
मुंबई/चेन्नई: 90 के दशक के मशहूर गायक अल्ताफ राजा का नाम ज़हन में आते ही ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ की यादें ताज़ा हो जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म ‘शपथ’ का उनका सुपरहिट गाना ‘इश्क और प्यार का मज़ा लीजिए’ उन्हें कैसे मिला? इस गाने के पीछे माता वैष्णो देवी के दरबार से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और आध्यात्मिक इत्तेफाक है।
जब वैष्णो देवी की यात्रा पर थे फिल्म के निर्देशक
यह किस्सा उस समय का है जब फिल्म ‘शपथ’ के निर्देशक कांति शाह माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए कटरा गए हुए थे। फिल्म की शूटिंग की योजना बन रही थी, लेकिन एक खास सिचुएशन के लिए उन्हें एक ऐसे गाने और आवाज़ की तलाश थी जो सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा सुना जिसने फिल्म की तकदीर बदल दी।
घोड़े वाले के टेप रिकॉर्डर ने दिलाई अल्ताफ की याद
यात्रा के दौरान पहाड़ियों पर चढ़ते समय कांति शाह ने देखा कि एक घोड़े वाला एक गाना बहुत चाव से सुन रहा था। वह आवाज़ किसी और की नहीं बल्कि अल्ताफ राजा की थी। उस समय अल्ताफ राजा के एल्बम ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ ने पूरे देश में धूम मचा रखी थी। उस घोड़े वाले की दीवानगी और उस आवाज़ के जादू को देखकर कांति शाह को यकीन हो गया कि उनकी फिल्म के लिए यही आवाज़ परफेक्ट है।
पहाड़ों से सीधे रिकॉर्डिंग स्टूडियो तक का सफर
मुंबई वापस लौटते ही कांति शाह ने संगीतकार आनंद-मिलिंद से संपर्क किया और अल्ताफ राजा को फिल्म ‘शपथ’ के गाने के लिए साइन करने का फैसला किया। ‘इश्क और प्यार का मज़ा लीजिए’ गाना जब रिकॉर्ड हुआ और पर्दे पर आया, तो उसने इतिहास रच दिया। इस गाने में अल्ताफ राजा खुद भी नज़र आए थे और उनका सिग्नेचर स्टाइल दर्शकों को खूब पसंद आया।
अल्ताफ राजा: एक अलग पहचान
अल्ताफ राजा ने इस गाने के जरिए बॉलीवुड में अपनी एक अलग जगह बनाई। ‘शपथ’ फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती मुख्य भूमिका में थे, लेकिन फिल्म की सफलता में इस कव्वालीनुमा गाने का बहुत बड़ा हाथ था। आज भी शादियों और महफिलों में यह गाना अपनी चमक बरकरार रखे हुए है। यह किस्सा साबित करता है कि कभी-कभी सबसे बड़े मौकों की प्रेरणा आपको सबसे साधारण जगहों पर मिल जाती है।
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