॉब मिलने के बाद दुबई के टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने गए थे। नकवी ने बताया कि उनकी पत्नी 18 अप्रैल को उस वक्त हिरासत में ले ली गईं जब वह एक नई नौकरी ज्वाइन करने के लिए अपना वर्क वीजा अपडेट कराने सरकारी दफ्तर गई थीं। उन्हें वहीं से सीधे डिपोर्ट कर दिया गया। इसके बाद जब नकवी अपनी पत्नी की तलाश में पाकिस्तान लौटने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे, तो उन्हें भी फ्लाइट में चढ़ने से ठीक पहले हिरासत में ले लिया गया और बिना कोई कारण बताए 93 अन्य शिया नागरिकों के साथ एक विशेष विमान में बैठाकर पाकिस्तान डिपोर्ट कर दिया गया।
यूएई सरकार ने साधी चुप्पी, पर पाकिस्तान सरकार के बयान से पीड़ित नाराज
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय विवाद पर दोनों देशों की सरकारों का रुख इस प्रकार है:
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की चुप्पी: यूएई के विदेश मंत्रालय ने इस बड़े पैमाने पर हो रहे डिपोर्टेशन और शिया समुदाय को टारगेट किए जाने के आरोपों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सवालों पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया या टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया है।
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पाकिस्तान सरकार का अजीब दावा: इस बीच पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने एक बेहद सुरक्षात्मक बयान जारी करते हुए कहा कि यूएई ने किसी भी नागरिक को उसके संप्रदाय या मजहब (Sect) के आधार पर देश से बाहर नहीं निकाला है। पाकिस्तान के मुताबिक, ये डिपोर्टेशन केवल यूएई के स्थानीय वीजा और इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन के चलते हुए हैं।
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इस्लामाबाद में गुपचुप जांच शुरू: हालांकि, सरकारी दावों के उलट एक वरिष्ठ पाकिस्तानी राजनयिक ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों (विशेषकर एक ही समुदाय) के अचानक वापस लौटने के बाद इस्लामाबाद बैकचैनल के जरिए यूएई सरकार से इस पूरी गंभीर स्थिति की समीक्षा और बातचीत कर रहा है।
ठप हुआ रेमिटेंस: हजारों परिवारों पर मंडराया दाने-दाने का आर्थिक संकट
यूएई से अचानक हुई इस बेदखली ने पाकिस्तान के कई जिलों की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। वापस लौटे ज्यादातर लोग अपने घरों के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, जिनके द्वारा भेजे जाने वाले रेमिटेंस पर पाकिस्तान में उनके बूढ़े माता-पिता और बच्चों का पूरा खर्च चलता था। अब अचानक से नौकरियां छिन जाने, यूएई के बैंकों में जमा खाते फ्रीज होने और बिना किसी तैयारी के वतन लौटने से इन हजारों परिवारों के सामने आजीविका और दाने-दाने का एक भयंकर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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