
चिलचिलाती धूप, उमस और थका देने वाली गर्मी के इस मौसम में शरीर से लगातार पसीना बहता रहता है। ऐसे में खुद को हाइड्रेट रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। लेकिन क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप एक के बाद एक कई गिलास पानी गटक जाते हैं, फिर भी आपके गले का सूखापन दूर नहीं होता? अगर हाँ, तो आपको संभल जाने की जरूरत है। दरअसल, तेज गर्मी और धूप की वजह से लगने वाली प्यास को सिर्फ सादा पानी पीकर नहीं बुझाया जा सकता। जाने-अनजाने में लोग पानी पीते समय 4 ऐसी गंभीर गलतियां करते हैं, जिसकी वजह से ढेर सारा पानी पीने के बाद भी न तो प्यास बुझती है, न सिर का दर्द ठीक होता है और न ही शरीर को ताजगी मिलती है। आयुर्वेदाचार्य उमंग के अनुसार, आयुर्वेद में ग्रीष्म ऋतु (गर्मी के मौसम) के लिए पानी पीने के खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं पानी से जुड़ी उन गलतियों के बारे में जो आपको फायदे की जगह नुकसान पहुंचा रही हैं।
फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी सीधे गटकना
गर्मी में बाहर से आते ही 90 प्रतिशत लोग सबसे पहली और बड़ी गलती यही करते हैं कि वे सीधे फ्रिज की बोतल निकालते हैं और ठंडा पानी पी लेते हैं। यह ठंडा पानी कुछ पलों के लिए गले और मुंह को जरूर राहत देता है, लेकिन यह आपके सेल्स (कोशिकाओं) में ठीक से एब्जॉर्ब नहीं हो पाता, जिससे शरीर में पानी की कमी दूर नहीं होती। आयुर्वेद के अनुसार, अत्यधिक ठंडा पानी हमारी ‘पाचन अग्नि’ को शांत कर देता है, जिससे डाइजेशन खराब हो जाता है। मेडिकल साइंस भी मानता है कि इस ठंडे पानी को शरीर के सामान्य तापमान (37 डिग्री सेल्सियस) तक लाने के लिए शरीर को अपनी अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। रिसर्च के मुताबिक, साधारण या मटके का पानी फ्रिज के पानी की तुलना में प्यास बुझाने में ज्यादा कारगर होता है।
सिर्फ और सिर्फ सादा पानी पीने पर फोकस करना
जब मौसम सामान्य हो तो सादा पानी बेहतरीन काम करता है, लेकिन भीषण गर्मी में केवल सादा पानी पीना दूसरी सबसे बड़ी गलती है। जब शरीर से भारी मात्रा में पसीना निकलता है, तो उसके साथ केवल पानी नहीं, बल्कि जरूरी मिनरल्स जैसे सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम भी शरीर से बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में सिर्फ सादा पानी पीने से इन इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी नहीं हो पाती। आयुर्वेद में बताया गया है कि ग्रीष्म ऋतु में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए, जो पानी को शरीर में रोककर रख सकें।
एक बार में ही ढेर सारा पानी पी जाना
बहुत से लोग प्यास लगने पर एक ही सांस में 2 से 3 गिलास पानी पी जाते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो आपकी प्यास कभी नहीं बुझेगी। एक साथ बहुत सारा पानी पीने से वह सेल्स तक पहुंचने के बजाय सीधे किडनी के जरिए बाहर निकल जाता है। यही नहीं, अचानक ब्लड में पानी की मात्रा बढ़ने से सोडियम डाइल्यूट होने लगता है, जिससे शरीर में सुस्ती, थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है। आयुर्वेद कहता है कि गर्मी के दिनों में हमेशा घूंट-घूंट करके (सिप-सिप) और थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल पर ही पानी पीना चाहिए।
कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड जूस से प्यास बुझाने की कोशिश
चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक, सोडा या डिब्बाबंद पैकेज्ड जूस का सहारा लेते हैं। यह सबसे खतरनाक गलती है। ये ड्रिंक्स कुछ देर के लिए भले ही ठंडी और रिफ्रेशिंग लगें, लेकिन ये शरीर में ‘आम’ यानी टॉक्सिन्स (जहरीले तत्व) को बढ़ाती हैं। इनमें मौजूद रिफाइंड शुगर को पचाने और प्रोसेस करने के लिए हमारे सेल्स को शरीर के बाकी हिस्सों से पानी सोखना पड़ता है। इसका परिणाम यह होता है कि कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद आपका शरीर अंदर से और ज्यादा डिहाइड्रेट (पानी की कमी का शिकार) हो जाता है।
गर्मी में प्यास बुझाने और तरोताजा रहने के बेहतरीन विकल्प
अगर आप चाहते हैं कि गर्मी में आपका शरीर अंदर से कूल रहे और बार-बार प्यास न लगे, तो केवल सादे पानी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी डाइट में इन चीजों को शामिल करें:
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मिट्टी के घड़े (मटके) का पानी: यह प्राकृतिक रूप से ठंडा और एल्कलाइन होता है, जो सेहत के लिए अमृत समान है।
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नारियल पानी और नींबू पानी: ये शरीर को तुरंत जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स देते हैं।
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सत्तू ड्रिंक और छाछ/मट्ठा: यह पेट को ठंडा रखने के साथ-साथ लू से भी बचाता है।
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गुलकंद का शरबत और खस का पानी: ये दोनों चीजें शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करने के लिए आयुर्वेद में सर्वश्रेष्ठ मानी गई हैं।
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